सुप्रीम कोर्ट ने तेंदू शिकार याचिका की त्वरित सुनवाई को मंज़ूर किया
‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के सह‑स्थापनाकर्ता कार्तिक सत्यनारायण की याचिका, जिसमें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के तेंदू शिकार मामले में उनकी अंतरिम सुरक्षा रद्द करने के आदेश को चुनौती दी गई है, को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकृति दे दी। वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने तत्काल सुनवाई का आग्रह किया और मुख्य न्यायाधीश ने इसे सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। यह विवाद राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की जांच से जुड़ा है, जहाँ तेंदुओं की खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद हुई थीं।

सौजन्य से:- Hindustan
तेंदुए के शिकार संबंधी याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 'वाइल्डलाइफ एसओएस' के सह-संस्थापक कार्तिक सत्यनारायण की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। याचिका में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें तेंदुए के कथित शिकार मामले में उनकी अंतरिम सुरक्षा वापस ली गई थी। मामले की तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया।
सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। याचिका में ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के सह-संस्थापक ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत तेंदुए के कथित शिकार मामले में गिरफ्तारी से मिली उनकी अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली गई थी। ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से याचिका पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया। सीजेआई ने कहा कि इसे सूचीबद्ध किया जाएगा। यह मामला मध्य प्रदेश राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स (एसटीएसएफ) द्वारा तेंदुओं के कथित शिकार की जांच से जुड़ा है, जिनकी खालें उत्तर प्रदेश के आगरा में बरामद की गई थीं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने हाल ही में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत दायर दो याचिकाएं खारिज कर दी थी और सत्यनारायण की गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने उन्हें 21 सितंबर को एसटीएसएफ के सामने पेश होने का निर्देश भी दिया था।
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