भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ उपभोक्ता संगठन की हाई कोर्ट में कार्रवाई
एक उपभोक्ता संगठन ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसमें कथित भ्रामक विज्ञापन का आरोप लगाया गया है जिससे उपभोक्ताओं को वास्तविक गुणवत्ता, प्रभाव और लाभ के बारे में भ्रमित होने की आशंका है।

मुंबई में एक प्रमुख उपभोक्ता संगठन ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि एक कंपनी ने अपने उत्पाद के प्रचार में ऐसे दावे किए, जिनसे उपभोक्ताओं को वास्तविक गुणवत्ता, प्रभाव और लाभ के बारे में भ्रमित होने की आशंका है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि विज्ञापन में किए गए कुछ दावों के समर्थन में पर्याप्त वैज्ञानिक या तथ्यात्मक आधार प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके कारण बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। मामले को लेकर संबंधित कंपनी से भी जवाब मांगा गया है।
सूत्र: Aaj Tak
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भ्रामक विज्ञापन Consumer Protection Law के तहत गंभीर विषय माना जाता है। यदि कोई विज्ञापन उपभोक्ताओं को गुमराह करता है या उत्पाद के बारे में गलत धारणा बनाता है, तो संबंधित संस्थाओं के खिलाफ नियामकीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
दिल्ली उच्च न्यायालय सहित पांच स्थानों को हिंसक हमले की धमकी

चेहरे की पहचान को चुनौती देने वाले विरोध प्रदर्शन: भारत का सर्वोच्च न्यायालय सुनेगा मामला

गवर्नर हाउस घेराव के एलान पर हाईकोर्ट का कड़वा जवाब, शांति बनाए रखने का निर्देश

वार्निंग लेबल लागू करने में देरी को लेकर अदालत ने एफएसएसएआई को फटकारा

सुप्रीम कोर्ट ने कोरियन रैना जैसे 5 कॉमेडियन के खिलाफ दर्ज मामले रद्द कर दिए

कर विभाग को झटका: ट्रिब्यूनल ने कर विभाग की अपील खारिज कर दी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश का शीर्ष अदालत में हलफनामा: ट्रिब्यूनल की गतिविधियों पर हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करना है

सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल बैंक खातों से प्रतिबंध में नहीं किया हस्तक्षेप
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, सरकारी नौकरी देने के मामले में
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: करूर भगदड़ पीड़ितों के परिजनों को नौकरी देने के हाई कोर्ट के आदेश पर रोक
- कर्नाटक के नए कानून से RSS पर क्या मकसद?
- सुप्रीम कोर्ट की फटकार: पैकेज्ड खाद्य उत्पादों पर स्वास्थ्य चेतावनी क्यों नहीं?
- पैकेट बंद खाद्य पदार्थों पर चआदि।ावनी संबंधी कोर्ट का एफ. एस. एस. ए. आई. को आदेश
- भारत को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचा देगी पर्यावरणीय मुआवजा व्यवस्था
- राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट को चुनौती दी
- सुप्रीम कोर्ट के लाइव स्ट्रीमिंग को दुरुपयोग के शक में, सीजेआई ने चिंता व्यक्त की

