ड्रग तस्करी पर सख्ती की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्य सरकारों से मांगा जवाब
ड्रग तस्करी के मामलों में सुप्रीम कोर्ट गंभीर है और उसने केंद्र-राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। अदालत ने एन. डी. पी. एस. एक्ट में बदलाव की मांग पर सुनवाई की और ड्रग तस्करों के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए निर्देश देने की मांग की है।

सौजन्य से:- नवभारत टाइम्स
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एन. डी. पी. एस. अधिनियम में बदलाव की मांग क्यों उठी?
- याचिका का मूल आधार देश में सक्रिय ड्रग माफिया और संगठित तस्करी नेटवर्क को अधिक प्रभावी ढंग से रोकना है। सरकार की आधिकारिक नारकोटिक्स नीति भी ड्रग सप्लाई को रोकने के साथ डिमांड रिडक्शन, उपचार और पुनर्वास पर जोर देती है।
- एन. डी. पी. एस. अधिनियम, 1985 का भी उद्देश्य मादक और मनःप्रभावी पदार्थों से जुड़े अपराधों पर कठोर नियंत्रण और कार्रवाई सुनिश्चित करना है। कानून अवैध ड्रग ट्रैफिकिंग से अर्जित या उसमें इस्तेमाल संपत्ति के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
- याचिका में मौजूदा व्यवस्था में जांच और अभियोजन के स्तर पर एकरूपता लाने की जरूरत बताई गई है। इसमें केंद्र और राज्यों के बीच समान जांच मानक विकसित करने की मांग की गई है।
- प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य तस्करों और संगठित नेटवर्क पर कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाना है।
एफएसएल रिपोर्ट के लिए अनिवार्य समय सीमा की मांग
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने भी एन. डी. पी. एस. मामलों में फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना है। इस याचिका में भी एन. डी. पी. एस. मामलों में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला यानी एफएसएल रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अनिवार्य समयसीमा तय करने की मांग की गई है। वैज्ञानिक जांच में देरी का सीधा असर जांच और ट्रायल की गति पर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यदि बरामद पदार्थ ड्रग नहीं है, तो समय पर रिपोर्ट आरोपी को अनावश्यक अभियोजन से बचाने में भी मदद कर सकती है।अमेरिका में क्या है विदेशी फंडिंग का कानून? भारत में मोदी सरकार के एफ. सी. आर. ए. बिल से तिलमिला गया है ट्रंप का देश !
तलाशी, जब्ती और सैंपलिंग के लिए समान एस. ओ. पी. है जरूरी
वैसे भी एन. डी. पी. एस. अधिनियम के तहत सर्च और सीजर की प्रक्रिया में कानूनी अनुपालन अत्यंत महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी धारा 42, 50 और अन्य प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों की व्याख्या लगातार सामने आती रही है। याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को तलाशी, जब्ती और सैंपलिंग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एस. ओ. पी. तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई है। खास तौर पर छोटी और इंटरमीडिएट मात्रा वाले एन. डी. पी. एस. मामलों के लिए समान प्रक्रिया की बात कही गई है।देश की आंतरिक सुरक्षा-संप्रभुता के लिए क्यों जरूरी है एफ. सी. आर. ए. ? विदेशी फंडिंग पर भारत के कानूनी सुरक्षा कवच के बारे जानिए
विशेष अदालतें और त्वरित परीक्षण पर जोर
गौरतलब है कि एन. डी. पी. एस. कानून पहले से ही विशेष न्यायालयों की व्यवस्था करता है। हालांकि लंबित मामलों और लंबे ट्रायल की समस्या के कारण विशेष अदालतों की क्षमता और कार्यप्रणाली महत्वपूर्ण हो जाती है। याचिका में एन. डी. पी. एस. अधिनियम की धारा 36 और 36ए. के तहत विशेष अदालतें को प्रभावी रूप से गठित करने की मांग भी शामिल है। जिसका उद्देश्य एन. डी. पी. एस. मामलों की जांच और सुनवाई को समयबद्ध बनाना है।फास्ट ट्रैक कोर्ट क्या होता है ? जानिए किन मामलों की होती है तेज अदालती सुनवाई
ड्रग तस्करों की संपत्ति जब्ती करने का प्रस्ताव
याचिका में ड्रग तस्करों और संगठित ड्रग नेटवर्क से जुड़ी संपत्तियों की जब्ती पर भी जोर दिया गया है। हालांकि एन. डी. पी. एस. अधिनियम में पहले से ही अवैध ड्रग ट्रैफिकिंग से जुड़ी संपत्ति के ज़ब्त करना का प्रावधान मौजूद है। 1989 के संशोधन के बाद एन. डी. पी. एस. कानून में ऐसे तरीके से अर्जित या उसमें इस्तेमाल संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का ढांचा मजबूत किया गया था। याचिका का प्रस्ताव इस वित्तीय पहलू को और प्रभावी बनाने की दिशा में है।सुप्रीम कोर्ट का अवलोकन और चिंता
- इस याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहन की बेंच ने की। शुरुआत में ही जिस तरह से बेंच ने कहा कि ड्रग की समस्या 'बहुत गंभीर' है, उसने शीर्ष अदालत की चिंता जाहिर की।
- फिर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से उस याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी। इसमें अवैध नशीले पदार्थों (नारकोटिक्स के मामलों) की समय पर जांच और ट्रायल, तस्करों की संपत्ति जब्त करना और एक जैसा जांच प्रोटोकॉल बनाना शामिल है। ताकि पूरे देश में एक जैसी प्रक्रिया बने।
- अदालत ने कहा कि कुछ राज्य खुशकिस्मत हो सकते हैं, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि जिस तरह से यह फैल रहा है, उसे देखते हुए ड्रग की समस्या का समाधान खोजने के लिए या फिर हमेशा के लिए खत्म करने के लिए देश की एक्सपर्ट एजेंसियों को मिलकर एक साथ एक लक्ष्य के साथ काम करने की जरूरत है।
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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