BCI Chairman मनन मिश्रा को हटाना आसान नहीं ! BCI अध्यक्ष को कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने के बारे में कानून क्या कहता है
ऐसे में सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि उनके खिलाफ राजनीतिक या पेशेवर असहमति कितनी है, बल्कि यह है कि भारत के कानून में BCI अध्यक्ष को बीच कार्यकाल में हटाने का रास्ता क्या है? हमें इसका जवाब Advocates Act, 1961, BCI Rules औ…

सौजन्य से:- Navbharat Times
ऐसे में सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि उनके खिलाफ राजनीतिक या पेशेवर असहमति कितनी है, बल्कि यह है कि भारत के कानून में BCI अध्यक्ष को बीच कार्यकाल में हटाने का रास्ता क्या है? हमें इसका जवाब Advocates Act, 1961, BCI Rules और न्यायिक व्याख्याओं को साथ पढ़ने पर मिल सकता है।
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BCI Chairman की नियुक्ति सरकार नहीं, BCI करती है
यहां सबसे पहले पद की संवैधानिक या वैधानिक प्रकृति समझना जरूरी है। Advocates Act, 1961 की Section 4(2) के अनुसार Bar Council of India के अध्यक्ष, एडवोकेट काउंसिल के जरिए चुने जाते हैं, उस तरीके से जो निर्धारित किया गया है। यानी यह केंद्र सरकार द्वारा की जाने वाली सामान्य सरकारी नियुक्ति नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि केंद्र सरकार सामान्य प्रशासनिक आदेश से मनन मिश्रा को हटाने की स्थिति में नहीं है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है और उसके अध्यक्ष का पद Advocates Act तथा उसके तहत बने प्रावधानों से संचालित होता है। इसलिए हटाने का प्रश्न भी इन्हीं वैधानिक/नियमगत व्यवस्थाओं के भीतर देखा जाएगा।सिविल जज भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मार्च 2027 तक बिना 3 साल की प्रैक्टिस, दे सकेंगे ज्यूडिशियरी एग्जाम
BCI Rules में अध्यक्ष का कार्यकाल कितना है?
दरअसल BCI Rules के Rule 12(2) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष दो वर्ष के लिए पद पर रहेगा, या तब तक जब तक BCI के सदस्य के रूप में उसका कार्यकाल समाप्त नहीं हो जाता। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले में भी Rule 12(2) के इसी दो वर्षीय प्रावधान को दर्ज किया गया है। लेकिन यही प्रावधान वर्तमान विवाद की कानूनी जड़ है। शीर्ष अदालत में लगी याचिका में याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि Rule 12(2) दो साल का कार्यकाल निर्धारित करता है, तो किसी प्रशासनिक सूचना के जरिए अध्यक्ष का कार्यकाल पांच साल तक बढ़ाया नहीं जा सकता। इसी विवाद पर अंतिम फैसला अभी अदालत को करना है।क्या BCI छात्रों का बार काउंसिल में नामांकन रोक सकता है, इसकी क्या शक्तियां हैं ? मनन मिश्रा के बयान का Legal Factor समझिए
क्या BCI Chairman मनन मिश्रा को जबरदस्ती बीच कार्यकाल में हटाया जा सकता है?
- BCI Rules में अध्यक्ष के पद से हटाने के संबंध में महत्वपूर्ण व्यवस्था है। उपलब्ध नियमावली और न्यायिक व्याख्या के अनुसार अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाने का रास्ता मौजूद है।
- Delhi High Court के 1998 के फैसले में BCI/Bar Council के पदासीन अधिकारियों को हटाने के संदर्भ में कहा गया कि अध्यक्ष आदि को दो तिहाई बहुमत से पारित अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाया जा सकता है, साथ में निर्धारित न्यूनतम समर्थन की शर्त भी बताई गई थी।
- इसलिए वकीलों का विरोध और कानूनी रूप से पद से हटना दो अलग चीजें हैं। सैकड़ों या हजारों वकील इस्तीफे की मांग करें, इससे अपने आप अध्यक्ष का पद समाप्त नहीं होता। हटाने के लिए वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- मतलब बीसीआई अध्यक्ष को कार्यकाल रहते हटाया तो जा सकता है, लेकिन यह केंद्र सरकार की तर्ज पर बर्खास्तगी जैसा मामला नहीं है।
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2025 की गजट नोटिफिकेशन बनी विवाद का केंद्र
- वर्तमान विवाद का एक महत्वपूर्ण आधार अप्रैल 2025 की गजट नोटिफिकेशन है। रिपोर्टों के अनुसार इसमें मनन मिश्रा का अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक बताया गया है।
- तर्क यह है कि यदि BCI के नियम Chairman के लिए दो साल का कार्यकाल निर्धारित करते हैं, तो केवल एक गजट नोटिफिकेशन से उस वैधानिक फ्रेमवर्क को पांच साल के कार्यकाल में कैसे बदला जा सकता है?
- यहां कानूनी जटिलता यह भी है कि क्या 2025 की गजट नोटिफिकेशन केवल वर्तमान कार्यकाल को ही संदर्भित है? और क्या इसके लिए BCI कानूनों में बाद में कोई वैध संशोधन हुआ है? क्या Rule 12(2) का मौजूदा एंगल इस मामले में लागू है?
- और यदि BCI के नियम तथा गजट नोटिफिकेशन में विरोधाभास है, तो कौन सा प्रावधान कानूनन लागू होगा? इन्ही सवालों का अंतिम उत्तर सुप्रीम कोर्ट की न्यायायिक समीक्षा पर निर्भर करेगा।
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