जर्मनी: आर्थिक सुधारों के लिए आज होगी गठबंधन सरकार की अहम बैठक
जर्मनी में बड़े आर्थिक सुधारों के लिए आज गठबंधन सरकार की अहम बैठक होगी. इस बैठक में सरकार के आर्थिक सलाहकार शामिल होंगे. यह बैठक जर्मनी की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए कुछ कदम उठाने के लिए महत्वपूर्ण होगी.

सौजन्य से:- DW.com
जर्मनी: आर्थिक सुधारों के लिए आज होगी गठबंधन सरकार की बैठक
प्रकाशित १ जुलाई २०२६आखिरी अपडेट १ जुलाई २०२६भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.
आपके लिए अहम जानकारी
मनरेगा की जगह लेने वाला ‘वीबी-जी राम जी’ कानून लागू हुआ, कितनी मिलेगी मजदूरी
जर्मनी: बड़े आर्थिक सुधारों के लिए आज होगी गठबंधन सरकार की अहम बैठक
भारत ने फलस्तीन को 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक की मदद दी: भारतीय राजनयिक
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जन्मजात नागरिकता का अधिकार रहेगा बरकरार
भारत में जून के बाद जुलाई में भी हो सकती है औसत से कम बारिश
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर किए हवाई हमले, सीमा पर बढ़ा तनाव
भारत ने पाकिस्तान से की 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई की मांग
भारत ने बुधवार, 1 जुलाई को पाकिस्तान में अपनी सजा पूरी कर चुके 188 भारतीय मछुआरों और नागरिक कैदियों की रिहाई और स्वदेश वापसी की अपनी मांग दोहराई. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह मांग तब दोहराई गई जब दोनों देशों ने एक-दूसरे की हिरासत में मौजूद नागरिक कैदियों और मछुआरों की सूचियों का आदान-प्रदान किया.
भारत और पाकिस्तान के बीच साल 2008 में कॉन्सुलर एक्सेस से जुड़ा एक समझौता हुआ था, जिसके तहत हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को दोनों देश एक-दूसरे के साथ कैदियों से जुड़ी जानकारी साझा करते हैं. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नई दिल्ली और इस्लामाबाद में राजनयिक माध्यमों से यह जानकारी साझा की जाती है.
इस साल भारत ने अपनी हिरासत में मौजूद 386 नागरिक कैदियों और 53 मछुआरों की सूची साझा की है जो पाकिस्तानी हैं या जिनके पाकिस्तानी होने का संदेह है. वहीं, पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में मौजूद 52 नागरिक कैदियों और 198 मछुआरों की सूची साझा की, जो भारतीय हैं या जिनके भारतीय होने का संदेह है.
पाकिस्तान ने भी कैदियों की सूची का आदान-प्रदान होने की पुष्टि की है. पाकिस्तान ने कहा है कि उसने भारत से 97 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा करने और स्वदेश वापस भेजने का आग्रह किया है, जिन्होंने अपनी सजा पूरी कर ली है और जिनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो चुकी है. इन 97 कैदियों में से 64 नागरिक कैदी हैं और 33 मछुआरे हैं.
केंद्र सरकार ने ई20 फ्यूल को “प्रयोग” बताने वाली खबरों को नकारा
भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि के कार्यालय ने एक स्पष्टीकरण जारी कर कहा है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यह कभी नहीं कहा कि सरकार का ई20 ईंधन कार्यक्रम एक “प्रयोग” है. यह स्पष्टीकरण तब आया है जब कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अटॉर्नी जनरल (एजी) ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने का सरकारी कार्यक्रम एक “चल रहा प्रयोग” है और इसका असर अगले साल तक स्पष्ट हो पाएगा.
एजी कार्यालय ने इन रिपोर्टों को “पूरी तरह से गलत” बताते हुए कहा है कि कोर्ट के सामने कही गईं बातें इन दावों से एकदम अलग हैं. उन्होंने मीडिया के सदस्यों से अपील की कि वे न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग सटीकता के साथ करें, खासतौर पर राष्ट्रीय नीतिगत पहलों से जुड़े मामलों में. कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, 30 जून को हुई सुनवाई इथेनॉल आपूर्ति के आवंटन से जुड़े एक मामले से संबंधित थी और इस दौरान एजी ने कहा था कि वे ऐसी अन्य याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करने की मांग करेंगे.
