उत्तराखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश पर सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी आपत्ति, जानें विवाद की वजह
नैनीताल में उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश को सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई है. कारण यह है कि वह न्यायाधीश पहले इसी कंपनी के वकील के रूप में काम कर चुके थे. अब उन्होंने न्यायाधीश इसी कंपनी से जुड़े मामले में अंतरिम आदेश पारित किया था.

सौजन्य से:- ETV Bharat
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पारित किया एक अंतरिम आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति, जानिए मामला
उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश 'प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े मामले में पारित किया अंतरिम आदेश, सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति
By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : July 30, 2026 at 9:38 PM IST
नैनीताल: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की ओर से 'प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड' से जुड़े मामले में अंतरिम आदेश पारित करने पर कड़ी आपत्ति जताई है. न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने न्यायिक औचित्य का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि उक्त न्यायाधीश पहले एक पुराने मामले (वाद संख्या 1478/2013) में इसी निजी कंपनी के वकील के रूप में पेश हो चुके थे और वर्तमान विवाद भी उसी भूमि से जुड़ा है, इसलिए उन्हें इस मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए थी.
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि न्याय न केवल होना चाहिए, बल्कि होते हुए दिखना भी चाहिए. अपने किसी पूर्व मुवक्किल के पक्ष या विपक्ष में आदेश पारित करना इस सिद्धांत के अनुकूल नहीं है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने ये भी नोट किया कि न्यायाधीश के समक्ष दायर मूल रिट याचिकाएं बिल्कुल अलग मुद्दों पर थीं, लेकिन अंतरिम आदेशों के माध्यम से उन्होंने इस मामले के दायरे को काफी बढ़ा दिया था.
अदालत ने कहा कि भले ही ऐसा नेक इरादे से किया गया हो, लेकिन जिन याचिकाओं का संबंधित मुद्दे से कोई लेना-देना नहीं था, उनमें ऐसा करना उचित नहीं था. पीठ ने सुझाव दिया कि यदि न्यायाधीश को लगता था कि यह मामला जनहित से जुड़ा है, तो वे इसे हाईकोर्ट की जनहित याचिका समिति के समक्ष भेज सकते थे या आवश्यक प्रक्रिया के लिए मुख्य न्यायाधीश को संदर्भित कर सकते थे.
हालांकि, चूंकि हाईकोर्ट की ओर से पेड़ों को न काटने जैसे कुछ अंतरिम आदेश और आश्वासन पहले से प्रभावी हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान चरण में उन अंतरिम आदेशों में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है और मामले के सभी कानूनी पहलुओं को संबंधित बेंच के विवेक पर छोड़ दिया है.
शीर्ष अदालत ने इस आदेश की प्रति उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजने का निर्देश दिया है. ताकि, आपराधिक रिट याचिका संख्या 762/2026 और 1431/2026 को उचित बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करने और आवश्यकता पड़ने पर जनहित याचिका शुरू करने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें.
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