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मणिपुर हिंसा के मामले: सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से कहा विशेष अदालतें बनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने की संभावना पर विचार करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में गवाहों की जांच अभी बाकी है तो विशेष अदालतों के गठन से मुकदमों की सुनवाई में तेजी आ सकती है।

10 अगस्त 2026 को 03:56 pm बजे
मणिपुर हिंसा के मामले: सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट से कहा विशेष अदालतें बनाएं

सौजन्य से:- Navbharat Times

सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मणिपुर हिंसा के सीबीआई और एनआईए मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने पर विचार करने को कहा है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मणिपुर हिंसा से जुड़े उन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने की संभावना पर विचार करने को कहा, जिनकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही हैं। कोर्ट ने कहा कि बड़ी संख्या में गवाहों की जांच अभी बाकी है, ऐसे में विशेष अदालतों के गठन से मुकदमों की सुनवाई में तेजी आ सकती है

किन याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था कोर्ट

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच मणिपुर हिंसा के दौरान हुई यौन हिंसा से जुड़े मामलों की जांच और ट्रायल से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन मामलों की सुनवाई मणिपुर से असम ट्रांसफर कर चुका है, जो गुवाहाटी हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

891 गवाहों की गवाही अभी बाकी

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट पर गौर करते हुए कहा कि CBI के मामलों में बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही अभी दर्ज नहीं हुई है। CBI की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न मामलों में कुल 904 गवाहों को पेश किया जाना है, लेकिन इनमें से 891 गवाहों की जांच अभी बाकी है। कोर्ट ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गवाहों को देखते हुए मामलों के लिए विशेष अदालत बनाना ट्रायल को जल्द पूरा कराने में मददगार हो सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया सुझाव

बेंच ने कहा कि गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस इस संभावना पर विचार कर सकते हैं कि CBI/NIA की अदालत को विशेष रूप से मणिपुर से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित किया जाए और उसके सामने लंबित अन्य मामलों को किसी दूसरी अदालत में भेज दिया जाए। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि CBI और NIA के मामलों के लिए दो अलग-अलग विशेष अदालतें गठित करने पर भी विचार किया जा सकता है।

CBI 31 मामलों की कर रही जांच

केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि मणिपुर हिंसा से जुड़े 31 मामलों की जांच CBI कर रही है। इनमें 27 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल हो चुकी है, जिनमें पांच क्लोजर रिपोर्ट शामिल हैं। बाकी 22 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इनमें 20 मामलों में अदालत संज्ञान ले चुकी है, जबकि दो मामलों में संज्ञान लिया जाना बाकी है। उन्होंने बताया कि एक मामला मजिस्ट्रेट कोर्ट और बाकी मामले सेशंस कोर्ट में चलने योग्य हैं। कई मामलों में आगे की जांच भी जारी है और कुछ मामले ट्रायल के लिए तैयार हैं।

NIA के 30 मामलों में 15 में चार्जशीट

कोर्ट को बताया गया कि मणिपुर हिंसा से जुड़े 30 मामले NIA को सौंपे गए हैं। इनमें 15 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि बाकी 15 मामलों में जांच जारी है। चार्जशीट दाखिल किए गए मामलों में से सात में आरोप तय किए जा चुके हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि जिन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उनके सेशंस केस नंबरों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। कोर्ट ने राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को इन केस नंबरों और अन्य संबंधित विवरण जुटाकर रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

लेखक के बारे मेंराजेश चौधरीराजेश चौधरी, नवभारत टाइम्स में लीगल एडिटर हैं। वह 22 साल से भी ज्यादा वर्षों से लीगल रिपोर्टिंग कर रहे हैं। शुरुआत में वह दिल्ली की निचली अदालत और सीबीआई कवर करते थे और बाद में वह दिल्ली हाई कोर्ट और फिर लगातार डेढ़ दशक से सुप्रीम कोर्ट कवर कर रहे हैं। इस दौरान राजेश ने देश के तमाम हाई प्रोफाइल केस नीतीश कटारा मर्डर केस, जेसिक लाल केस, बोफोर्स केस, उपहार केस, पार्लियामेंट अटैक केस, प्रिय दर्शनी मट्टू केस से लेकर तमाम संवैधानिक मसले कवर किए जिनमें अनुच्छेद-370, तीन तलाक, निजता का अधिकार, होमो सेक्सुअलिटी को अपराध से बाहर करने का मामला और राम मंदिर मसले अहम है। राजेश ने इस 22 साल के करियर के दौरान दो साल 2006 से लेकर 2007 के सितंबर तक सहारा समय टीवी चैनल में भी बतौर लीगल संवावददाता काम किया। इसके बाद दोबारा वह नवभारत टाइम्स आए और उसके बाद लगातार कानूनी अफेयर्स को कवर करते रहे। नेशनल ब्यूरो में रहते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और कानून मंत्रालय को कवर करने के साथ साथ कानून के विषय पर लगातार एडिट पेज पर लिख रहे हैं। साथ ही लगातार ऑनलाइन माध्यम के लिए भी सक्रिय रिपोर्टिंग करते रहे हैं और ..कोर्ट रूम..नाम के एक साप्ताहिक विडियो इंटरव्यू भी लगातार देते हैं जिनमें सप्ताह भर के मुख्य कानूनी मसले पर उनका साक्षात्कार प्रसारित होता है। इसके अलावा वह लगातार लीगल मसले पर लीगल फोरम नामक कॉलम भी लिखते रहे हैं। उन्होंने दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री में एमएससी किया है। साथ ही उन्होंने जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा किया और एलएलबी भी कर रखा है।... और पढ़ें

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