देश की अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित, सुप्रीम कोर्ट में अटके 96 हजार से अधिक केस
देश की अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनमें सुप्रीम कोर्ट में 96 हजार से अधिक केस अटके हुए हैं। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में बताया कि अदालतों में मुकदमों के निपटारे की समस्या गंभीर है।

सौजन्य से:- Jagran
देश की अदालतों में पांच करोड़ से ज्यादा मामले लंबित, सुप्रीम कोर्ट में अटके 96 हजार से अधिक केस
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में बताया कि देशभर की अदालतों में 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें अकेले सुप्रीम कोर्ट में 96 हजा ...और पढ़ें
HighLights
- देशभर में 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं।
- सुप्रीम कोर्ट में 96 हजार से ज्यादा केस लंबित।
- सुंदरबन में बाघों के हमलों से 32 लोगों की मौत।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देशभर की अदालतों में मुकदमों के लंबित रहने की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि शीर्ष अदालत, 25 उच्च न्यायालयों और जिला व अधीनस्थ अदालतों को मिलाकर कुल 5.64 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं।
राष्ट्रीय न्यायिक डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के आंकड़ों के अनुसार, अकेले सुप्रीम कोर्ट में 96 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 10 हजार से अधिक केस बीते एक दशक से अधिक समय से फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
अदालतों में कई मामले लंबित
सुप्रीम कोर्ट में 558 मामले 20 साल से और 26 मामले 30 साल से अधिक समय से लंबित हैं। वहीं, विभिन्न उच्च न्यायालयों में 80,660 मामले 30 से अधिक वर्षों से अटके हुए हैं।
कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि मामलों का निपटारा पूरी तरह से न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें देरी के लिए तथ्यों की जटिलता, साक्ष्यों की प्रकृति और हितधारकों का सहयोग जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।
जजों की रिक्ति पर उच्च न्यायालयों की शिथिलता
सरकार ने संसद में उच्च न्यायालयों द्वारा जजों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया पर चिंता जताई। कानून मंत्री ने कहा कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के तहत किसी भी पद के खाली होने से कम से कम छह महीने पहले सिफारिशें भेजना अनिवार्य है। हालांकि, उच्च न्यायालय इस समय सीमा का पालन 'शायद ही कभी' करते हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया और सामूहिक जिम्मेदारी
उच्च न्यायपालिका में जजों के रिक्त पदों को भरना कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक सतत, एकीकृत और सहयोगात्मक प्रक्रिया है। मेमोरेंडम आफ प्रोसीजर वह मार्गदर्शक दस्तावेज है जो जजों की नियुक्ति और पदोन्नति को संचालित करता है।
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सरकार के अनुसार, समय पर सिफारिशें न मिलने से उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की कमी बनी रहती है, जिससे मुकदमों के निपटारे की गति प्रभावित होती है।
सुंदरबन में बीते पांच वर्षों में बाघों के हमलों से 32 लोगों की मौत
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, सुंदरबन टाइगर रिजर्व में पिछले पांच वर्षों में बाघों के हमलों के कारण 32 लोगों की मौत हुई है।
पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में यह आंकड़ा साझा किया। ये घटनाएं सझनेखाली, बशीरहाट, और नेशनल पार्क जैसे क्षेत्रों में हुईं।
वर्ष 2021 से 2026 तक मौतों का ब्यौरा (क्रमश: 2021 में चार, 2022 में 11, 2023 में दो, 2024 में छह, 2025 में पांच, 2026 में चार) दिया गया। इस अवधि में मुआवजा राशि के 132 दावों में से 22 को मंजूरी मिली है।
स्टेशन पर कोच की स्थिति जानने के कई माध्यम
जद (यू) सांसद कौशलेंद्र कुमार ने बिहार शरीफ और राजगीर जैसे स्टेशनों पर डिस्प्ले सिस्टम न होने से बुजुर्गों व मरीजों को हो रही परेशानी का मुद्दा उठाया।
लोकसभा में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्लेटफार्म पर ट्रेन की स्थिति, कोच पोजीशन और समय की जानकारी 'रेल-वन' जैसे मोबाइल एप, इंडिकेटर बोर्ड, साइन बोर्ड और पब्लिक एड्रेस सिस्टम के जरिये उपलब्ध कराई जा रही है।
साथ ही, सरकार ने टीबीईए एनर्जी इंडिया और नानजिंग इलेक्ट्रिक इंडिया सहित पड़ोसी देशों से जुड़ी चार कंपनियों को 24 जून 2026 से दो साल के लिए बिजली परियोजनाओं की निविदाओं में भाग लेने की अनुमति दी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीपद नाइक के अनुसार, इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' को बढ़ावा मिलेगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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