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स्पेन में इतिहास के दूसरे सबसे गर्म जून के महीने में 1,000 से अधिक लोगों की मौत
स्पेन में पिछले महीने पड़ी भीषण गर्मी और लू के कारण कम से कम 1,028 लोगों की मौत हो गई. अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि देश में इस साल सबसे गर्म छमाही दर्ज की गई है. जून महीने में गर्मी की वजह से हुई मौतों का यह आंकड़ा जून 2025 में दर्ज की गई 407 मौतों के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है. साल 2015 के बाद से जून के महीने में गर्मी के कारण होने वाली मौतों की यह सबसे बड़ी संख्या है.
स्पेन की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी 'एमेट' ने जानकारी दी कि पिछला महीना देश के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म जून रहा, जहां औसत तापमान सामान्य से 3.2 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. एजेंसी ने बताया कि साल 2026 की पहली छमाही (जनवरी से जून) पूरे स्पेन के लिए रिकॉर्ड में अब तक की सबसे गर्म अवधि बन गई है, जिसमें तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा.
हाल ही में आई इस भीषण गर्मी ने न केवल स्पेन बल्कि पूरे यूरोप को झुलसा कर रख दिया है, जिसे महाद्वीप के इतिहास की सबसे गंभीर हीटवेव माना जा रहा है. फ्रांस, जर्मनी और कई अन्य यूरोपीय देशों में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जिसने गर्मी के पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.
वियतनाम में पेरेंट्स को ‘बेबी बोनस’ देगी सरकार, जनसंख्या बढ़ाना है लक्ष्य
वियतनाम सरकार ने जनसंख्या को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक नई जनसंख्या नीति लागू की है. इस नीति के तहत, दूसरी बार मां बनने वाली महिलाओं को छह की बजाय सात महीने की मैटरनिटी लीव मिलेगी. प्रेग्नेंसी के दौरान मां की और जन्म के बाद बच्चे की मुफ्त स्क्रीनिंग की जाएगी और उन्हें कैश बोनस भी मिलेगा. यह एकमुश्त बोनस 228 डॉलर तक का होगा, जो औसत मासिक वेतन का लगभग दो तिहाई है.
वियतनाम में जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है और जन्मदर गिर रही है, जिससे यह सबसे तेजी से बूढ़े होने वाले देशों में शामिल हो गया है. इससे पार पाने के लिए पिछले साल सरकार ने सिर्फ दो बच्चे पैदा करने का प्रतिबंध वापस ले लिया था और अब पेरेंट्स को बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. वरना एक साल पहले तक कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को तीसरा बच्चा पैदा करने पर प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता था.
वियतनाम में जन्मदर घट रही है लेकिन अभी इसकी स्थिति जापान और दक्षिण कोरिया जितनी खराब नहीं है. वियतनाम में अभी जन्मदर 1.93 बच्चे प्रति महिला है जो 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से कम है लेकिन विकसित देशों के मुकाबले काफी बेहतर है. वहीं, जीवन प्रत्याशा बढ़कर 75 साल के आसपास पहुंच गई है और कुल आबादी में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 10 फीसदी से अधिक हो गई है.
यूरो 2024 टिकट घोटाला: रिश्वतखोरी के शक में जर्मन फुटबॉल एसोसिएशन के दफ्तरों पर पड़ा छापा
फुटबॉल टूर्नामेंट यूरो 2024 की मेजबानी करने वाले जर्मन शहरों में वीआईपी पास और मुफ्त सुविधाओं के नाम पर हुई कथित रिश्वतखोरी को लेकर जर्मन प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है. पुलिस द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, टूर्नामेंट के दौरान अधिकारियों को मिले अनुचित लाभों के संदेह में देश भर में ताबड़तोड़ छापेमारी की गई है.
पश्चिमी जर्मन राज्य नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया के क्रिमिनल पुलिस ऑफिस के 150 से अधिक अधिकारियों ने इस संयुक्त कार्रवाई को अंजाम दिया. जांच टीम ने जर्मन फुटबॉल एसोसिएशन (डीएफबी) के मुख्यालय के साथ-साथ यूरो 2024 की मेजबानी करने वाले कई प्रमुख शहरों के नगर निगमों और कई निजी कंपनियों के दफ्तरों को खंगाला. जिन शहरों में ये छापे मारे गए उनमें डॉर्टमुंड, डुसेलडोर्फ, कोलोन, हैम्बर्ग, बर्लिन, फ्रैंकफर्ट, स्टुटगार्ट और म्यूनिख शामिल हैं.
