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तेलंगाना सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है वीबी-जी राम जी स्कीम को

तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G RAM G) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचने का कदम उठाने का फैसला किया है. इसके पीछे सरकार की वजह यह है कि यह स्कीम मनरेगा के नाम को बदलेगी और इससे राज्य के खजाने पर बोझ पड़ेगा.

28 जून 2026 को 07:25 am बजे
तेलंगाना सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है वीबी-जी राम जी स्कीम को

सौजन्य से:- ndtv.in

मजदूरों के लिए शुरू की गई योजना 'मनरेगा' का नाम बदलकर 'वीबी-जी राम जी' करने का विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच सकता है. तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी ने बताया कि कांग्रेस सरकार 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण' (VB-G RAM G) एक्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है. इस एक्ट ने MGNREGA की जगह ली है.

तेलंगाना सरकार को क्या है दिक्कत?

इस मुद्दे पर बनी कैबिनेट सब-कमेटी के प्रमुख रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार 'विकसित भारत गारंटी रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण' (VB-G RAM G) को उसके मौजूदा रूप में स्वीकार नहीं करेगी. मंत्री ने शनिवार को कैबिनेट सब-कमेटी के अन्य सदस्यों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पैनल ने कर्नाटक और केरल के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करने का प्रस्ताव रखा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दोनों राज्य राज्यों की शक्तियों और वित्तीय हितों की रक्षा के लिए कोई साझा कानूनी रणनीति या अन्य समन्वित उपाय अपनाने को तैयार होंगे.

बयान में कहा गया है कि सब-कमेटी का मानना था कि प्रस्तावित कानून के व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावों के बारे में जनता को अभी तक ठीक से जानकारी नहीं दी गई है. कमेटी ने इस मुद्दे को 2 जुलाई को राज्य कैबिनेट के सामने रखने का फैसला किया. बयान के अनुसार, उम्मीद है कि कैबिनेट इस बात पर अंतिम फैसला लेगी कि तेलंगाना को केंद्र के ढांचे को अपनाना चाहिए, अपना कानून बनाना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए या कानूनी और प्रशासनिक उपायों का मिला-जुला तरीका अपनाना चाहिए.

ये भी पढ़ें :- जितने दिन का काम उतने का दाम: UP में लागू होगी 'VB GRAM G' योजना, 125 दिन रोजगार के साथ मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

इस बीच, नागरिक समाज संगठनों ने तेलंगाना सरकार से आग्रह किया कि वह प्रस्तावित केंद्रीय ढांचे को अपनाने के बजाय संविधान के तहत अपना रोजगार गारंटी कानून बनाए. उनका मानना था कि केंद्रीय ढांचे को अपनाने से राज्य के खजाने पर लगभग 2500 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है.

ये भी पढ़ें :- केंद्र सरकार ने तीन साल बाद जारी की VB-G Ram G की राशि, जानिए यूपी और बंगाल को कितना पैसा मिला

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