होमसंविधानहाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगाई गई रोक रद्द की, मनमानी पाबंदी को असंवैधानिक माना
संविधान

हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगाई गई रोक रद्द की, मनमानी पाबंदी को असंवैधानिक माना

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के 10 जून 2026 के निर्देश को रद्द कर दिया, जिसके तहत सितंबर 2026 तक सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक प्राधिकरणों के कर्मचारियों की विदेश यात्रा पूरी तरह वर्जित थी। अदालत ने बताया कि केवल सरकारी नौकरी के आधार पर पूरे वर्ग पर रोक लगाना मनमाना है और विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है।

31 अगस्त 2026 को 02:32 am बजे
हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर लगाई गई रोक रद्द की, मनमानी पाबंदी को असंवैधानिक माना

सौजन्य से:- ETV Bharat

हरियाणा में सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर रोक रद्द, हाई कोर्ट बोला- 'सरकारी नौकरी के आधार पर पूरी पाबंदी मनमानी'

पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर रोक लगाई गई थी.

Published : August 31, 2026 at 7:51 AM IST

चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत की खबर है. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत सितंबर 2026 तक सरकारी कर्मचारियों और बोर्ड, निगमों व सार्वजनिक प्राधिकरणों के कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी. हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी होने के आधार पर नागरिकों के एक पूरे वर्ग की विदेश यात्रा पर बैन लगाना मनमाना है.

नर्सिंग ऑफिसर के ऑस्ट्रेलिया जाने का मामला: जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार की अदालत ने 27 अगस्त को दिए फैसले में एक नर्सिंग ऑफिसर को प्रोफेशनल परीक्षा देने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति देने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए. कोर्ट ने साफ किया कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

सरकार ने जून में लगाया था विदेश यात्रा पर प्रतिबंध: हरियाणा सरकार के मानव संसाधन विभाग ने 10 जून 2026 को निर्देश जारी कर सरकारी कर्मचारियों की विदेश यात्रा पर सितंबर 2026 तक रोक लगाई थी. ये रोक आधिकारिक और निजी, दोनों तरह की विदेश यात्राओं पर लागू थी. निर्देशों में केवल चिकित्सा कारणों से आवश्यक विदेश यात्रा को अपवाद के तौर पर रखा गया था.

सरकार की ओर से दलील: सरकार की ओर से हाई कोर्ट में दलील दी गई कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ा है. खासकर ईंधन और अन्य जरूरी संसाधनों को लेकर पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए खर्च कम करने और संसाधनों की बचत के लिए यह फैसला लिया गया था. सरकार ने यह भी तर्क दिया कि प्रतिबंध अस्थायी है और व्यापक जनहित में मितव्ययिता के उपाय के तौर पर लगाया गया है.

ऑस्ट्रेलिया में परीक्षा देने जाना चाहती थी नर्सिंग ऑफिसर: मामला रोहतक स्थित PGIMS में तैनात एक नर्सिंग ऑफिसर से जुड़ा है. उन्होंने 23 फरवरी 2021 को नर्सिंग ऑफिसर के तौर पर नौकरी शुरू की थी. नर्सिंग ऑफिसर ने ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेशनल परीक्षा देने के लिए पहले जनवरी 2026 में वीजा आवेदन की मंजूरी ली. निर्धारित फीस जमा करने के बाद उन्हें 29 मई को वैध ऑस्ट्रेलियाई वीजा भी मिल गया.

सरकार ने लगाया था विदेश यात्रा पर बैन: याचिकाकर्ता ने अपने प्रोफेशनल अनुभव को बढ़ाने और उच्च योग्यता हासिल करने के उद्देश्य से Australian Health Practitioner Regulation Agency और National Boards की ओर से आयोजित Objective Structured Clinical Examination (OSCE) के लिए आवेदन किया था. इसके बाद उन्होंने 18 अगस्त को अर्जित अवकाश यानी earned leave के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने उनके आवेदन पर विचार नहीं किया. इसकी वजह 10 जून को जारी सरकार के विदेश यात्रा संबंधी निर्देश बताए गए.

हाई कोर्ट ने कहा, विदेश यात्रा अनुच्छेद 21 का हिस्सा: अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान विदेश यात्रा के अधिकार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला दिया. कोर्ट ने कहा कि आज की वैश्वीकृत दुनिया में विदेश यात्रा को महज प्रशासनिक विशेषाधिकार मानकर सीमित नहीं किया जा सकता. अदालत के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में स्पष्ट कर चुका है कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार के पास अपने कर्मचारियों की विदेश यात्रा को नियंत्रित करने की शक्ति मानी भी जाए, तब भी ऐसी पाबंदी को संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 की कसौटी पर खरा उतरना होगा. यानी प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया निष्पक्ष, उचित, गैर-मनमानी और उद्देश्य के अनुपात में होनी चाहिए.

'सरकारी कर्मचारी हैं, इसलिए पूरी तरह नहीं रोक सकते': हाई कोर्ट ने सरकार के आदेश की सबसे महत्वपूर्ण खामी इसी बिंदु पर बताई. अदालत ने कहा कि विवादित निर्देश सभी सरकारी कर्मचारियों पर बिना किसी भेदभाव के लागू किए गए. इनमें कर्मचारी की व्यक्तिगत परिस्थितियों, उसके पद, कर्तव्यों की प्रकृति, यात्रा के उद्देश्य, गंतव्य या विदेश में रहने की अवधि को ध्यान में रखने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी गई थी. कोर्ट ने कहा कि नागरिकों के एक पूरे वर्ग पर सिर्फ इसलिए पूरी तरह रोक लगाना कि वे सरकारी सेवा में हैं, स्पष्ट रूप से मनमाना है.