यह पूरा मामला मुख्य रूप से टूर्नामेंट की आयोजन संस्था 'यूरो 2024 जीएमबीएच' से जुड़े दो संदिग्धों पर केंद्रित है, जिनमें एक 66 वर्षीय जर्मन और दूसरा 46 वर्षीय फ्रांसीसी नागरिक है. जांचकर्ता इस बात का पता लगा रहे हैं कि क्या इन लोगों ने मेजबान शहरों के सरकारी अधिकारियों को रिश्वत के तौर पर महंगे मैच टिकट, यात्रा और होटलों में मुफ्त ठहरने जैसी अनधिकृत सुविधाएं दी थीं. विशेष रूप से म्यूनिख में हुए स्पेन बनाम फ्रांस के सेमीफाइनल मैच की वीआईपी टिकटों की विशेष पहुंच को लेकर भी जांच की जा रही है.
जर्मनी: बड़े आर्थिक सुधारों के लिए आज होगी गठबंधन सरकार की अहम बैठक
जर्मनी की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के शीर्ष नेता गर्मियों की छुट्टियों पर जाने से पहले कई बड़े और महत्वपूर्ण सुधारों को हरी झंडी देने के लिए आज एक अहम बैठक कर रहे हैं. चांसलरी में होने वाली इस गठबंधन समिति की बैठक की मेजबानी खुद चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स कर रहे हैं, जिसमें देश की अर्थव्यवस्था और टैक्स व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा नीतिगत पैकेज एजेंडे में शामिल है.
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इस बैठक में मुख्य रूप से आयकर सुधार, पेंशन व्यवस्था, लेबर मार्केट में लचीलापन लाने और ब्यूरोक्रेसी को कम करने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होगी. सरकार का लक्ष्य इन सुधारों पर कोई ठोस सहमति बनाना या कम से कम इनके क्रियान्वयन के लिए एक समय-सीमा तय करना है. इस बैठक में चांसलर मैर्त्स के अलावा सोशल डेमोक्रेट्स (एसपीडी) की ओर से वित्त मंत्री लार्स क्लिंगबाइल और श्रम मंत्री बेर्बेल बास शामिल हो रही हैं. साथ ही, बवेरिया में सीडीयू की सहयोगी पार्टी सीएसयू (सीएसयू) के नेता भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं.
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इन तमाम मुद्दों में सबसे बड़ी चुनौती आयकर सुधार को लेकर है. गठबंधन सरकार का इरादा अगले साल की शुरुआत से देश के मध्यम और कम आय वर्ग वाले लोगों को टैक्स में बड़ी राहत देने का है. हालांकि, सबसे बड़ा और पेचीदा सवाल यह खड़ा है कि टैक्स में कटौती से राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई और इन राहत उपायों की फंडिंग कहां से की जाएगी. मुद्दों की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए माना जा रहा है कि यह बैठक आज देर रात तक खिंच सकती है या अगले दिन भी जारी रह सकती है.
सिर्फ केबिन बैगेज ले जाने वाले यात्रियों को सस्ती टिकटें देगा इंडिगो
भारत की इंडिगो एयरलाइंस ने बुधवार, 1 जुलाई को एलान किया कि उसने सिर्फ केबिन बैगेज के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए सस्ती फ्लाइट टिकट पेश की हैं. एयरलाइन ने इसे इंडिगो लाइट नाम दिया है. इसके तहत यात्रियों को कम बेस प्राइस पर टिकट मिलेगी और वे अपने साथ सात किलोग्राम तक का केबिन बैगेज ही ले जा सकेंगे. इसके अलावा, उन्हें सीट चुनने की भी अनुमित नहीं होगी. एयरलाइन खुद उनके लिए सीट तय करेगी.
