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देर रात फोन पर बात करने से क्या? महिला के चरित्र पर सवाल नहीं: अदालत का निर्णय

अदालत ने कहा है कि महिला के चरित्र पर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं अगर वे देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करती हैं। अदालत ने घरेलू हिंसा के एक पेंडिंग मामले में अपना निर्णय दिया

25 जून 2026 को 05:23 pm बजे
देर रात फोन पर बात करने से क्या? महिला के चरित्र पर सवाल नहीं: अदालत का निर्णय

सौजन्य से:- Jansatta

दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि महज इसलिए कि कोई महिला देर रात फोन पर किसी पुरुष से बात करती है, उसके चरित्र पर सवाल उठाने का कारण नहीं हो सकता। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शुनाली गुप्ता ने एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। व्यक्ति ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें घरेलू हिंसा के एक पेंडिंग मामले में उसकी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति के ‘कॉल डिटेल रिकॉर्ड’ (सीडीआर) को सुरक्षित रखने की उसकी मांग को खारिज कर दिया गया था।

अदालत ने 2 जून के एक आदेश में कहा, ”मेरी राय में किसी व्यक्ति से बात करने मात्र से ही महिला के चरित्र पर सवाल नहीं उठाया जा सकता, जब तक कि यह आरोप न लगाया गया हो कि महिला का उस व्यक्ति के साथ कोई गैर-कानूनी या गलत संबंध है।” अपील करने वाले पति ने दलील दी थी कि रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना जरूरी है क्योंकि शिकायतकर्ता (उसकी पत्नी) कथित तौर पर देर रात कुछ लोगों के साथ नियमित रूप से फोन पर बात करती थी।”

व्यक्ति के कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग के पीछे वाजिब कारण होने चाहिए

व्यक्ति ने दलील दी कि अगर सीडीआर को सुरक्षित नहीं रखा गया तो समय बीतने के साथ सर्विस प्रोवाइडर द्वारा रिकॉर्ड मिटाये जा सकते हैं। निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए सत्र अदालत ने कहा कि हालांकि निजता का अधिकार पूरी तरह से असीमित नहीं है और उचित मामलों में निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के लिए इसे सीमित किया जा सकता है। लेकिन, किसी दूसरे व्यक्ति के कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग के पीछे ठोस और वाजिब कारण होने चाहिए।

भारतीय समाज अब ऐसा पिछड़ा समाज नहीं रहा- अदालत

न्यायाधीश ने कहा, ”भारतीय समाज अब ऐसा पिछड़ा समाज नहीं रहा है जहां किसी महिला का पुरुष से बात करना गलत माना जाता हो।” अदालत ने उल्लेख किया कि न तो निचली अदालत में दी गई अर्जी और न ही अपील में रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की जरूरत का कोई ठोस कारण बताया गया। अदालत ने कहा, ”महिलाएं हर क्षेत्र में, जैसे कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करती हैं और उनके पुरुष सहकर्मी भी होते हैं। सिर्फ इसलिए कि कोई महिला रात में फोन पर बात करती हुई पाई गई है, यह उसके मोबाइल नंबर का सीडीआर सुरक्षित रखने की मांग का आधार नहीं बन सकता।” यह मानते हुए कि निजता में किसी भी तरह के दखल का उचित कारण होना चाहिए, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि निचली अदालत ने याचिका को सही ही खारिज किया था और उन्होंने अपील को खारिज कर दिया।

यह भी पढ़ें: सूरत में बुजुर्ग दंपति ने मांगी इच्छा-मृत्यु

सूरत में बुजुर्ग दंपति ने इच्छा-मृत्यु की मांग उठाई है। गुजरात के सूरत शहर में एक बुजुर्ग जोड़े ने नगर निकाय के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं पर उनका आर्थिक उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए इच्छा-मृत्यु की इजाजत मांगी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

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