ईंधन बचाने और निजी विदेश यात्रा रोकने में क्या संबंध? अदालत ने सरकार की उस दलील पर भी सवाल उठाया कि वैश्विक संकट और ईंधन की बचत के लिए विदेश यात्रा पर रोक जरूरी थी. कोर्ट के अनुसार सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि किसी कर्मचारी की निजी विदेश यात्रा पर पूरी तरह रोक लगाने का ईंधन और अन्य संसाधनों को बचाने के बड़े उद्देश्य से क्या तार्किक संबंध है. अदालत ने माना कि सरकार द्वारा बताए गए उद्देश्य और कर्मचारियों की निजी विदेश यात्रा पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी के बीच पर्याप्त तार्किक संबंध नजर नहीं आता.

'छोटी सी बात के लिए बहुत कड़ा कदम': हाई कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस मामले में सरकार की ओर से उठाया गया कदम उसके बताए गए उद्देश्य की तुलना में जरूरत से ज्यादा कठोर है. अदालत के मुताबिक किसी उद्देश्य को हासिल करने के लिए लगाया गया प्रतिबंध इतना व्यापक नहीं हो सकता कि वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों को ही प्रभावित करने लगे. कोर्ट ने कहा कि छोटी सी बात के लिए बहुत कड़ा कदम उठाया गया है, जिसे संवैधानिक कानून में मंजूर नहीं किया जा सकता.

'प्रोफेशनल परीक्षा के लिए विदेश जाने से रोकना भी उचित नहीं': कोर्ट ने नर्सिंग ऑफिसर के मामले को अलग दृष्टिकोण से भी देखा. अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता किसी निजी मौज-मस्ती की यात्रा के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रोफेशनल परीक्षा देने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना चाहती थी. ऐसे में उसे विदेश जाने से रोकना उसके विदेश यात्रा के अधिकार को प्रभावित करने के साथ-साथ उसकी उच्च शिक्षा और पेशेवर योग्यता हासिल करने की कोशिश में भी बाधा डालता है. अदालत ने सवाल उठाया कि एक नर्सिंग ऑफिसर को अपनी स्किल बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोकने से ईंधन बचाने के सरकार के उद्देश्य में आखिर कैसे मदद मिलेगी. इस संबंध में सरकार की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं दिया गया.

हाई कोर्ट का फैसला क्यों अहम? यह फैसला हरियाणा सरकार के उस आदेश पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के लिए विदेश यात्रा पर एक समान और पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था. कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि सरकार अपने कर्मचारियों की विदेश यात्रा को नियमों के तहत नियंत्रित कर सकती है, लेकिन ऐसा करते समय मौलिक अधिकारों, व्यक्तिगत परिस्थितियों और प्रतिबंध की जरूरत व अनुपात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस मामले में हाई कोर्ट ने सरकार के पूर्ण प्रतिबंध को असंगत मानते हुए उसे रद्द कर दिया और संबंधित अधिकारियों को नर्सिंग ऑफिसर को ऑस्ट्रेलिया में प्रोफेशनल परीक्षा के लिए जाने की मंजूरी देने के निर्देश दिए.

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शरिया अदालतों को तलाक का कानूनी अधिकार न होने की पुष्टि की
संविधान

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शरिया अदालतों को तलाक का कानूनी अधिकार न होने की पुष्टि की

विद्युत अधिनियम के संशोधन मसौदे पर प्रतिक्रिया आमंत्रित, अक्टूबर में संसद में पेश होगा
संविधान

विद्युत अधिनियम के संशोधन मसौदे पर प्रतिक्रिया आमंत्रित, अक्टूबर में संसद में पेश होगा

हो ची मिन्ह सिटी शहरी विकास कानून से डिजिटल प्रेस को नया रूप देने की दिशा में कदम
संविधान

हो ची मिन्ह सिटी शहरी विकास कानून से डिजिटल प्रेस को नया रूप देने की दिशा में कदम

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाँच प्रमुख विधायी मसौदों की अंतिम समीक्षा हेतु बैठक का संचालन किया
संविधान

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाँच प्रमुख विधायी मसौदों की अंतिम समीक्षा हेतु बैठक का संचालन किया

डिजिटल मंच पर कानून प्रतियोगिता: 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर 5 लाख से अधिक प्रतिभागी
संविधान

डिजिटल मंच पर कानून प्रतियोगिता: 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर 5 लाख से अधिक प्रतिभागी

सहारनपुर कलेक्टरैट में अवैध घोषित मस्जिद का कानूनी ध्वंस, विपक्ष पर घर में हिरासत का आरोप
संविधान

सहारनपुर कलेक्टरैट में अवैध घोषित मस्जिद का कानूनी ध्वंस, विपक्ष पर घर में हिरासत का आरोप

आठ हाई कोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीश नियुक्त, जानें कौन संभालेंगे किस अदालत की जिम्मेदारी
संविधान

आठ हाई कोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीश नियुक्त, जानें कौन संभालेंगे किस अदालत की जिम्मेदारी

मस्जिद गिराने के बाद मौलाना मदनी ने उठाया समानता का सवाल
संविधान

मस्जिद गिराने के बाद मौलाना मदनी ने उठाया समानता का सवाल

ताज़ा ख़बरें