नोएडा डीएम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने रोक को सीमित किया, सिर्फ हाईकोर्ट की सख़्ती और मुआवजे के आदेश पर
सुप्रीम कोर्ट ने मेधा रूपम की याचिका में दिया गया अंतरिम आदेश संशोधित कर केवल हाईकोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणी और छात्र आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये के मुआवजे के निर्देश पर ही रोक लगा दी। बाकी हाईकोर्ट के फैसले पर अब रोक नहीं रही और यह रोक तब तक बनी रहेगी जब तक मामले की सुनवाई गुण‑दोष के आधार पर नहीं हो जाती। न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और एनके सिंह की खंडपीठ ने यह परिवर्तन किया।

सौजन्य से:- Live Law Hindi
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा डीएम मामले में आदेश में संशोधन किया, कहा- रोक सिर्फ़ हाईकोर्ट की सख्ती और मुआवजे के निर्देश पर
Shahadat
24 Sept 2026 3:40 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बौद्ध नगर जिला (नोएडा) मजिस्ट्रेट मेधा रूपम की याचिका में पारित अपने अंतरिम आदेश को संशोधित किया, जिसमें निर्दिष्ट किया गया है कि रोक केवल अधिकारी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट की प्रतिकूल टिप्पणियों और स्टूडेंट आकृति चौधरी को मुआवजा देने के निर्देश पर है, जो नोएडा श्रमिकों के विरोध के संबंध में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत थी।
दूसरे शब्दों में, चौधरी की हिरासत रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई गई।
बुधवार को अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, पूरे हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी गई थी, क्योंकि इसमें कहा गया था: "जब तक मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर नहीं हो जाती, तब तक लागू फैसले, विशेष रूप से पैरा संख्या 27 से 33 पर रोक रहेगी।"
संशोधित आदेश में, जिसे बाद में अपलोड किया गया, यह निर्दिष्ट किया गया,
"जब तक मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर नहीं हो जाती, तब तक याचिकाकर्ता के खिलाफ जुर्माना और सख्ती के अवार्ड सहित आक्षेपित निर्णय के पैरा संख्या 27 से 33 के संचालन पर रोक रहेगी।"
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एनके सिंह की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई की।
हाईकोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27-33 में डीएम के खिलाफ सख्ती और छात्र को 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश शामिल था, जिसे मेधा रूपम के वेतन से वसूला जाना था।
Case Details: MEDHA ROOPAM v AKRITI CHAUDHARY AND ORS|Diary No. 56202-2026 |
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जजों की सुविधाओं में अंतर खत्म: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को एकसमान नीति बनाने का आग्रह

मद्रास हाई कोर्ट ने 80 वर्षीय पिता के भरण‑पोषण के अधिकार को खारिज किया

फिल्म सितारों को 'कोई भी कानून से ऊपर नहीं'—मुंढे ने राष्ट्रपति की सार्वजनिक स्वास्थ्य अपील को समर्थन

कोरबा में 12 दिसंबर को आयोजित होगी नेशनल लोक अदालत

सेलिब्रिटीज़ नहीं कर सकते स्वास्थ्य‑विज्ञापनों पर कानून को नज़रअंदाज़, FDA आयुक्त तुकाराम मुंढ़े ने दी कड़ी चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम को अकेले उत्तरदायी नहीं माना, 5 लाख रुपये के जुर्माने पर रोक

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर लोकतंत्र के हमले का आरोप, आंतरिक झगड़े की रिपोर्टें उजागर

बॉम्बे हाई कोर्ट ने अदानी की ड्यूटी‑फ़्री बिक्री दलील को खारिज किया, निकोटीन पाउच पर भारतीय कानून लागू
ताज़ा ख़बरें
- मुंबई हाई कोर्ट ने अडानी की ड्यूटी‑फ्री दलील खारिज, निकोटीन पाउच अब भी भारतीय कानून के अंतर्गत
- दिल्ली हाई कोर्ट पर फर्जी आदेश, ‘इंटरिम स्टे’ पैराग्राफ की जाँच का आदेश
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के महत्व पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट को स्पष्टीकरण
- सुप्रीम कोर्ट ने नगर निकायों को आवासीय संपत्तियों में अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल पर सील‑आदेश देने का निर्देश
- सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी प्रॉपर्टी के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त रुख, नगर निगमों को कार्रवाई का आदेश
- उत्तर प्रदेश में 900 नई अदालतों की स्वीकृति, पहले चरण में कौन-सी अदालतें होंगी?
- सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं के ऊँचे दामों को दिनदहाड़े डकैती बताया
- सुप्रीम कोर्ट ने दानम नागेंद्र की अयोग्यता याचिका खारिज की, कहा मामला ‘आया‑गया‑रम’ जैसा

