सुप्रीम कोर्ट ने दानम नागेंद्र की अयोग्यता याचिका खारिज की, कहा मामला ‘आया‑गया‑रम’ जैसा
सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की तेलंगाना हाईकोर्ट के अयोग्य घोषित करने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले में दखल का कोई आधार नहीं है और यह मामला बार‑बार पार्टी बदलते नेताओं जैसा है। नागेंद्र ने बताया कि वह उपचुनाव में फिर से अपनी सीट जीतने का भरोसा रखता है।

सौजन्य से:- Hindustan
आपका मामला ‘आया राम, गया राम’ जैसा है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की याचिका खारिज कर दी है। उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। नागेंद्र ने अपनी सीट बरकरार रखने का भरोसा जताया है और उपचुनाव में लोग उन्हें परिवार के सदस्य की तरह देखते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की याचिका खारिज कर दी। उन्होंने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें सत्ताधारी कांग्रेस में शामिल होने के बाद अयोग्य घोषित कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यह ‘आया राम, गया राम’ जैसा मामला है। हाईकोर्ट ने इस साल मार्च में विधानसभा अध्यक्ष के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें उनकी अयोग्यता की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है। जस्टिस बागची ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि क्या आपका मामला ‘आया राम, गया राम, फिर आया राम’ जैसा है? यह मुहावरा उन नेताओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो अक्सर अपनी पार्टी बदलते रहते हैं। बीआरएस विधायक की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए। हाईकोर्ट ने खैराताबाद के विधायक नागेंद्र को 23 अप्रैल, 2024 से तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया था। उन्होंने बीआरएस विधायक रहते हुए 2024 में सिकंदराबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था。
उपचुनाव में अपनी सीट बरकरार रखेंगे : दानम
हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) विधायक दानम नागेंद्र ने भरोसा जताया कि वे उपचुनाव में अपनी सीट बरकरार रखेंगे। नागेंद्र 2023 के चुनावों में खैराताबाद निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा के लिए चुने गए थे। उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि उनके शुभचिंतक चाहते थे कि वह अयोग्य ठहराए जाने के बाद होने वाले उपचुनाव का सामना करें। उन्होंने कहा कि वह हमेशा लोगों के लिए उपलब्ध रहे हैं और उपचुनाव में लोग उन्हें आशीर्वाद देंगे, क्योंकि वे उन्हें विधायक से ज्यादा परिवार के सदस्य के तौर पर देखते हैं।
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