न्याय सभी के लिए सुलभ होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को केवल सक्षम लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि सभी के लिए न्याय की सुलभता पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को संविधान के सिद्धांतों को जमीनी स्तर पर लागू करना चाहिए।

सौजन्य से:- Hindustan Hindi News
न्यायपालिका सभी के लिए सुलभ हो: मुख्य न्यायाधीश
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका को केवल सक्षम लोगों के अधिकारों की रक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्हें न्याय की सुलभता पर जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को संविधान के सिद्धांतों को केवल कागज पर नहीं, बल्कि हर नागरिक की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लागू करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा है कि ऐसा न्यायालय जो केवल उन लोगों के अधिकारों की रक्षा करता है जो मुकदमेबाजी का खर्च उठाने में सक्षम हैं, वह अपने संवैधानिक कार्य को पूरा नहीं कर रहा है। वह केवल उसकी औपचारिकता निभा रहा है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका को न केवल अधिकारों का संरक्षक होना चाहिए, बल्कि यह इतनी सुलभ होनी चाहिए कि उसका संरक्षण वास्तविक रूप से महसूस हो। सीजेआई शुक्रवार को 'क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन' में वाणिज्यिक विधि केंद्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होने गये थे। वहां उन्होंने छात्रों के साथ व्यापक चर्चा की। छात्रों ने उनसे न्यायपालिका, न्याय तक पहुंच और कानूनी पेशे के भविष्य समेत विभिन्न मुद्दों पर कई सवाल पूछे।
संविधान में निहित सिद्धांत
संविधानिक लोकतंत्र में जनता के भरोसे को बनाए रखने में न्यायपालिका की भूमिका के बारे में पूछे गए एक सवाल पर सीजेआई ने कहा कि जनता का भरोसा किसी संस्था को यूं ही नहीं मिल जाता। इसे पारदर्शिता, निरंतरता और आत्म-सुधार के जरिये लगातार हासिल करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक लोकतंत्र में न्यायपालिका जवाबदेही की अंतिम कड़ी है, लेकिन उसे स्वयं संविधान और उन लोगों के प्रति जवाबदेह होना चाहिए, जिनके लिए यह अस्तित्व में है। इसीलिए मैंने एक समान राष्ट्रीय न्यायिक नीति पर जोर दिया है। जब अदालतों के फैसले सुसंगत होते हैं, तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बढ़ता है। इससे नागरिकों को यह समझने में आसानी होती है कि कानून कैसे लागू होगा और वे उसी के अनुसार अपने निर्णय ले सकते हैं। यही कानून के शासन का मूल सिद्धांत है।
प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्रता की रक्षा हो
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका का सर्वोपरि कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि संविधान में निहित सिद्धांत केवल कागज पर लिखे शब्द न हों, बल्कि इस बात की गारंटी बने जो प्रत्येक नागरिक की स्वतंत्रता की रक्षा करें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को लोगों के अधिकारों की रक्षा करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है, विशेष रूप से उन लोगों की, जो हाशिये पर हैं। ताकि उन्हें किसी भी प्रकार के अत्याचार या उनके अधिकारों के हनन से बचाया जा सके।
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