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लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश: एलडीए को मुआवजा नई दरों के अनुसार, पुराने कानून के तहत कार्रवाई अवैध

लखनऊ हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि एक जनवरी 2014 के बाद शुरू किए गए भूमि अधिग्रहण कार्यक्रम अवैध हैं और प्रभावित लोगों को वर्तमान दरों के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए।

4 जुलाई 2026 को 10:24 am बजे
लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश: एलडीए को मुआवजा नई दरों के अनुसार, पुराने कानून के तहत कार्रवाई अवैध

सौजन्य से:- Live Hindustan

पुराने कानून के तहत एलडीए का भूमि अधिग्रहण अवैध, हाईकोर्ट का आदेश- मौजूदा रेट से मुआवजा दो

हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक जनवरी 2014 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के निरस्त होने के बाद उसी के तहत शुरू की गई, भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ से ही शून्य मानी जाएगी।

Lucknow Highcourt Order: हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि एक जनवरी 2014 को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के निरस्त होने के बाद उसी के तहत शुरू की गई, भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई प्रारंभ से ही शून्य मानी जाएगी। इस टिप्पणी के साथ न्यायालय ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को निर्देश दिया है कि याची को 2014 के पहले की दरों पर नहीं, बल्कि नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत वर्तमान दरों के आधार पर नया मुआवजा निर्धारित कर तीन माह के भीतर भुगतान किया जाए।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने लोहिया डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर पारित किया। याचिका में कहा गया था कि सरोजनीनगर तहसील के अहमामऊ गांव स्थित 0.5020 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए धारा-4 की अधिसूचना 27 दिसंबर 2013 की तारीख की थी, लेकिन उसका राजपत्र में प्रकाशन 4 जनवरी 2014 को हुआ। इसके बाद अन्य सभी वैधानिक कार्यवाही भी एक जनवरी 2014 के बाद हुईं, जबकि उसी दिन से 1894 का अधिनियम समाप्त होकर नया कानून लागू हो चुका था लिहाजा पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया अवैध है।

मामले पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि सिर्फ अधिसूचना पर अंकित तारीख से यह नहीं माना जा सकता कि अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू हो गई थी, कानून के अनुसार अधिग्रहण की प्रक्रिया तभी शुरू मानी जाएगी, जब धारा-4 की अधिसूचना का विधिवत राजपत्र, समाचार पत्रों और स्थानीय स्तर पर प्रकाशन हो और चूंकि यह सभी औपचारिकताएं एक जनवरी 2014 के बाद पूरी हुईं, इसलिए निरस्त हो चुके 1894 के कानून के तहत की गई कार्यवाही कानूनी रूप से टिक नहीं सकती। हालांकि न्यायालय ने यह भी माना कि अधिग्रहण 45 मीटर चौड़ी सार्वजनिक सड़क के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया गया है लिहाजा अधिग्रहण प्रक्रिया को निरस्त करने के बजाय एलडीए को वर्तमान बाजार दरों के अनुसार नया मुआवजा तय कर भुगतान करने का आदेश दिया है।

लेखक के बारे में

Dinesh Rathourदिनेश राठौर वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। डिजिटल और प्रिंट

पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले दिनेश ने अपने करियर की शुरुआत 2010 में हरदोई से की थी। कानपुर

यूनिवर्सिटी से स्नातक दिनेश ने अपने सफर में हिन्दुस्तान (कानपुर, बरेली, मुरादाबाद), दैनिक जागरण और राजस्थान पत्रिका

(डिजिटल) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। हरदोई की गलियों से शुरू हुआ पत्रकारिता का सफर

आज डिजिटल मीडिया के शिखर तक पहुँच चुका है। दिनेश राठौर ने यूपी और राजस्थान के विभिन्न शहरों की नब्ज को प्रिंट और

डिजिटल माध्यमों से पहचाना है।

लाइव हिन्दुस्तान की यूपी टीम में कार्यरत दिनेश दिनेश, खबरों के पीछे की राजनीति और सोशल मीडिया के ट्रेंड्स (वायरल

वीडियो) को बारीकी से विश्लेषण करने के लिए जाने जाते हैं।

पत्रकारिता का सफर

हरदोई ब्यूरो से करिअर की शुरुआत करने के बाद दिनेश ने कानपुर हिंदुस्तान से जुड़े। यहां बतौर स्ट्रिंगर डेस्क पर करीब

एक साल तक काम किया। इसके बाद वह कानपुर में ही दैनिक जागरण से जुड़े। 2012 में मुरादाबाद हिंदुस्तान जब लांच हुआ तो

उसका हिस्सा भी बने। करीब दो साल यहां नौकरी करने के बाद दिनेश राजस्थान पत्रिका से जुड़ गए। सीकर जिले में दिनेश ने

करीब तीन साल तक पत्रकारिता की। उन्होंने एक साल तक डिजिटल का काम भी किया। 2017 में दिनेश ने बरेली हिंदुस्तान में

प्रिंट के डेस्क पर वापसी की। लगभग दो साल की सेवाओं के बाद डिजिटल हिंदुस्तान में काम करने का मौका मिला जिसका सफर जारी

है।

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