सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ की अवैध इमारतों पर सख्ती से दखल दिया
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु के निगमों और विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिए हैं कि वे अवैध और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Lucknow: लखनऊ की अवैध व असुरक्षित इमारतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अब तक की गई कार्रवाई की मांगी रिपोर्ट
Fri, 10 Jul 2026 09:42 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 10 Jul 2026 09:42 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कोर्ट के 20 मई के निर्देशों के पालन में की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट के सामने रखें। अधिकारियों को अगली तारीख चार अगस्त को अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के भी निर्देश दिया गया है।
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विस्तार
गैरकानूनी एवं असुरक्षित इमारतों व ढांचों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ, पटना व तमिलनाडु के नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों के आला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उनसे ऐसी इमारतों के खिलाफ की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जिनसे लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरा है।
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लखनऊ के अलीगंज व दिल्ली के मालवीय नगर में आग लगने और दिल्ली के साकेत में इमारत गिरने की घटनाओं का संज्ञान लेते हुए, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे कोर्ट के 20 मई के निर्देशों के पालन में की गई कार्रवाई की जानकारी कोर्ट के सामने रखें। अधिकारियों को अगली तारीख चार अगस्त को अदालत में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहने के भी निर्देश दिए हैं।
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अधिकारी सिर्फ साख बचाने की कर रहे कोशिश
पीठ ने न्यायमित्र की राय से सहमति जताई कि अधिकारी केवल दिखावे के लिए कार्रवाई कर रहे हैं। वे इमारत गिरने या आग लगने की घटनाओं के बाद सिर्फ बिल्डरों को गिरफ्तार करते हैं, पर अपने उन अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करते, जो अवैध निर्माणों के मामले में कार्रवाई करने में नाकाम रहे।
पीठ ने कहा, अधिकारी सिर्फ अपनी साख बचाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि सिर्फ बिल्डरों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है। अथॉरिटी या कॉरपोरेशन के किसी भी अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। अधिकारियों को पीठ ने निर्देश दिया, वे अपनी रिपोर्ट में ऐसी विफलताओं के लिए जिम्मेदार वरिष्ठ अफसरों के नाम उजागर करें।
कार्रवाई न होने पर मुख्य अधिकारियों की जिम्मेदारी
सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर नगर निगमों एवं विकास प्राधिकरणों के आयुक्त, सीईओ और अन्य जिम्मेदार अधिकारी अगली तारीख तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं रखते या कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं करते हैं, तो स्वतःसंज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की जा सकती है। कोर्ट ने कहा, अगर अगली तारीख पर यह पाया गया कि पूर्व में दिए गए निर्देशों और जमींदोज करने के आदेशों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है, तो संबंधित प्राधिकरण के मुख्य अफसरों की सीधी जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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