भारत में किसी पत्रकार पर हमला करने का कानून, जानें क्या है सजा
भारत में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए संविधान, सामान्य आपराधिक कानून और कुछ राज्यों के विशेष कानून लागू होते हैं। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।

सौजन्य से:- ABP News
Journalist Attack Laws India: किसी पत्रकार पर हमला करना कितना बड़ा अपराध, जानें पत्रकारों के लिए भारत में क्या कानून?
Journalist Attack Laws India : हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भी कुछ पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी के आरोप सामने आए.
Journalist Attack Laws India : देश में बड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार चर्चा में रही हैं. हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान भी कुछ पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और बदसलूकी के आरोप सामने आए. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी मीडिया की भूमिका और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई. कई पत्रकारों ने कहा कि किसी मीडिया संस्थान से नाराजगी हो सकती है, लेकिन मैदान में रिपोर्टिंग कर रहे रिपोर्टर को निशाना बनाना सही नहीं है. ऐसे मामलों के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि भारत में किसी पत्रकार पर हमला करना कितना बड़ा अपराध माना जाता है और पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कानून क्या व्यवस्था करता है.
भारत में किसी पत्रकार पर हमला करना कितना बड़ा अपराध माना जाता है?
भारत में किसी पत्रकार पर हमला करना गंभीर आपराधिक अपराध माना जाता है. यह प्रेस की स्वतंत्रता और लोगों के सूचना पाने के अधिकार पर भी हमला माना जाता है. हालांकि देश में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई अलग राष्ट्रीय कानून नहीं है, लेकिन ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्रवाई की जाती है. हमले की गंभीरता के अनुसार आरोपी पर मारपीट, गंभीर चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी, दंगा या गैरकानूनी जमावड़े जैसी धाराएं लग सकती हैं, जिनमें जुर्माने से लेकर कई साल की जेल और गंभीर मामलों में आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. वहीं, महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग कानून भी लागू है, जिसके तहत पत्रकारों या मीडिया संस्थानों पर हमला संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाता है और दोषी को तीन साल तक की जेल, 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है.
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए भारत में क्या हैं कानून?
भारत में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए संविधान, सामान्य आपराधिक कानून और कुछ राज्यों के विशेष कानून लागू होते हैं. संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति और प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी देता है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में साफ किया है कि प्रेस की स्वतंत्रता भी इसी अधिकार का हिस्सा है. अदालत ने यह भी माना है कि सरकार की नीतियों की आलोचना करना, समाचार प्रकाशित करना और लोगों तक जानकारी पहुंचाना प्रेस की स्वतंत्रता का जरूरी हिस्सा है. हालांकि, पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई अलग राष्ट्रीय कानून नहीं है. अगर किसी पत्रकार पर हमला, धमकी या हिंसा होती है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है.
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महाराष्ट्र में पत्रकारों के लिए अलग कानून
महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहां पत्रकारों की सुरक्षा के लिए अलग कानून बनाया गया है. इस कानून के तहत पत्रकारों और मीडिया संस्थानों पर हमला संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल, 50 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. अगर किसी पत्रकार ने झूठी शिकायत दर्ज कराई हो तो उसके खिलाफ भी समान कार्रवाई का प्रावधान है. साथ ही अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी को संपत्ति के नुकसान और इलाज का खर्च भी देना पड़ सकता है.
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