गौतम अडानी की अमेरिकी कानूनी समस्याओं का अंत, कोर्ट ने आरोप खारिज किए!
अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने गौतम अडानी के खिलाफ साजिश और धोखाधड़ी के आरोप हटाने के लिए जस्टिस डिपार्टमेंट के अनुरोध को मान लिया, जिससे उनकी अमेरिकी कानूनी समस्याएं खत्म हो गई हैं।

सौजन्य से:- पैसा।9जीवित रहें।
गौतम अडानी की खत्म हुईं अमेरिकी कानून की मुश्किलें, कोर्ट ने धोखाधड़ी के आरोप किए खारिज, क्या था पूरा मामला?
ब्रुकलिन में तैनात अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने सोमवार को यह फैसला सुनाया. मामले को खत्म करने पर सहमति देने से पहले, उन्होंने सरकारी वकीलों से विस्तार से पूछा कि वे इसे क्यों खत्म करना चाहते हैं. गौतम अडानी ने मंगलवार को अमेरिकी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया.
मुख्य बातें
- गौतम अडानी की अमेरिकी कानूनी मुश्किलें खत्म हो गई हैं.
- 2024 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई खत्म हो गई.
- सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोप खारिज.
अमेरिका में अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को एक जज ने खारिज कर दिया है, जिससे 2024 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है. रॉयटर्स के मुताबिक, जज ने धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोप हटाने के जस्टिस डिपार्टमेंट के अनुरोध को मान तो लिया, लेकिन इस कदम पर चिंता भी जताई.
ब्रुकलिन में तैनात अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने सोमवार को यह फैसला सुनाया. मामले को खत्म करने पर सहमति देने से पहले, उन्होंने सरकारी वकीलों से विस्तार से पूछा कि वे इसे क्यों खत्म करना चाहते हैं. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने के अडानी के पुराने वादे की इस फैसले में कोई भूमिका थी.
टला बड़ा संकट
जज के फैसले के बाद उस बड़े मामले का अंत हो गया है, जिससे इस भारतीय अरबपति के विशाल बिजनेस ग्रुप के विस्तार पर खतरा मंडरा रहा था.
न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज निकोलस गैराफिस ने सोमवार को अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ साजिश, सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड के आरोपों को खारिज कर दिया.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 2024 के आखिर में राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन के कार्यकाल के अंतिम दिनों में दायर किया गया था. 2024 में अडानी पर आरोप लगा कि उन्होंने सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट की मंजूरी पाने के लिए भारतीय अधिकारियों को रिश्वत दी और फिर अपनी कंपनी के भ्रष्टाचार-विरोधी रिकॉर्ड के बारे में अमेरिकी निवेशकों को गुमराह करने वाली जानकारी दी.
अडानी ग्रुप ने हमेशा किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है और अडानी इन आरोपों के सिलसिले में अमेरिकी अदालत में पेश नहीं हुए हैं.
किस बात पर बनी सहमति
इस बीच, अडानी ने यू. एस. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के साथ जुड़े सिविल दावों को निपटाने के लिए 6 मिलियन डॉलर और उनके भतीजे सागर अडानी ने 12 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई. अडानी एंटरप्राइजेज ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े दावों को सुलझाने के लिए यू. एस. ट्रेजरी को 275 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर भी सहमति जताई.
15 जुलाई को दाखिल एक शपथ-पत्र में अडानी ने पुष्टि की कि उन्होंने पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया था. उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने न्याय विभाग को बताया कि यह वादा मामले के समाधान का हिस्सा बन सकता है.
अडानी के वकील रॉबर्ट जिउफ्रा ने एक अलग फाइलिंग में कहा कि बचाव पक्ष की टीम ने जस्टिस डिपार्टमेंट को बताया कि अडानी ग्रुप समझौते के तहत निवेश को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. जज गारौफिस ने कहा कि वे इस बात पर कोई फैसला नहीं दे रहे हैं कि बार-बार दिए गए ये ऑफर सही थे या नहीं. उन्होंने लिखा कि यह तय करना जनता का काम है कि ऐसे ऑफर का कानून के निष्पक्ष इस्तेमाल पर क्या असर पड़ता है.
फैसले का अडानी ने किया स्वागत
अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने मंगलवार को अमेरिकी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का गहरा सम्मान है.
एक्स पर एक पोस्ट में अडानी ने लिखा, ‘मैं अमेरिकी अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं. इस मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट रहा. मैं उन सभी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं, जिन्होंने हम पर, सिस्टम पर और न्याय के लिए भारत की क्षमता पर कभी भरोसा नहीं खोया. हम वही काम करते रहेंगे जो ज़रूरी है. अपने देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी बनी रहे और खुद से बढ़कर किसी बड़े मकसद के लिए काम करना.’
कैसे खत्म हुआ मामला?
इस फैसले के साथ ही अडानी की अमेरिकी कानूनी मुश्किलें खत्म हो गई हैं. इन मुश्किलों में यू. एस. सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन और ट्रेजरी डिपार्टमेंट के साथ हुए समझौते भी शामिल थे.
अडानी के खिलाफ आरोप हटाने की सरकार की अपील, एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति और उनके सहयोगियों के बीच महीनों तक चली पर्दे के पीछे की बातचीत और कोशिशों का नतीजा थी. अब यह फैसला 64 साल के इस बड़े कारोबारी के लिए अमेरिका में अपना कारोबार बढ़ाने का रास्ता भी खोल सकता है.
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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