होमसंविधानउत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला: पुराने कर्मचारियों को दिया गया अधिक ग्रेड पे भविष्य में नहीं मांग सकते नियुक्त कर्मचारी
संविधान

उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला: पुराने कर्मचारियों को दिया गया अधिक ग्रेड पे भविष्य में नहीं मांग सकते नियुक्त कर्मचारी

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि पुराने कर्मचारियों को अदालत के आदेश से दिया गया अधिक ग्रेड पे भविष्य में नए नियुक्त कर्मचारी मांग ही नहीं सकते। अदालत ने कहा कि सरकारी आदेश और भर्ती नियमों के आधार पर नए नियुक्त कर्मचारी समान कार्य के आधार पर ही ग्रेड पे की मांग कर सकते हैं।

25 जून 2026 को 10:24 am बजे
उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला: पुराने कर्मचारियों को दिया गया अधिक ग्रेड पे भविष्य में नहीं मांग सकते नियुक्त कर्मचारी

सौजन्य से:- Live Law Hindi

पुराने कर्मचारियों को अदालत के आदेश से मिला अधिक ग्रेड पे, नए नियुक्त कर्मचारी समान लाभ नहीं मांग सकते: उत्तराखंड हाईकोर्ट

Amir Ahmad

25 Jun 2026 3:27 PM IST

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विशेष कर्मचारी समूह को अदालत के आदेश के आधार पर दिया गया उच्च ग्रेड पे भविष्य में नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए स्वतः कोई कानूनी या अर्जित अधिकार पैदा नहीं करता। केवल समान कार्य करने के आधार पर बाद में नियुक्त कर्मचारी उस लाभ की मांग नहीं कर सकते।

जस्टिस मनोज कुमार तिवारी स्वास्थ्य कार्यकर्ता (महिला) पद पर नियुक्त कई कर्मचारियों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे। ये कर्मचारी वर्ष 2016, 2018, 2022 और 2024 की भर्ती प्रक्रियाओं के तहत नियुक्त हुए।

याचिकाकर्ताओं को 5,200 से 20,200 रुपये के वेतनमान के साथ 2,000 रुपये ग्रेड पे पर नियुक्त किया गया। उनका कहना था कि वर्ष 2013 से पहले नियुक्त स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को 2,800 रुपये ग्रेड पे मिल रहा है, जबकि उनकी शैक्षणिक योग्यता और कार्य समान हैं। इसी आधार पर उन्होंने 2 मई 2013 के सरकारी आदेश और 2016 के भर्ती नियमों की कुछ धाराओं को चुनौती दी।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि राज्य सरकार ने एक ही वर्ग के कर्मचारियों के भीतर बिना किसी उचित आधार के अलग उपवर्ग बना दिया, जो संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि कुछ कर्मचारियों को 2,800 रुपये ग्रेड पे इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले के अनुपालन में दिया गया। बाद में राज्य सरकार ने 2 मई 2013 को आदेश जारी कर स्पष्ट किया था कि यह लाभ केवल उस समय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों को व्यक्तिगत वेतन लाभ के रूप में मिलेगा। भविष्य में नियुक्त होने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मूल रूप से निर्धारित 2,000 रुपये ग्रेड पे ही दिया जाएगा।

अदालत ने कहा कि वेतनमान तय करना और उसमें संशोधन करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत और प्रशासनिक अधिकार है। ऐसे मामलों में अदालतों को सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा,

“संविधान का अनुच्छेद 14 समान लोगों के साथ असमान व्यवहार की अनुमति नहीं देता, लेकिन यह भी सुनिश्चित करता है कि असमान परिस्थितियों वाले लोगों के साथ समान व्यवहार नहीं किया जाए। 2 मई 2013 से पहले सेवा में मौजूद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर विशेष वेतन लाभ दिया गया। याचिकाकर्ता उस फैसले के दायरे में नहीं आते।”

अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति उस सरकारी आदेश और भर्ती नियमों के लागू होने के बाद हुई, जिनमें स्पष्ट रूप से 2,000 रुपये ग्रेड पे का प्रावधान था। भर्ती विज्ञापनों में भी वेतन और ग्रेड पे का उल्लेख किया गया, जिसके आधार पर उन्होंने नियुक्ति स्वीकार की।

इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता पुराने कर्मचारियों के बराबर ग्रेड पे का दावा नहीं कर सकते।

अदालत ने सरकारी आदेश और भर्ती नियमों को वैध ठहराते हुए सभी याचिकाएं खारिज की।

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
महाराष्ट्र विधानसभा में विवादित बयान पर हंगामा, NCP विधायक की सफाई
संविधान

महाराष्ट्र विधानसभा में विवादित बयान पर हंगामा, NCP विधायक की सफाई

विधायक सना मलिक के बयान पर गृह मंत्री योगेश कदम का जवाब, न कोई धर्मग्रंथ, न किसी समाज का ध्यान में रखते हुए कानून
संविधान

विधायक सना मलिक के बयान पर गृह मंत्री योगेश कदम का जवाब, न कोई धर्मग्रंथ, न किसी समाज का ध्यान में रखते हुए कानून

पाकिस्तान के कुरान के कानून से सीख लें, न कि तीन तलाक बिल
संविधान

पाकिस्तान के कुरान के कानून से सीख लें, न कि तीन तलाक बिल

वियतनाम में आपराधिक अभिलेख कानून के कार्यान्वयन के लिए तैयारी
संविधान

वियतनाम में आपराधिक अभिलेख कानून के कार्यान्वयन के लिए तैयारी

निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी फीस नहीं देनी पड़े, देश को डॉक्टरों की जरूरत है: सुप्रीम कोर्ट
संविधान

निजी मेडिकल कॉलेजों को सरकारी फीस नहीं देनी पड़े, देश को डॉक्टरों की जरूरत है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकन होम प्रोडक्ट्स कॉरपोरेशन बनाम मैक लेबोरेटरीज मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया
संविधान

सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकन होम प्रोडक्ट्स कॉरपोरेशन बनाम मैक लेबोरेटरीज मामले में महत्वपूर्ण फैसला दिया

जस्टिस कटजू का दृष्टिकोण: न्यायपालिका की सीमाएं और संविधान की व्याख्या
संविधान

जस्टिस कटजू का दृष्टिकोण: न्यायपालिका की सीमाएं और संविधान की व्याख्या

ट्रंप को बड़ा झटका: कोर्ट ने चुनावी आदेश पर लगाई रोक
संविधान

ट्रंप को बड़ा झटका: कोर्ट ने चुनावी आदेश पर लगाई रोक

ताज़ा ख़बरें