होमसंविधानबहुमत के आधार पर नहीं कानून सबसे ऊपर, उच्च न्यायालय ने भिलाई नगर निगम कमिश्नर को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज की
संविधान

बहुमत के आधार पर नहीं कानून सबसे ऊपर, उच्च न्यायालय ने भिलाई नगर निगम कमिश्नर को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज की

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भिलाई नगर निगम के पार्षदों की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें नगर निगम कमिश्नर राजीव पांडे को हटाने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि कोई भी प्रस्ताव कानूनी रूप से मान्य होने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना जरूरी है।

6 जुलाई 2026 को 08:56 am बजे
बहुमत के आधार पर नहीं कानून सबसे ऊपर, उच्च न्यायालय ने भिलाई नगर निगम कमिश्नर को हटाने की मांग वाली याचिका खारिज की

सौजन्य से:- Jagran

'बहुमत नहीं कानून सबसे ऊपर', भिलाई नगर निगम कमिश्नर को हटाने की मांग वाली याचिका छत्तीसगढ़ HC ने की खारिज

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भिलाई नगर निगम के 32 पार्षदों की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें कमिश्नर राजीव पांडे को हटाने की मांग की गई थी। ...और पढ़ें

HighLights

- हाई कोर्ट ने भिलाई कमिश्नर को हटाने की याचिका खारिज की।

- पार्षदों ने वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया था।

- कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया के पालन को अनिवार्य बताया।

डिजिटल डेस्क, रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भिलाई नगर निगम (BMC) के चुने हुए 32 पार्षदों की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें नगर निगम कमिश्नर राजीव पांडे को तुरंत हटाने की मांग की गई थी।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने 29 जून को यह आदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव को कानूनी रूप से मान्य होने के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन करना जरूरी है। पार्षद संदीप निरंकारी के नेतृत्व में याचिकाकर्ताओं ने 25 मार्च, 2026 को पारित एक प्रस्ताव पर राज्य सरकार की कोई कार्रवाई न करने को चुनौती दी थी।

पार्षदों का क्या कहना था?

पार्षदों का कहना था कि कथित वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के कारण बजट पर चर्चा के लिए बुलाए गए एक विशेष सत्र में दो-तिहाई से ज्यादा चुने हुए सदस्यों ने कमिश्नर के खिलाफ वोट दिया था।

उन्होंने तर्क दिया कि प्रस्ताव पारित होने के बाद राज्य सरकार कमिश्नर को हटाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य थी। राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्ताव में कानूनी वैधता का अभाव था।

डिप्टी एडवोकेट जनरल आनंद दादरिया ने बताया कि 25 मार्च, 2026 की बैठक सिर्फ बजट से जुड़े मामलों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। पार्षदों को भेजे गए आधिकारिक नोटिस में कमिश्नर को हटाने का एजेंडा शामिल नहीं था, जो छत्तीसगढ़ नगर पालिका (कामकाज के संचालन की प्रक्रिया) नियम, 2016 का उल्लंघन था।

अदालत ने क्या कहा?

कोर्ट ने राज्य की आपत्तियों को सही ठहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि तय कानूनी ढांचे से हटकर लिया गया कोई भी फैसला अमान्य हो जाता है, भले ही उसे सदस्यों का संख्या बल हासिल हो।

खबरें और भी

कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे प्रस्ताव को लागू करने के लिए 'रिट ऑफ मैंडमस' (आदेश) जारी नहीं किया जा सकता जो जरूरी नोटिस और एजेंडा नियमों का उल्लंघन करता हो।

हाई कोर्ट ने कहा, "राज्य सरकार को ऐसे प्रस्ताव को लागू करने का निर्देश देने के लिए रिट ऑफ मैंडमस जारी नहीं किया जा सकता जो कानूनी रूप से मान्य न हो। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट, 1956 की धारा 54(2) के तहत जिम्मेदारी तभी बनती है जब प्रस्ताव कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सही ढंग से अपनाया गया हो। ऐसे वैध प्रस्ताव के अभाव में भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोई कानूनी रूप से लागू करने योग्य कर्तव्य नहीं बनता है।"

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
सैन्य और राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित 9 कानूनों में संशोधन, विधायी कार्यक्रम में शामिल
संविधान

सैन्य और राष्ट्रीय रक्षा से संबंधित 9 कानूनों में संशोधन, विधायी कार्यक्रम में शामिल

तंबाकू से होने वाले नुकसान की रोकथाम: कानूनी सुरक्षा कवच लगाने की कोशिश
संविधान

तंबाकू से होने वाले नुकसान की रोकथाम: कानूनी सुरक्षा कवच लगाने की कोशिश

राजस्थान उच्च न्यायालय ने वृक्षारोपण धोखाधड़ी पर राज्य सरकार को नोटिस देने पर विचार किया
संविधान

राजस्थान उच्च न्यायालय ने वृक्षारोपण धोखाधड़ी पर राज्य सरकार को नोटिस देने पर विचार किया

नौ कानूनों में संशोधन करने वाले मसौदा कानून को 2026 में शामिल किया जाएगा
संविधान

नौ कानूनों में संशोधन करने वाले मसौदा कानून को 2026 में शामिल किया जाएगा

आरटीई के तहत सीधे KG-1 में नहीं मिलेगा प्रवेश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
संविधान

आरटीई के तहत सीधे KG-1 में नहीं मिलेगा प्रवेश, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने विदेश यात्रा के अधिकार को संवैधानिक अधिकार माना
संविधान

आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने विदेश यात्रा के अधिकार को संवैधानिक अधिकार माना

पेंशन वृद्धि और मूल वेतन में विसंगतियां: सामाजिक बीमा कानून में प्रस्तावित संशोधन।
संविधान

पेंशन वृद्धि और मूल वेतन में विसंगतियां: सामाजिक बीमा कानून में प्रस्तावित संशोधन।

भाजपा के नाप असियानी प्रयासों का लोकतंत्र विरोधी प्रकार: के. राजू
संविधान

भाजपा के नाप असियानी प्रयासों का लोकतंत्र विरोधी प्रकार: के. राजू

ताज़ा ख़बरें