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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सजा समीक्षा बोर्ड ने रोक का आदेश

ओडिशा के सजा समीक्षा बोर्ड ने 67 वर्षीय दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया, जिससे ग्रेहम स्टेंस व उनके दो पुत्रों की 1999 की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा बनी रहेगी। बोर्ड ने सामाजिक व सांप्रदायिक शांति को लेकर संभावित जोखिम को प्रमुख कारण बताया और सुप्रीम कोर्ट के आगामी सुनवाई से पहले इस निर्णय को अंतिम कर दिया।

15 सितंबर 2026 को 02:05 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले दारा सिंह की रिहाई याचिका पर सजा समीक्षा बोर्ड ने रोक का आदेश

सौजन्य से:- The Wire - Hindi

नई दिल्ली: ओडिशा सरकार के सजा समीक्षा बोर्ड ने 67 वर्षीय दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज कर दी है. सिंह ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस और उनके नाबालिग दो बेटों को 1999 में सोते समय जिंदा जलाकर मार डालने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है.

इसके साथ ही 17 सितंबर को इस मामले में होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले उसकी सजा में छूट को लेकर कई महीनों से बनी अनिश्चितता खत्म हो गई है.

इससे पहले ओडिशा राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने दारा सिंह को ‘अच्छे आचरण’ के आधार पर जेल से रिहा करने की सिफारिश की थी.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह सिंह की रिहाई की याचिका पर स्पष्ट रुख बताए.

सिंह को जेल में रहते हुए 26 साल छह महीने से अधिक हो चुके हैं. ओडिशा की 2022 की सजा में छूट संबंधी गाइडलाइन के तहत वह समयपूर्व रिहाई पर विचार किए जाने के योग्य हो गया था. सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए ओडिशा सरकार को इन दिशानिर्देशों के तहत उसकी समयपूर्व रिहाई पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी.

राज्य सजा समीक्षा बोर्ड ने 31 अगस्त को हुई अपनी विशेष बैठक में इस मामले पर विचार किया. बोर्ड ने कहा कि सिंह की रिहाई से समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है और इससे संभावित रूप से सांप्रदायिक तनाव या अशांति पैदा हो सकती है.

मार्च 2025 में उस क्योंझर जिला प्रशासन, जहां सिंह जेल में बंद है, ने कुछ ऐसी शर्तें लगाए जाने की सिफारिश के साथ उसकी समयपूर्व रिहाई का समर्थन किया था, जिनसे सामाजिक सौहार्द बना रहे.

अखबार के अनुसार, हालांकि, अपनी ताजा रिपोर्ट में प्रशासन ने बताया कि 15 अगस्त को दारा सेना से जुड़े करीब 200 से 250 लोगों ने क्योंझर जिला जेल के बाहर भड़काऊ नारे लगाए थे.

बोर्ड ने ज़िला प्रशासन की ताज़ा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें कोई ठोस सिफ़ारिश नहीं है और इसे अनिर्णायक बताया, साथ ही सिंह की समय से पहले रिहाई के ख़िलाफ़ सिफ़ारिश की.

बोर्ड ने इससे पहले सांप्रदायिक सद्भाव को लेकर चिंताओं समेत कई आधारों का हवाला देते हुए 2016, 2019, 2020, 2022 और 2023 में सिंह की समय से पहले रिहाई की अर्ज़ी ठुकरा दी थी.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी थी कि अगर बोर्ड अपने फैसले में लगातार देरी करता रहा तो राज्य के अधिकारियों को अदालत में बुलाया जा सकता है.

19 अगस्त को अदालत ने बोर्ड को 2 सितंबर तक फैसला लेने और उसके परिणाम की जानकारी देने का निर्देश दिया था. अदालत ने कहा था, ‘अगर आप इसे खारिज करना चाहते हैं, तो कर दीजिए. फैसला लीजिए. हम इससे निपट लेंगे. आप इसे इस तरह लंबित नहीं रख सकते.’

ग्राहम स्टेंस हत्याकांड में सजा

ज्ञात हो कि वर्ष 1999 में दारा सिंह ने एक भीड़ का नेतृत्व करते हुए उस वैगन (गाड़ी) में आग लगा दी थी, जिसमें ग्राहम स्टेंस और उनके दो बेटे सो रहे थे. इस घटना में कुष्ठ रोगियों के लिए एक आश्रय गृह चलाने वाले ग्राहम स्टेंस और उनके दोनों बेटों की मौत हो गई थी. साल 2003 में खुर्दा की ट्रायल कोर्ट ने दारा सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि 12 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास दिया गया था.

2005 में उड़ीसा हाईकोर्ट ने मामले के 11 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया और सिंह की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि के खिलाफ सिंह की अपील खारिज कर दी थी.

सिंह को मयूरभंज में कैथोलिक पादरी फादर अरुल दोस और व्यापारी एसके रहमान की हत्या के मामलों में भी दोषी ठहराया गया था. 2007 में दोनों मामलों में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई. हाईकोर्ट ने इन मामलों में उसकी अपीलें भी खारिज कर दी थीं.

स्टेंस हत्याकांड के दोषियों में से एक महेंद्र हेम्ब्रम को अप्रैल 2025 में समयपूर्व रिहा कर दिया गया था.

2022 में ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी ने दारा सिंह की रिहाई की मांग का समर्थन किया था

गौरतलब है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वर्ष 2022 में सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके द्वारा दारा सिंह की रिहाई की उठाई गई मांग का समर्थन किया था. उस समय माझी भाजपा के विधायक थे.

इस्लाम के प्रति अपने कट्टर विरोधी रुख के लिए जाने जाने वाले सुरेश चव्हाणके लंबे समय से दारा सिंह की रिहाई के लिए अभियान चला रहे हैं. सितंबर 2022 में चव्हाणके को क्योंझर जेल में दारा सिंह से मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी. इसके बाद चव्हाणके और उनके साथ गए भाजपा नेताओं, जिनमें मोहन चरण माझी भी शामिल थे, ने जेल अधिकारियों पर दबाव बनाने के लिए धरना दिया था.

जब क्योंझर जेल प्रशासन ने कहा कि दारा सिंह को साल 2022 में केवल उसके परिवार के सदस्य और वकीलों से ही मिलने की अनुमति दी जाएगी, तब चव्हाणके, माझी और अन्य भाजपा नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया था.

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