सामान्य स्थिति में घरेलू यात्रियों को सात किलोग्राम तक के केबिन बैगेज के अलावा, 15 किलोग्राम तक का चेक-इन लगेज ले जाने की भी अनुमति होती है. लेकिन इंडिगो लाइट के जरिए टिकट बुक करने पर चेक-इन लगेज ले जाने की अनुमति नहीं होगी. यह उन यात्रियों के लिए अच्छा साबित हो सकता है जो कम सामान के साथ सफर करते हैं. इंडिगो लाइट का कम किराया घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों पर लागू होगा.
पिछले महीने भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयलाइन एयर इंडिया ने भी एक बेसिक इकोनॉमी फेयर पेश किया था, जिसमें यात्रियों को मिलने वाला खाना हटा दिया गया था. एयरलाइन ने किफायती ग्राहकों के लिए यह प्लान शुरू किया था. भारतीय एयरलाइनें जेट फ्यूल के महंगे होने और पाकिस्तानी एयरस्पेस के बंद होने जैसी चुनौतियों से जूझ रही हैं इसलिए यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए ऐसे कदम उठा रही हैं.
नेपाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम घटाए गए
नेपाल में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में 13 फीसदी तक की कटौती की गई है. नेपाल के सरकारी नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (एनओसी) ने पेट्रोल की कीमत में 9.2 फीसदी, डीजल की कीमत में 13.3 फीसदी और रसोई गैस की कीमत में 4.6 फीसदी की कमी की है. इसके अलावा, जेट फ्यूल की कीमत में घरेलू क्षेत्र के लिए 14.8 फीसदी और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र के लिए 17 फीसदी तक की कमी की गई है.
अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती शांति समझौता होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम गिरे हैं, जिससे ईंधन की कीमतें भी गिर रही हैं. बेहद ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद कच्चे तेल के दाम ईरान युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आए हैं.
नेपाल अपनी जरूरत का सारा ईंधन आयात से हासिल करता है. भारत की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन नेपाल की इकलौती आपूर्तिकर्ता है. नेपाल ने कहा है कि इंडियन ऑयल द्वारा तेल आपूर्ति की कीमतों में कटौती किए जाने के चलते ईंधन के दाम घटाए गए हैं. नेपाल में ईंधन की नई कीमतें बुधवार, 1 जुलाई से लागू हो गई हैं.
मनरेगा की जगह लेने वाला ‘वीबी-जी राम जी’ कानून लागू हुआ, कितनी मिलेगी मजदूरी
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह लेने वाला 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 1 जुलाई, 2026 से देश भर में लागू हो गया है. इसे संक्षिप्त में वीबी–जी राम जी (विकसित भारत-जी राम जी) अधिनियम भी कहा जा रहा है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे एक ऐतिहासिक दिन बताया है. वहीं, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का कहना है कि इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा.
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शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अब ग्रामीण परिवारों को 100 नहीं बल्कि 125 दिनों के रोजगार का वैधानिक अधिकार मिलेगा. प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की प्रेस रिलीज के मुताबिक, केंद्र सरकार ने इस योजना के क्रियान्वन के लिए 95,692 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया है. कृषि मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से गांवों में आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे.
‘वीबी–जी राम जी’ कानून के तहत, विभिन्न राज्यों में दैनिक मजदूरी 300 रुपये से 409 रुपये के बीच तय की गई है. वहीं, सिक्किम की कुछ ग्राम पंचायतों के लिए 450 रुपये की विशेष दर तय की गई है. प्रेस रिलीज के मुताबिक, 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और प्रशासनिक इकाइयों के लिए 300 रुपये की नई मजदूरी दर तय की गई है. वहीं, हरियाणा, गोवा और केरल के लिए मजदूरी दर 400 रुपये से अधिक तय की गई है.
भारत ने फलस्तीन को 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक की मदद दी: भारतीय राजनयिक
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने बताया है कि भारत ने फलस्तीन के लोगों की मदद के लिए 17.5 करोड़ डॉलर से अधिक दिए हैं, जिनमें विकास और मानवीय मदद भी शामिल है. उन्होंने ‘संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी’ के संकल्प समारोह में कहा कि भारत दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है जिससे संप्रभु फलस्तीन की स्थापना हो सके.
पर्वतनेनी हरीश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संबोधन की वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत बातचीत के जरिए दो-राष्ट्र समाधान पर पहुंचने का समर्थन करता है, जिससे एक संप्रभु, स्वतंत्र और व्यवहार्य फलस्तीनी राज्य की स्थापना हो सके, जो सुरक्षित और मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर, इस्राएल के साथ शांति और सुरक्षा में रहे.”
