मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पर बड़ा आरोप, कांग्रेस ने मांगी सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने का आरोप लगाया है और सुप्रीम कोर्ट के जज से जांच की मांग की है। आरोप है कि मुख्यमंत्री के परिवार ने उज्जैन में विकास योजनाओं की अग्रिम जानकारी का लाभ उठाकर जमीन खरीदी।

सौजन्य से:- Navbharat Times
कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार पर उज्जैन में विकास योजनाओं की अग्रिम जानकारी का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने ('इनसाइडर ट्रेडिंग') का गंभीर आरोप लगाया है।
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने के मामले में कांग्रेस ने बुधवार को गंभीर आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा जस्टिस की निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की। पार्टी ने बीजेपी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे उसकी मिलीभगत का संकेत बताया।
नई दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के परिवार ने उज्जैन सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है।
‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ जैसा मामला: पवन खेड़ा
पवन खेड़ा ने कहा कि जिस प्रकार शेयर बाजार में इनसाइडर ट्रेडिंग होती है, उसी तरह मुख्यमंत्री के परिवार को पहले से विकास परियोजनाओं की जानकारी थी और उसी आधार पर जमीनें खरीदी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने पद, प्रभाव और आगामी परियोजनाओं की जानकारी का दुरुपयोग किया।
कांग्रेस नेता ने लगाए आरोप
खेड़ा ने बीजेपी पर धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उज्जैन जैसी धार्मिक नगरी में जमीन खरीद का मामला सामने आया है, जबकि अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोप भी पहले लग चुके हैं।
बीजेपी की चुप्पी पर उठाए सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि यदि आरोप गलत हैं तो भाजपा और मुख्यमंत्री को खुलकर जवाब देना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने आरोप लगने पर कार्रवाई की थी, जबकि भाजपा अपने नेताओं को बचाने में जुटी रहती है।
30 घंटे बाद भी जवाब नहीं: जीतू पटवारी
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जमीन खरीद से जुड़ी खबर प्रकाशित हुए 30 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन न तो सरकार ने स्पष्टीकरण दिया और न ही अखबार के खिलाफ कोई मानहानि का मुकदमा दायर किया। उन्होंने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष द्वारा मामले को ओबीसी समुदाय से जोड़ने पर तंज कसते हुए कहा, क्या ओबीसी होना गलत काम करने का लाइसेंस है?
मुख्यमंत्री से पूछे कई सवाल
पटवारी ने मुख्यमंत्री से सीधे जवाब देने की मांग करते हुए पूछा कि क्या उनके परिवार ने संबंधित जमीन खरीदी है या नहीं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि विकास परियोजनाओं और कॉरिडोर से जुड़ी नीतियों में कोई बदलाव किया गया था या नहीं तथा इन परियोजनाओं की समय-सीमा सार्वजनिक की जाए। कांग्रेस नेता ने मांग की कि बीजेपी न्यायिक जांच कराए और मुख्यमंत्री 2023 के बाद से अपने परिवार के स्वामित्व वाली सभी जमीनों का श्वेत पत्र जारी करें।
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने किया दावा
पटवारी ने दावा किया कि उज्जैन भूमि खरीद प्रकरण केवल शुरुआत है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में दो अन्य मामले भी सामने आए हैं। एक कथित ट्रांसफर इंडस्ट्री से जुड़ा है, जिसकी राशि लगभग 1,000 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि दूसरा मामला 500 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन को एक ट्रस्ट को मात्र एक रुपये में सौंपने से संबंधित है। उन्होंने कहा कि उस ट्रस्ट के सदस्यों में मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार भी शामिल हैं।
लेखक के बारे मेंहेमंत राजौराहेमंत राजौरा नवभारत टाइम्स में स्पेशल करेस्पॉन्डेंट हैं। वह कांग्रेस, सपा, आरजेडी सहित प्रमुख विपक्षी दलों की राजनीति को गहराई से कवर करते हैं। साथ ही, स्वास्थ्य, विज्ञान और नीति से जुड़ी अहम खबरों पर भी उनकी पैनी नजर रहती है। ग्राउंड रिपोर्टिंग, विश्लेषण की स्पष्टता और विश्वसनीय सूत्रों तक मजबूत पहुंच उनकी पत्रकारिता की पहचान है।... और पढ़ें
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