किसी भी समझौते में क्लाइंट की इजाजत बिना नहीं हो सकता है पार्टी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी समझौते में क्लाइंट की स्पष्ट इजाजत के बिना कोई अधिवक्ता उसकी ओर से किसी समझौते में शामिल होने का अधिकार नहीं रखता। यह फैसला मामले में आया है जहां एक प्रतिवादी के कानूनी उत्तराधिकारियों ने समझौता डिक्री को चुनौती दी है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
फरवरी 1994 में ट्रायल कोर्ट ने पक्षकारों की ओर से संयुक्त रूप से दायर आवेदन के आधार पर समझौता डिक्री (Compromise Decree) पारित कर दी थी। वर्ष 1997 में अंतिम डिक्री भी पारित हुई। करीब 28 साल बाद एक प्रतिवादी के कानूनी उत्तराधिकारियों ने इस समझौता डिक्री को चुनौती देते हुए दावा किया कि उनके पूर्वज ने कभी समझौते पर साइन नहीं किए थे और न ही किसी अधिवक्ता को उनकी ओर से समझौता करने का अधिकार दिया था। यह भी आरोप लगाया कि वकालतनामा और लिखित बयान जाली थे।
संपत्ति बंटवारा केस में 37 साल बाद होगा ट्रायल, सुप्रीम कोर्ट बोला- क्लाइंट की बिना इजाजत के समझौता नहीं कर सकते वकील
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि क्लाइंट की स्पष्ट इजाजत के बिना कोई अधिवक्ता उसकी ओर से किसी समझौते में शामिल होने का अधिकार नहीं रखता।
फरवरी 1994 में ट्रायल कोर्ट ने पक्षकारों की ओर से संयुक्त रूप से दायर आवेदन के आधार पर समझौता डिक्री (Compromise Decree) पारित कर दी थी। वर्ष 1997 में अंतिम डिक्री भी पारित हुई। करीब 28 साल बाद एक प्रतिवादी के कानूनी उत्तराधिकारियों ने इस समझौता डिक्री को चुनौती देते हुए दावा किया कि उनके पूर्वज ने कभी समझौते पर साइन नहीं किए थे और न ही किसी अधिवक्ता को उनकी ओर से समझौता करने का अधिकार दिया था। यह भी आरोप लगाया कि वकालतनामा और लिखित बयान जाली थे।
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