आरोपी को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी
नाहन में अदालत ने तहसील नाहन के रहने वाले रणजीत सिंह को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन उन पर बिना लाइसेंस और बीमा के वाहन चलाने पर 1,000 रुपये का जुर्माना ठहराया गया।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Sirmour News: अदालत 5
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बिना लाइसेंस और बीमा के वाहन चलाने पर जुर्माना बरकरार
नाहन। सड़क दुर्घटना से जुड़े एक आपराधिक अपील मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने तहसील नाहन निवासी रणजीत सिंह को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा के वाहन चलाने पर 1 हजार रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया।
यह मामला 11 अक्तूबर 2020 को नाहन-कालाअंब मार्ग पर दो-सड़का स्थित गोशाला के समीप हुई दो मोटरसाइकिलों की टक्कर से जुड़ा था। निचली अदालत ने फरवरी 2026 में आरोपी को लापरवाही से वाहन चलाने, दुर्घटना कर चोट पहुंचाने और बिना लाइसेंस व बीमा के वाहन चलाने का दोषी ठहराते हुए 6 महीने की कैद और 2,500 जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दुर्घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि आरोपी वैध ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का बीमा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। इसलिए एमवी एक्ट की धारा 181 और 196 के तहत निचली अदालत की ओर से लगाया गया जुर्माना यथावत रखा गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने आदेश में निचली अदालत की ओर से आईपीसी की धाराओं 279, 337 और 338 के तहत सुनाई गई सजा और जुर्माने को निरस्त करते हुए आरोपी को इन आरोपों से बरी कर दिया।-- -- -- -- -- --
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नाहन। सड़क दुर्घटना से जुड़े एक आपराधिक अपील मामले में फैसला सुनाते हुए अदालत ने तहसील नाहन निवासी रणजीत सिंह को लापरवाही से वाहन चलाने के आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और बीमा के वाहन चलाने पर 1 हजार रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया।
यह मामला 11 अक्तूबर 2020 को नाहन-कालाअंब मार्ग पर दो-सड़का स्थित गोशाला के समीप हुई दो मोटरसाइकिलों की टक्कर से जुड़ा था। निचली अदालत ने फरवरी 2026 में आरोपी को लापरवाही से वाहन चलाने, दुर्घटना कर चोट पहुंचाने और बिना लाइसेंस व बीमा के वाहन चलाने का दोषी ठहराते हुए 6 महीने की कैद और 2,500 जुर्माने की सजा सुनाई थी।
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इसके खिलाफ आरोपी ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि दुर्घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था। हालांकि, अदालत ने यह भी माना कि आरोपी वैध ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन का बीमा प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। इसलिए एमवी एक्ट की धारा 181 और 196 के तहत निचली अदालत की ओर से लगाया गया जुर्माना यथावत रखा गया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन ने आदेश में निचली अदालत की ओर से आईपीसी की धाराओं 279, 337 और 338 के तहत सुनाई गई सजा और जुर्माने को निरस्त करते हुए आरोपी को इन आरोपों से बरी कर दिया।
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