होमअपराधगुजरात में कथित हिरासत में मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT जांच के आदेश दिए
अपराध

गुजरात में कथित हिरासत में मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT जांच के आदेश दिए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक शख्स की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच का आदेश दिया। आरोप है कि गुजरात पुलिस की हिरासत में शख्स की मौत हो गई थी। तोफिक शेख, जिसने अपने पिता की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका दी थी, को गुजरात हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी।

23 जुलाई 2026 को 04:13 pm बजे
गुजरात में कथित हिरासत में मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT जांच के आदेश दिए

सौजन्य से:- ETV Bharat

गुजरात में कथित हिरासत में मौत का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT जांच के आदेश दिए

मृतक के बेटे तोफिक शेख की याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के 29 मई के आदेश को चुनौती दी गई थी.

Published : July 23, 2026 at 8:49 PM IST

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक शख्स की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने और एसआईटी जांच का आदेश दिया. आरोप है कि गुजरात पुलिस की हिरासत में शख्स की मौत हो गई थी.

उस पर कथित तौर पर मवेशी काटने का मामला दर्ज किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात कोर्ट में तीन महीने के अंदर अंतिम जांच रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया.

मृतक के बेटे तोफिक शेख की याचिका में गुजरात हाई कोर्ट के 29 मई के आदेश को चुनौती दी गई थी. हाई कोर्ट ने पुलिस कस्टडी में अपने पिता की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज करने और स्वतंत्र जांच की मांग वाली उसकी याचिका खारिज कर दी.

शेख के वकील ने आरोप लगाया कि मृतक को डायबिटीज की कई गोलियां खाने के लिए मजबूर किया गया था. हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को संवैधानिक कोर्ट जाने से पहले भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(3) के तहत कानूनी उपाय का फायदा उठाना चाहिए. याचिकाकर्ता के अनुरोध पर, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर से खतरे का आकलन करने और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कार्रवाई करने को भी कहा.

आज सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, "जब इस तरह का शक होता है. आप बस एफआईआर दर्ज कर लेते हैं, किसी के खिलाफ नहीं… जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंचते हैं कि फलां व्यक्ति शामिल पाया गया है, शामिल नहीं पाया गया है या कोई भी शामिल नहीं पाया गया है, या सभी शामिल पाए गए हैं."

बेंच ने कहा, "हम असल में कह रहे हैं कि ललिता कुमारी (जजमेंट) एक फैशन बनता जा रहा है…जैसे कि आप दुनिया में किसी के भी खिलाफ शिकायत करें और कहें कि ललिता कुमारी कहती हैं कि (FIR) दर्ज करो. यह जजमेंट का मतलब या भावना नहीं है."

बेंच ने कहा कि जब कोई आरोप लगाता है कि पुलिस कस्टडी में अप्राकृतिक मौत हुई है, तो शुरुआती जांच की जरूरत होती है और अगर कोई दोषी ठहराने वाला सामग्री है, तो एफआईआर दर्ज करनी होगी.

बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू की यह बात नहीं मानी कि एपआईआर के बजाय शुरुआती जांच होनी चाहिए. राजू ने बेंच को बताया कि एक मैजिस्ट्रियल जांच चल रही है और पांच डॉक्टरों की टीम, जिन्होंने ऑटोप्सी की, को कोई चोट नहीं मिली.

उस आदमी के बेटे की तरफ से सीनियर वकील आई. एच. सैयद ने दलील दी कि उनके मुवक्किल के पिता की मौत 100 एंटी-डायबिटीज गोलियां खाने की वजह से हुई थी और उन्होंने मरने से पहले दिए गए बयान पर भरोसा किया. सैयद ने आरोप लगाया कि पुलिस इस मामले में आरोपियों को बचा रही है, और मृतक के बेटे को भी धमकाया जा रहा है.

राजू ने दलील दी कि मृतक ने 100 गोलियां ली थीं या नहीं, यह अभी भी सवाल के घेरे में है क्योंकि विसरा रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है. सैयद ने मृतक के शरीर की पसली के फ्रैक्चर की ओर इशारा किया और दलील दी कि अगर शुरुआती जांच करनी है, तो यह किसी स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए जो राज्य के नियंत्रण में न हो. उन्होंने कहा कि, इसकी जांच सीबीआई से करवाई जाए और उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में एक स्वतंत्रण राय लेने दी जाए.

बेंच ने कहा, "सबसे ज्यादा मजबूती देने वाला मरने से पहले दिया गया बयान है. यह एक हमला है…" बयान सुनने के बाद, बेंच ने कहा कि वह संतुष्ट है कि इस चरण पर किसी भी संदिग्ध का नाम लिए बिना एफआईआर दर्ज करने का पहली नजर में मामला बनता है.

बेंच ने कहा, “एफआईआर की जांच एक SIT करेगी… जिसमें डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक का एक पुलिस ऑफिसर और गुजरात के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस द्वारा नियुक्त किए गए दो और ऑफिसर होंगे. बेंच ने कहा कि एसआईटी को जांच के बाद जल्द से जल्द और बेहतर होगा कि 3 महीने के अंदर क्षेत्राधिकार मजिस्ट्रेट के सामने अंतिम रिपोर्ट दाखिल करनी चाहिए.

बेंच ने साफ किया कि अगर पिटीशनर खुश नहीं है तो वह मजिस्ट्रेट के सामने प्रोटेस्ट पिटीशन फाइल करने और आगे की जांच वगैरह की मांग करने के लिए आज़ाद है। बेंच ने कहा कि, एफआईआर अप्राकृतिक मृत्यु के संदर्भ में होनी चाहिए.

वकील वरिंदर कुमार शर्मा के जरिए फाइल की गई याचिका के मुताबिक, जहीरुद्दीन शेख को 18 मई को वेजलपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया था. कहा जाता है कि कस्टडी में उसके साथ गंभीर मारपीट की गई.

ये भी पढ़ें: हैदराबाद: इंडिगो की महिला कर्मचारी से कैब ड्राइवर ने किया दुष्कर्म का प्रयास, गिरफ्तार

Powered by Nyaya 247 News

संबंधित ख़बरें

इसी विषय की और ख़बरें →
वाहन का घटना से होना मुआवजे का आधार नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अपराध

वाहन का घटना से होना मुआवजे का आधार नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

हाई कोर्ट ने रद की आपराधिक शिकायत, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं
अपराध

हाई कोर्ट ने रद की आपराधिक शिकायत, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं

हाईकोर्ट ने निजी धन विवाद में आपराधिक कानून के दुरुपयोग की निंदा की
अपराध

हाईकोर्ट ने निजी धन विवाद में आपराधिक कानून के दुरुपयोग की निंदा की

कानूनी जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को सुरक्षा और अधिकारों की दी गई जानकारी
अपराध

कानूनी जागरूकता कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को सुरक्षा और अधिकारों की दी गई जानकारी

गंगा के किनारे अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार सरकार को छह सप्ताह में हटाने का आदेश
अपराध

गंगा के किनारे अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बिहार सरकार को छह सप्ताह में हटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन
अपराध

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का किया समर्थन

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमती जताई
अपराध

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमती जताई

दिल्ली में छात्र आंदोलन: 'कॉकरोच' पार्टी के नाम से विरोध
अपराध

दिल्ली में छात्र आंदोलन: 'कॉकरोच' पार्टी के नाम से विरोध

ताज़ा ख़बरें