अफेयर की आड़ में नहीं छिप सकते सुप्रीम कोर्ट ने किया बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने राइट-टू प्राइवेसी के नाम पर अफेयर के सबूत छिपाने की मांग को दो पहलू से देखा। अदालत की जस्टिस मनमोहन और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा है कि निजता का अधिकार अफेयर के सबूत छिपाने के लिए नहीं है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
Supreme Court Big Decision Husband Wife Cannot Use Right To Privacy To Hide Evidence Of Infidelity
शादी के बाद अब 'राइट टू प्राइवेसी' की आड़ में नहीं छिपा सकेंगे अफेयर! सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया बड़ा फैसला
Contributed by: Amit Anand Choudhary•Edited by: अभिषेक पाण्डेय|टाइम्स न्यूज नेटवर्क•
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सुप्रीम कोर्ट ने राइट-टू प्राइवेसी पर बड़ा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले निजता के अधिकार का उपयोग शादी के बाद अफेयर के संबंध को छिपाने के लिए नहीं कर सकते हैं।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाला निजता का अधिकार इतना व्यापक नहीं है कि उसका इस्तेमाल पति या पत्नी से अफेयर के सबूत छिपाने के लिए किया जाए। सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया तलाक के मामलों में यदि व्यभिचार साबित करने के लिए मोबाइल कॉल रिकॉर्ड या होटल में ठहरने का रिकॉर्ड जरूर हो, तो सिर्फ निजता का हवाला देकर इन दस्तावेजों को अदालत में पेश होने से नहीं रोका जा सकता है।
शुक्रवार को जस्टिस मनमोहन और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा, दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया और पति की अपील को खारिज कर दिया। पति ने तर्क दिया था कि उसके रिकॉर्ड और होटल में ठहरने की जानकारी अदालत में मंगाना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हाई कोर्ट के फैसले पर 'सुप्रीम' मुहर
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि निजता का अधिकार पूर्ण नहीं है। अदालत ने कहा था सार्वजनिक हित और न्याय सुनिश्चित करने के लिए उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने था कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट में बेवफाई को तलाक का वैध आधार माना गया है। इसलिए, यह बिल्कुल भी जनहित में नहीं होगा कि अदालत निजता के अधिकार के आधार पर ऐसे विवाहित पुरुष की मदद करे, जिस पर शादीशुदा होने के बावजूद शादी के बाहर यौन संबंध बनाने का आरोप हो।
हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराते हुए यह बात कही थी। जिसमें उसके होटल में ठहरने के रिजर्वेशन की जानकारी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड देने का निर्देश दिया गया था।
क्या था मामला?
मामले में दंपति की शादी 1998 में हुई थी और 2000 में उनकी एक बेटी पैदा हुई। पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति का दूसरी महिला के साथ शादी के बाद भी संबंध था और वह उसके साथ जयपुर के एक होटल में रुका था।
इन आरोपों के बाद पत्नी ने तलाक की याचिका दायर करते हुए पति के होटल बुकिंग रिकॉर्ड और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड अदालत से मंगाने की मांग की। परिवार न्यायालय ने यह मांग स्वीकार कर ली, जिसे बाद में दिल्ली हाई कोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
लेखक के बारे मेंअभिषेक पाण्डेयअभिषेक पाण्डेय नवभारत टाइम्स में डिजिटल में पत्रकार हैं। वे जुलाई- 2025 में टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप के नवभारत टाइम्स, डिजिटल विंग से जुड़े। वह वर्तमान में नेशनल और दिल्ली डेस्क से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं। पत्रकारिता में बतौर रिपोर्टर और डेस्क पर काम करने का 4 वर्षों का अनुभव है। नवभारत टाइम्स में जुड़ने से पहले वह दैनिक जागरण में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत थे। अभिषेक ने 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव 2024, महाकुंभ 2025 को काफी करीब से कवर किया है। अभी वह राष्ट्रीय स्तर पर हो रही सियासी उथल-पुथल, सामाजिक परिवर्तन और क्राइम से जुड़ी खबरों पर बारीकी से नजर रखते हैं।
विशेषज्ञता
उत्तर भारत के राज्यों की सियासी व आपराधिक घटनाक्रम पर अच्छी पकड़, किताबों के जरिए इतिहास को वर्तमान के पन्नों में खंगालने की कोशिश।
पत्रकारिता अनुभव
रामा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री हासिल करने के बाद अभिषेक पाण्डेय ने दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में पत्रकारिता का शुरुआती ज्ञान लिया। इसके बाद उन्होंने कई संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग की। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के लिए जारी होने वाली धनराशि में घोटाले का खुलासा, सरकारी राशन वितरकों द्वारा 'राशन चोरी' का भंड़ाफोड़ किया, साथ ही किसान आंदोलन की ग्राउंड रिपोर्टिंग की। इसके बाद साल 2022 में दैनिक जागरण के डिजिटल विंग में बतौर सब एडिटर के पद पर अपने करियर की औपचारिक शुरुआत की। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की डेस्क पर अपनी पकड़ मजबूत की। बेहतरीन लेखनी और कार्य के प्रति समर्पण को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने उन्हें 2024 में वरिष्ठ उप संपादक के पद पर प्रमोट किया। दैनिक जागरण में रहते हुए उन्होंने, खबरों का संपादन, एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया। इसके बाद अभिषेक पाण्डेय ने जुलाई 2025 में नवभारत टाइम्स के साथ अपनी पारी की शुरुआत की।
शिक्षा/पुरस्कार
मूल रूप से कानपुर से जुड़े अभिषेक पाण्डेय ने रामा यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है। दैनिक जागरण में उन्हें तीन बार बेस्ट परफॉर्मर ऑफ द मंथ से सम्मानित किया गया था।... और पढ़ें
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