सुप्रीम कोर्ट ने चित्रा रामकृष्ण की याचिका पर हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से मना किया
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला, जिसमें पूर्व NSE एमडी‑सीईओ चित्रा रामकृष्ण ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कुछ धारा को चुनौती दी थी, में हस्तक्षेप नहीं किया। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने निर्णय में कोई त्रुटि नहीं की और यह मामला ट्रायल कोर्ट को सौंपा जाना चाहिए।

सौजन्य से:- ETV Bharat
सुप्रीम कोर्ट से NSE की पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्ण को बड़ा झटका, हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने एनएसई की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्ण की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया.
Published : September 15, 2026 at 3:28 PM IST
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की पूर्व पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ चित्रा रामकृष्ण की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है. चित्रा रामकृष्ण ने खुद को गैर सरकारी कर्मचारी बताते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई को चुनौती दी थी.
जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से मना कर दिया. अदालत ने कहा कि उनका मानना है कि हाई कोर्ट ने विवादित फैसला सुनाने में कोई गलती नहीं की है. याचिकाकर्ता एनएसई की एमडी और सीईओ थीं.
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि कोर्ट मानना है कि यह मुद्दा ट्रायल के दौरान उठाया जा सकता है. इस मुद्दे पर ट्रायल कोर्ट को अपने हिसाब से फैसला करने दें. जुलाई में हाई कोर्ट ने चित्रा रामकृष्ण की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 'पब्लिक सर्वेंट' और 'पब्लिक सर्विस' की परिभाषाओं को चुनौती दी गई थी. जस्टिस नवीन चावला और रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने कहा कि एनएसई एक सार्वजनिक सेवा का काम करता है.
एनएसई की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) के तौर पर रामकृष्ण निकाय की ओर से किए गए कामों से खुद को अलग नहीं कर सकतीं. हाई कोर्ट ने रामकृष्ण पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका भी खारिज कर दी, जो कथित एनएसई को-लोकेशन स्कैम मामले में आरोपी हैं.
इसमें उन पर पूर्व एनएसई कर्मचारी आनंद सुब्रमण्यम के पदनाम और मुआवजा को बार-बार अपग्रेड करने का आरोप है. ध्यान देने वाली बात है कि सीबीआई ने चित्रा रामकृष्ण को 6 मार्च 2022 को गिरफ्तार किया था. अपनी चार्जशीट में सीबीआई ने कहा कि चित्रा ने सुब्रमण्यम की नियुक्ति समेत जरूरी फ़ैसले लेते समय अपने पद का गलत इस्तेमाल किया था.
यह गिरफ्तारी स्टॉक एक्सचेंज रेगुलेटर सेबी (SEBI) द्वारा 11 फरवरी, 2022 को रामकृष्ण और दूसरों पर सुब्रमण्यम की नियुक्ति के संबंध में गड़बड़ी के आरोप लगाने के बाद हुई थी. पूछताछ के दौरान रामकृष्ण ने दावा किया था कि एक रहस्यमयी 'योगी' ईमेल के जरिए फैसले लेने में उनकी मदद करता था. जिसके बारे में बाद में सीबीआई ने आरोप लगाया कि वह कोई और नहीं बल्कि सुब्रमण्यम था.
ये भी पढ़ें: 'यह पूरी तरह खारिज करने लायक मामला है', निलंबित DIG भुल्लर की जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
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