NDPS एक्ट को प्रभावी बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी पर चिंता जताते हुए NDPS एक्ट को प्रभावी बनाने की मांग पर केंद्र-राज्यों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने चार सप्ताह में जवाब मांगा है और 28 सितंबर को फिर सुनवाई करेगा।

सौजन्य से:- Jagran
मादक पदार्थों की तस्करी सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, NDPS एक्ट को प्रभावी बनाने की मांग पर केंद्र-राज्यों को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने देश में मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने NDPS एक्ट को प्रभावी बनाने की याचिका पर केंद्र और सभ ...और पढ़ें
HighLights
- सुप्रीम कोर्ट ने मादक पदार्थों की तस्करी पर चिंता जताई।
- NDPS एक्ट प्रभावी बनाने पर केंद्र-राज्यों को नोटिस।
- याचिका में विशेष अदालतें और संपत्ति जांच की मांग।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में मादक पदार्थों की तस्करी और दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि ये एक बेहद चिंताजनक स्थिति है। आखिरकार ये कानून और व्यवस्था तंत्र की जिम्मेदारी है। और ये पूरे देश में फैल रही है। कोर्ट ने ये टिप्पणियां एनडीपीएस एक्ट को प्रभावी बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना की पीठ ने वकील अश्वनी उपाध्याय की ओर से दाखिल इस याचिका पर केंद्र और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। मामले में कोर्ट 28 सितंबर को फिर सुनवाई करेगा। इससे पहले याचिका पर स्वयं बहस करते हुए अश्वनी उपाध्याय ने कहा कि ये बहुत गंभीर मामला है।
ऐसी ही एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है कोर्ट इस याचिका पर भी नोटिस जारी कर उसी के साथ संलग्न कर दे। तभी पीठ की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस ने मामले पर चिंता जताते हुए कहा कि ये बेहद चिंताजनक है। उपाध्याय ने कहा कि वे रोजाना हिन्द- अंग्रेजी के अखबार पढ़ते हैं दोनों में एक बात समान रूप से होती है कि नशाखोर ने अपने माता-पिता या पिता की हत्या कर दी।
उपाध्याय ने कहा कि हर साल इससे 20 लाख लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं और दो लाख लोगों की अकाल मौत हो जाती है। इस पर पीठ ने न्यायाधीश जोयमाल्या बाग्ची ने कहा कि ये सभी बातें बहुत प्रासांगिक हैं। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमा को देखते हुए आप गोल्डन क्रीसेंट पर नजर डालें या बर्मा या अफगानिस्तान की स्थिति देखें।
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उपाध्याय ने याचिका में कहा है कि अभी छह राज्यों असम, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार और पुड्डूचेरी में सर्वे हुआ है हर पांचवां बच्चा नशे की चपेट में पाया गया है। इसलिए ये बहुत गंभीर मुद्दा है। याचिका में मांग की गई है कि मादक पदार्थ की सर्च, सीजर, एंड सैंपलिंग का एक एसओपी बनाया जाए और एफएसएल रिपोर्ट जो लैब से आती है उसकी टाइमलाइन तय की जाए।
प्रत्येक जिले में स्पेशल कोर्ट बनाई जाए। जांच और ट्रायल की समय सीमा निर्धारित की जाए। यह भी मांग है कि जो लोग तस्करी में पकड़े जाते हैं उनकी और उनके परिवार की संपत्ति की पीएमएलए, बेनामी संपत्ति और ब्लैकमनी एक्ट के तहत जांच की जाए। यह भी कहा गया है कि एनडीपीएस कानून में दोषी ठहराए जाने पर प्रत्येक धारा की सजा अलग अलग चलनी चाहिए न कि एक साथ।
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