अपने संबोधन में उन्होंने गाजा के मानवीय संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि गाजा में फलस्तीनी लोगों की पीड़ा लगातार जारी है. उन्होंने कहा, आम नागरिकों की मौत, बड़े पैमाने पर विस्थापन, नागरिक बुनियादी ढांचे का विनाश और भोजन, ईंधन, दवाइयों और आवश्यक सेवाओं की गंभीर कमी ने एक बड़ा मानवीय संकट पैदा कर दिया है.
उन्होंने कहा कि फलस्तीनी लोगों के लिए सामान्य जीवन एक दूर का सपना है और यह स्थिति बदलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि फलस्तीनी लोगों को भी सामान्य जीवन जीने का उतना ही हक है, जितना हम सभी को है.
पुतिन के रक्षा मंत्री ने दी थी रूसी सैनिकों की चीन में ट्रेनिंग को मंजूरी: रॉयटर्स
पिछले साल चीन में रूसी बलों को दी गई गुप्त सैन्य ट्रेनिंग को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रक्षा मंत्री ने व्यक्तिगत रूप से मंजूरी दी थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स द्वारा देखे गए दस्तावेजों और दो यूरोपीय अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे अभियान में रूस और चीन के कम से कम चार शीर्ष जनरल सीधे तौर पर शामिल थे.
यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेन युद्ध से जुड़ी इस सैन्य ट्रेनिंग में इतने उच्च अधिकारियों और जनरलों का शामिल होना यह साफ दर्शाता है कि रूस और चीन इस आपसी सहयोग को कितनी अहमियत दे रहे हैं. हालांकि, बीजिंग लगातार इस तरह की किसी भी ट्रेनिंग से इनकार करता रहा है.
रॉयटर्स द्वारा देखे गए एक गोपनीय रूसी दस्तावेज में सीधे तौर पर अगस्त 2025 में रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव द्वारा जारी एक आंतरिक सरकारी आदेश का हवाला दिया गया है. इस दस्तावेज के मुताबिक, रक्षा मंत्री बेलोसोव के फैसले के बाद ही रूसी सशस्त्र बलों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चीन पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के सैन्य ठिकानों पर जाकर विशेष प्रशिक्षण अभ्यासों में हिस्सा लिया था.
म्यांमार तख्तापलट: गृहयुद्ध के पांच सालों में हुईं एक लाख से ज्यादा मौतें
म्यांमार में पांच साल पहले हुए सैन्य तख्तापलट और उसके बाद भड़के देशव्यापी गृहयुद्ध में अब तक सभी पक्षों को मिलाकर एक लाख से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. हिंसा से जुड़े डेटा और मीडिया रिपोर्ट्स पर नजर रखने वाले वैश्विक संगठन 'आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा' (एसीएलईडी) की वरिष्ठ विश्लेषक सन मोन थांत ने यह जानकारी दी. रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2021 में हुए तख्तापलट के बाद से देश में अब तक संघर्ष के कारण कुल 1,00,114 लोगों की मौत हो चुकी है.
म्यांमार में जारी इस संकट को लेकर कोई आधिकारिक सरकारी आंकड़े मौजूद नहीं हैं और विभिन्न संस्थाओं के अनुमानों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है, लेकिन स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक इस गृहयुद्ध को वर्तमान में एशिया का सबसे घातक सक्रिय संघर्ष मानते हैं.
इस संकट की शुरुआत फरवरी 2021 में हुई थी, जब म्यांमार की सेना ने नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार का तख्तापलट कर दिया था. सैन्य सरकार के खिलाफ शुरुआत में शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुए, जिन्हें सुरक्षा बलों ने बल प्रयोग से कुचल दिया. इसके बाद लोकतंत्र समर्थक शहरों को छोड़कर जंगलों में चले गए और उन्होंने छापामार (गुरिल्ला) समूहों का गठन किया.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जन्मजात नागरिकता का अधिकार रहेगा बरकरार
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को एक बड़ा कानूनी झटका देते हुए उनके उस कार्यकारी आदेश को असंवैधानिक और अवैध करार दिया है, जिसके तहत अमेरिका में पैदा होने वाले बच्चों को मिलने वाली जन्मजात नागरिकता को सीमित करने का प्रयास किया गया था. कोर्ट ने साफ किया कि अमेरिकी धरती पर पैदा होने वाले लगभग हर व्यक्ति को जन्म से ही अमेरिका की नागरिकता मिलने का संवैधानिक अधिकार जारी रहेगा.
