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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के अधूरे प्रोजेक्ट में बिल्डर की देरी का बोझ खरीदारों से हटाया

न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि बिल्डर की त्रुटियों के कारण लगाए गए टाइम‑एक्सटेंशन शुल्क को CIRP लागत नहीं माना जाएगा, इसलिए घर खरीदारों और नए SRA को कोई दायित्व नहीं होगा। खरीदारों ने अपने ही पैसे से ‘पूल‑एंड‑बिल्ड’ मॉडल के तहत काम जारी रखा, जबकि मूल डेवलपर का डिफॉल्ट उनके ऊपर नहीं डाला गया।

4 सितंबर 2026 को 03:33 am बजे
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के अधूरे प्रोजेक्ट में बिल्डर की देरी का बोझ खरीदारों से हटाया

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट का घर खरीदारों के हक में बड़ा फैसला, बिल्डर की देरी का बोझ नए खरीदारों पर नहीं डाला जा सकता। नोएडा के दो अधूरे हाईराइज प्रोजेक्ट में टाइम एक्सटेंशन चार्ज को CIRP लागत मानने का NCLAT आदेश रद्द, घर खरीदारों और नए SRA को बड़ी राहत।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के दो अधूरे हाईराइज आवासीय प्रोजेक्ट के मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि बिल्डर की गलती का खामियाजा घर खरीदारों और नए सफल रिजॉल्यूशन आवेदक (SRA) को नहीं भुगतना पड़ेगा। कोर्ट ने नोएडा द्वारा लगाए गए टाइम एक्सटेंशन चार्ज को दिवाला समाधान प्रक्रिया ( CIRP ) की लागत मानने संबंधी नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल ( NCLAT ) के निर्देश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मूल डेवलपर की परियोजना में देरी के लिए घर खरीदारों पर जुर्माने का बोझ नहीं डाला जा सकता।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने घर खरीदारों की अपील मंजूर करते हुए कहा कि वे खुद परियोजना को पूरा करने के लिए अपनी सामूहिक राशि लगा रहे हैं। ऐसे में उन्हें उस डेवलपर के पुराने डिफॉल्ट के लिए दंडित नहीं किया जा सकता, जो अब परियोजना से बाहर हो चुका है। मामला नोएडा के सेक्टर-100 और 110 में स्थित आवासीय परियोजनाओं का है। इन परियोजनाओं को ग्रेनाइट गेट प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया था।

क्या है मामला?

कंपनी ने नोएडा से दो भूखंडों को दीर्घकालीन लीज पर लेकर वहां हाईराइज अपार्टमेंट बनाने की योजना शुरू की थी। परियोजना को वर्ष 2016 तक पूरा किया जाना था, लेकिन डेवलपर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण काम समय पर पूरा नहीं हो सका। बाद में कंपनी के खिलाफ कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस (CIRP) शुरू हुई। इसमें घर खरीदारों को वित्तीय लेनदारों के एक वर्ग के रूप में शामिल किया गया और उनकी समिति (CoC) गठित हुई। एमएसएमवी एजेंसिज प्राइवेट लिमिटेड को सफल रिजॉल्यूशन आवेदक (SRA) के रूप में चुना गया। खास बात यह रही कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए घर खरीदारों ने स्वयं अपनी राशि जमा कर ‘पूल एंड बिल्ड’ व्यवस्था के तहत निर्माण कार्य जारी रखा।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी 2007 से नवभारत टाइम्स से जुड़े हुए हैं। वह दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, निचली अदालत और सीबीआई से जुड़े विषयों को कवर करते हैं और स्पीड न्यूज में भी आपको इस बारे में खबर देते रहेंगे। यदि आपके पास कोर्ट से जुड़े मामलों की कोई सूचना है तो आप उनसे इस ईमेल अड्रेस - journalistrajesh@gmail.com - पर संपर्क कर सकते हैं।... और पढ़ें

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