बिहार में मनचलों की निरन्तर दबंगई: कानून का डर क्यों नहीं?
जमुई, समस्तीपुर और मधेपुरा जैसे जिलों में नाबालिग लड़कियों के साथ छेड़छाड़ और वीडियो वायरल होने की कई घटनाएँ हुईं, जिससे राज्य की कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। पुलिस की प्रतिक्रिया में देरी, सामाजिक पितृसत्तात्मक सोच और अपराधियों द्वारा वीडियो बनाकर शोकजना की प्रवृत्ति ने इन हेरफेरों को रोका नहीं, जिससे मनचलों को कानूनी डर नहीं लगता।

सौजन्य से:- ABP News
Explained: आखिर क्यों बिहार में मनचलों को कानून का खौफ नहीं, जानिए
बिहार के जमुई, समस्तीपुर और मधेपुरा जैसे जिलों से सामने आ रही छेड़छाड़, उत्पीड़न और वायरल वीडियो की घटनाओं ने राज्य में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बिहार के जमुई, समस्तीपुर और मधेपुरा जैसे जिलों से सामने आ रही छेड़छाड़, उत्पीड़न और वायरल वीडियो की घटनाओं ने राज्य में कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बिहार में एक के बाद एक कई छेड़छाड़ की घटनाओं ने न सिर्फ राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज की विकृत होती मानसिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगाया है. पहले जमुई, फिर समस्तीपुर और अब मधेपुरा में मनचलों ने शर्मनाक घटनाओं को अंजाम दिया. आइए, पहले एक-एक कर इन हालिया घटनाओं के बारे में जानते हैं और फिर इस सवाल का जवाब तलाश करेंगे कि आखिर मनचलों को बिहार में कानून का खौफ क्यों नहीं है.
हालिया घटनाओं का विवरण
जमुई कांड: 19 सितंबर को जमुई में 10वीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा अपने दोस्त के साथ कोचिंग से लौट रही थी. मढ़वा पहाड़ के पास मनचलों के एक गिरोह ने उन्हें घेर लिया और सरेराह बदसलूकी व मारपीट की. अपराधियों ने पीड़िता को प्रताड़ित करते हुए वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. मामला बढ़ने और एसआईटी (SIT) के गठन के बाद मुख्य आरोपी नंदन यादव समेत अन्य अभियुक्तों पर पुलिस कार्रवाई की गई.
समस्तीपुर की घटना: जमुई की घटना के तुरंत बाद समस्तीपुर के कर्पूरीग्राम (दाम बायपास रोड) से एक और हैरान करने वाला वीडियो सामने आया. यहां घूमने गई एक लड़की को स्थानीय युवकों ने सरेआम घेर लिया. दबंगों ने उसका हाथ मरोड़ा, गाली-गलौज की और खुलेआम छेड़खानी की. इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 4-5 आरोपियों को हिरासत में लिया.
मधेपुरा और अन्य ग्रामीण इलाके: मधेपुरा सहित राज्य के कई छोटे कस्बों और ग्रामीण इलाकों से भी ऐसी शिकायतें लगातार आ रही हैं. यहां स्कूल और कोचिंग आने-जाने वाली छात्राओं के साथ राह चलते छींटाकशी की जाती है. इतना ही नहीं, मनचले 'मोरल पुलिसिंग' के नाम पर छात्राओं को डराने-धमकाने और उन पर रोब जमाने का काम कर रहे हैं.
आखिर क्यों बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं?
'प्रतिक्रियात्मक' पुलिसिंग और सूचना तंत्र की विफलता: इन घटनाओं में सबसे बड़ा पैटर्न यह सामने आया है कि अपराध होने के तुरंत बाद पुलिस को भनक तक नहीं लगती. जब मनचले खुद वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं, तब जाकर पुलिस हरकत में आती है. पुलिस गश्त की कमी और स्थानीय खुफिया तंत्र का निष्क्रिय होना अपराधियों को बेखौफ बनाता है.
'मोरल पुलिसिंग' और पितृसत्तात्मक मानसिकता: समाज के एक वर्ग में यह विकृत मानसिकता घर कर गई है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर घूम रही किसी लड़की से पूछताछ करने, उसकी वेशभूषा या साथी पर सवाल उठाने और उसे नियंत्रित करने के हकदार हैं. जब इस मानसिकता को स्थानीय स्तर पर तुरंत नहीं रोका जाता, तो यह भीड़तंत्र का रूप ले लेती है.
वीडियो बनाकर वायरल करने की आपराधिक सनक: आधुनिक दौर में अपराधी केवल अपराध करके भागते नहीं हैं, बल्कि पीड़ित को नीचा दिखाने और अपनी दबंगई साबित करने के लिए घटना का वीडियो रिकॉर्ड करते हैं. उन्हें यह भ्रम रहता है कि स्थानीय प्रभाव या पीड़ित के लोक-लाज के डर से उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं होगी.
स्पीडी ट्रायल और सजा दर में देरी: हालांकि पुलिस वायरल वीडियो के बाद तुरंत गिरफ्तारियां करती है, लेकिन निचले स्तर पर मामलों की लंबी सुनवाई और कठोर सजा में देरी के कारण अपराधियों के मन में कानून का वह खौफ पैदा नहीं हो पाता जो किसी नए अपराध को रोक सके.
क्यों मनचलों के हौसले हैं बुलंद? क्या कहते हैं शिक्षक
मनचलों में कानून का कोई डर नहीं दिख रहा है. राज्य में इनके हौसले इतने बुलंद क्यों हैं, इस पर मधुबनी के एक स्थानीय स्कूल के शिक्षक रोहन कुमार झा का कहना है कि केवल घटना के बाद बयानबाजी या पुलिस के मामूली एक्शन से स्थिति नहीं बदलेगी. इसके लिए जमीनी स्तर पर सख्त कदम उठाने होंगे. कानून का भय जब तक नहीं होगा तब तक ऐसा चलता रहेगा.
उन्होंने आगे सुझाव दिया, "जमुई जैसे मामलों में पॉक्सो और BNS की सख्त धाराओं के तहत तेजी से सुनवाई कर अपराधियों को तुरंत सजा दी जानी चाहिए. इसके साथ ही जिस इलाके में पुलिस पेट्रोलिंग में लापरवाही पाई जाए, वहां के बीट-इंचार्ज और गश्ती दल पर सीधी गाज गिरनी चाहिए."
वहीं दरभंगा में अपना कोचिंग सेंटर चलाने वाले शिक्षक प्रमोद मिश्रा ने कहा, "ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हर स्कूल-कॉलेज और कोचिंग संस्थान में सुरक्षा ऑडिट हो. शिकायत पेटी व गुप्त शिकायत तंत्र को तुरंत सक्रिय किया जाना चाहिए. इसके अलावा स्कूल, ट्यूशन सेंटरों और कोचिंग हब के आसपास महिला पुलिस बल की तैनाती लगातार बढ़ाई जाए. जब तक कानून का डर केवल किताबों में नहीं, बल्कि सड़कों पर दिखाई नहीं देगा, तब तक बिहार की बेटियां खुले आसमान में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पाएंगी."
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