जिद और बदले की भावना से बचें, नहीं तो आपकी जेब खाली हो सकती है
रेडिट पर शेयर किए गए अनुभव बताते हैं कि तलाक के मामलों में जिद और बदले की भावना कैसे लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है और उनकी जेब खाली करवा सकती है। एक पति ने अपनी पूर्व पत्नी से सिर्फ डायपर का खर्च देने की मांग पर कोर्ट से बाहर समझौता करने से मना कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उसे ज्यादा बच्चों का खर्च देना पड़ा। दूसरी ओर, एक महिला के पूर्व पति ने हर साल चाइल्ड सपोर्ट टूटने के लिए उसे कोर्ट ले जाया और वहां जज ने पति को पहले से भी ज्यादा चाइल्ड सपोर्ट देने का आदेश दिया।

सौजन्य से:- ndtv.in
रेडिट ट्रेंडिंग: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट (रेडिट) के आर/आस्करेडिट फोरम पर एक दिलचस्प सवाल पूछा गया- 'तलाक के मामलों में ऐसा कौन सा मजेदार उदाहरण है, जहां जबरदस्ती केस खींचने वाले जीवनसाथी को कोर्ट में ही अपने किए का सबक मिला?' इसके जवाब में वकीलों और यूजर्स ने अपने ऐसे-ऐसे अनुभव शेयर किए हैं, जो बताते हैं कि जिद और बदले की भावना कैसे लोगों की जेब खाली करवा देती है.
डायपर के पैसे मांगने पर गया कोर्ट
एक वकील ने अपनी लॉ स्कूल की दोस्त का किस्सा शेयर किया. उनकी दोस्त का अपने पूर्व पति के साथ अच्छा तालमेल था और वह उससे सिर्फ बच्चे के डायपर और बुनियादी जरूरतों के सामान में थोड़ी मदद मांग रही थी. लेकिन पूर्व पति इस बात पर भड़क गया और उसने कोर्ट से बाहर समझौता करने से मना कर दिया. वह उल्टा अपनी पूर्व पत्नी को कोर्ट ले गया, लेकिन वहां जज ने सारे तथ्य देखकर उस पर इतना ज्यादा चाइल्ड सपोर्ट लगा दिया जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी.
इस पर एक दूसरे यूजर ने कमेंट किया- 'कुछ लोग डायपर के 100 डॉलर बचाने के चक्कर में वकील को 10,000 डॉलर दे आते हैं.'
रेडिट के तलाक के वकील: तलाक की प्रक्रिया को शामिल सभी लोगों के लिए एक दुःस्वप्न बनाने के बाद एक पति या पत्नी को अंततः अदालत में अपना कर्म प्राप्त करने का सबसे संतोषजनक उदाहरण क्या है??
आपके द्वारा/महानबाबुष्का121619 आस्करेडिट में
हर साल कोर्ट घसीटने की जिद पड़ी भारी
एक अन्य यूजर ने अपनी सहेली का मामला बताया, जिसका पूर्व पति हर साल चाइल्ड सपोर्ट की रकम दोबारा तय करवाने के लिए उसे कोर्ट घसीट लेता है. असल में महिला खुद का बिजनेस चलाती है और पति को समझ ही नहीं आता कि उसकी इनकम का हिसाब कैसे होता है. पिछले साल महिला ने कोर्ट के चक्करों से बचने के लिए पुराने रेट पर ही राजी होने की बात कही, लेकिन पति फिर भी कोर्ट चला गया. कोर्ट में जब दोनों की कमाई का हिसाब हुआ, तो पति को पहले से भी ज्यादा चाइल्ड सपोर्ट देने का आदेश मिल गया. इतना ही नहीं, बेवजह केस करने के चक्कर में उसे हजारों डॉलर का कोर्ट का खर्च भी अलग से भरना पड़ा.
लाखों की फीस के बाद भी वहीं पहुंचे
एक अन्य पीड़ित यूजर ने बताया कि उसने अपने तलाक को आसान बनाने के लिए पूर्व पति के सामने बहुत कम पैसों में कोर्ट के बाहर समझौते की पेशकश की थी. लेकिन पति ने बात मानने की जगह केस लड़ना चुना. एक साल तक वकीलों को मोटी फीस देने के बाद जब मुकदमे की सुनवाई का पहला दिन आया, तो उसने आखिरकार समझौते पर दस्तखत कर दिए. हैरान करने वाली बात यह थी कि वह रकम पत्नी की एक साल पुरानी मांग से महज 5,000 डॉलर ही अलग थी. यानी साल भर तनाव झेलने और वकीलों पर लाखों फूंकने के बाद भी हासिल कुछ नहीं हुआ.
(अस्वीकरण: यह कहानी रेडिट पर वायरल हुई एक पोस्ट और उसके बाद मिली सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं पर आधारित है. एनडीटीवी ने पोस्ट में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है.)
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