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डॉनल्ड ट्रंप ने पिछले साल अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन इस विवादित कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. यह कदम उनकी कानूनी और अवैध अप्रवासन दोनों पर नकेल कसने की व्यापक नीतियों का हिस्सा था. इस आदेश के जरिए सरकारी एजेंसियों को निर्देश दिया गया था कि वे अमेरिका में जन्म लेने वाले उन बच्चों को नागरिकता न दें, जिनके माता-पिता में से कोई भी अमेरिकी नागरिक या वैध स्थायी निवासी (ग्रीन कार्ड होल्डर) नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने फैसला लिखते हुए कहा कि नागरिकता का मतलब अधिकारों का अधिकार होना और हमारे राजनीतिक समुदाय में स्वतंत्र रूप से भाग लेना है. कोर्ट ने संविधान के 14वें संशोधन के 'सिटिजनशिप क्लॉज' की व्यापक परिभाषा को बरकरार रखा. इस क्लॉज के अनुसार, अमेरिका में पैदा होने वाला हर व्यक्ति यहां का नागरिक माना जाता है.
अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक के एआई मॉडल्स से हटाई पाबंदी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी एंथ्रोपिक ने मंगलवार को बताया कि अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने उसके 'फेबल' और 'मिथोस' एआई मॉडल्स पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंधों को हटा लिया है. यह फैसला कंपनी को राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों के चलते इन मॉडल्स तक पहुंच को तुरंत निलंबित करने के आदेश दिए जाने के तीन हफ्ते से भी कम समय के भीतर आया है.
अमेरिकी सरकार ने हाल के दिनों में नए एआई मॉडल्स के लॉन्च और उनके वितरण पर अपनी निगरानी काफी सख्त कर दी है. सरकार को चिंता है कि इन बेहद एडवांस एआई मॉडल्स का दुरुपयोग चीन, रूस या अन्य संवेदनशील देशों की सैन्य खुफिया एजेंसियों द्वारा किया जा सकता है, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है.
बीते 12 जून को एक सरकारी आदेश जारी कर एंथ्रोपिक को 'मिथोस 5' और 'फेबल 5' मॉडल्स तक विदेशी नागरिकों की पहुंच को तुरंत सीमित करने के लिए कहा गया था. इस वजह से एंथ्रोपिक को अपने सभी यूजर्स के लिए इन दोनों ही एआई मॉडल्स को पूरी तरह से बंद करना पड़ा था.
भारत में जून के बाद जुलाई में भी हो सकती है औसत से कम बारिश
भारत में जुलाई के महीने में भी औसत से कम मानसूनी बारिश हो सकती है. भारत के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक मृत्युजंय महापात्रा ने मंगलवार को बताया कि जुलाई में मानसूनी बारिश का स्तर दीर्घकालिक औसत के 94 फीसदी से भी कम रह सकता है. उन्होंने कहा कि एल नीनो वैदर पैटर्न आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकता है और मानसूनी बारिश को प्रभावित कर सकता है.
इससे पहले जून महीने में भारत में औसत से करीब 39.8 फीसदी कम बारिश हुई थी. साल 1901 में रिकॉर्ड रखे जाने की शुरुआत के बाद से यह पांचवां सबसे गर्म जून का महीना था. पिछले महीने हुई कम बारिश के पीछे एल नीनो एक प्रमुख वजह रहा और मानसून के कमजोर रहने के चलते कृषि पैदावार और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं.
जुलाई में होने वाली मानसूनी बारिश इसलिए भी जरूरी है क्योंकि ज्यादातर किसान इसी महीने में खरीफ की फसलों की बुवाई करते हैं. मानसून की धीमी शुरुआत होने के चलते किसान चावल, कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की बुवाई में पिछड़ सकते हैं और उनकी पैदावार प्रभावित हो सकती है. भारत सरकार के मुताबिक, 300 से अधिक जिले कमजोर मानसून के प्रति संवेदनशील हैं.
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