केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आईपीएस प्रतिनियुक्ति के महत्व पर केंद्र का सुप्रीम कोर्ट को स्पष्टीकरण
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सीएपीएफ के प्रभावी संचालन हेतु आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति अनिवार्य है। पिछले साल के फैसले के बाद भी 46 आईपीएस अधिकारियों को इन पाँच बलों में तैनात किया गया, जबकि कोर्ट ने धीरे‑धीरे इस संख्या को घटाने का निर्देश दिया था। यह स्पष्टीकरण गृह मंत्रालय ने अवमानना याचिका के उत्तर में दिया।

सौजन्य से:- Jagran
CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति क्यों है जरूरी? केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के प्रभावी कामकाज के लिए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति आवश्यक है।
HighLights
- केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, सीएपीएफ में आईपीएस प्रतिनियुक्ति जरूरी।
- सीएपीएफ के प्रभावी कामकाज हेतु आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति आवश्यक।
- मई 2025 के आदेश के बावजूद प्रतिनियुक्ति जारी रखने पर जवाब।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने सोच-समझकर नीतिगत निर्णय लिया है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की मौजूदगी उनके प्रभावी कामकाज के लिए आवश्यक है।
अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने दो सितंबर को शीर्ष अदालत द्वारा उन्हें जारी किए गए निर्देश के जवाब में दाखिल एक हलफनामे में यह बात कही है, जिसमें उनसे यह बताने को कहा गया था कि मई 2025 के उसके आदेश के बावजूद पांच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में आइपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के क्या कारण हैं, जबकि उस आदेश में इन नियुक्तियों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया गया था।
गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
गृह मंत्रालय ने इससे पहले कोर्ट को बताया था कि पिछले साल अदालत के फैसले के बाद से कुल 46 आइपीएस को इन बलों में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया।
न्यायालय का निर्देश कई सीएपीएफ कैडर अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया, जिसमें दावा किया गया था कि सीएपीएफ (सामान्य प्रशासन) अधिनियम 2026 उनके करियर में प्रगति को प्रतिबंधित करता रहेगा क्योंकि मंत्रालय न्यायालय के 2025 के फैसले को लागू नहीं कर रहा था।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- आदेश आते रहे-अतिक्रमण होते रहे, सुप्रीम कोर्ट की कड़ाई के बावजूद यूपी में अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में ढिलाई
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