सुप्रीम कोर्ट ने दानम नागेंद्र की विधायकी पर हाईकोर्ट के अयोग्यता आदेश को बरकरार रखा
तेलंगाना हाईकोर्ट ने दानम नागेंद्र को दल‑बदल के कारण विधानसभा सदस्यता से अयोग्य ठहराया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने चुनौती नहीं दी। अदालत ने यह सवाल उठाया कि मूल पार्टी में लौटने से उनका विधायकीय पद पुनः मिल सकता है, पर अयोग्यता का निर्णय अलग संवैधानिक प्रक्रिया का है।

सौजन्य से:- AajTak
Advertisement
तेलंगाना के खैरताबाद विधायक दानम नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता का मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली.सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें नागेंद्र को दल-बदल के मामले में विधानसभा सदस्यता के लिए अयोग्य ठहराया गया था.
हाईकोर्ट ने 18 सितंबर को विधानसभा स्पीकर के फैसले को पलटते हुए नागेंद्र को अयोग्य घोषित किया था. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. दानम नागेंद्र 2023 में BRS के टिकट पर खैरताबाद से विधायक चुने गए थे.
Advertisement
मार्च 2024 में वह कांग्रेस में शामिल हो गए. खास बात यह रही कि विधानसभा सदस्य रहते हुए उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद सीट से लड़ा.इसी आधार पर उनके खिलाफ दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई थी.
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा था कि वह 23 अप्रैल 2024 से विधानसभा सदस्य के रूप में अयोग्य माने जाएंगे और खैरताबाद सीट खाली घोषित कर दी थी. यह मामला BRS विधायक पी. कौशिक रेड्डी और बीजेपी विधायक एलेटी महेश्वर रेड्डी की याचिकाओं के बाद हाईकोर्ट पहुंचा था.
‘पार्टी में लौटना’ क्या अयोग्यता खत्म कर देता है?
सुप्रीम कोर्ट में नागेंद्र की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि संविधान की 10वीं अनुसूची किसी सदस्य के अपनी मूल पार्टी में लौटने की स्थिति को मान्यता देती है. उन्होंने कहा कि पार्टी सदस्य की कार्रवाई को माफ कर सकती है और नागेंद्र ने अपनी मूल पार्टी छोड़ी भी नहीं है.
Advertisement
इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि पार्टी में वापस लौटने से क्या सदन में वापस आने का अधिकार भी मिल जाता है? सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस पूरे घटनाक्रम के असर पर सवाल किया. कोर्ट की टिप्पणी का सार यह था कि पार्टी किसी सदस्य के प्रति नरम रुख अपना सकती है, लेकिन अयोग्यता का फैसला अलग संवैधानिक प्रक्रिया का विषय है.
यह भी पढ़ें: विधायकी जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे दानम नागेंद्र, तेलंगाना HC के आदेश पर रोक की मांग
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के बाद नागेंद्र की विधानसभा सदस्यता पर हाईकोर्ट का फैसला कायम है. इस मामले ने एक बार फिर दल-बदल कानून और विधायकों के पार्टी बदलने के बाद उनकी सदस्यता को लेकर उठने वाले संवैधानिक सवालों को सामने ला दिया है.
नागेंद्र 2024 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ चुके थे, जबकि उस समय वह BRS के विधायक थे. अब सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता का विवाद एक नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है.
---- समाप्त ----
TOPICS:
Read more!
Advertisement
Latest News in Hindi »
Powered by Nyaya 247 News
संबंधित ख़बरें
इसी विषय की और ख़बरें →
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को तृणमूल कांग्रेस के नाम‑चिह्न विवाद पर समयसीमा देने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई से टिमको नाम‑सिम्बल विवाद के निपटान की वास्तविक समयसीमा बताने को कहा

कैलकत्ता हाई कोर्ट ने ISF के 'एनवेलप' प्रतीक को टीएमसी-डेमोक्रेटिक को सौंपने पर सवाल किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: बीसीआई कानूनी शिक्षा के मानक तय करने की विशेषज्ञ संस्था नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने डैनाम नागेंद्र की अपील को खारिज किया, दावे के तहत उनके पद से बर्खास्तगी को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दानम नागेंद्र की विधायकी को नहीं बदला, हाईकोर्ट का अयोग्यता आदेश कायम

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से ट्रिनामूल कांग्रेस के नाम व प्रतीक विवाद पर शीघ्र निर्णय का आग्रह किया

सुप्रीम कोर्ट ने ईसीआई से ट्रिनामूल पार्टी के प्रतीक विवाद के निर्णय के लिए त्वरित समय‑सीमा निर्धारित करने को कहा
ताज़ा ख़बरें
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा: स्पीकर को निर्देश नहीं, पर TMC के 20 विद्रोही MPs की बर्खास्तगी पर शीघ्र फैसला चाहिए
- सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के जिलाधिकारी मेधा रूपम पर लगाई गई रासुका जुर्माने पर रोक लगाई
- कर्नाटक हाई कोर्ट ने नाइजीरियाई छात्र की ‘लीव इंडिया’ आदेश की चुनौती खारिज, वीज़ा विस्तार राज्य के विवेक में
- सुप्रीम कोर्ट ने पुश्तैनी कृषि जमीन के बंटवारे पर धारा 22 को लागू कर दिया
- कांग्रेस ने भाजपा प्रत्याशी हसरानी राठ की आयु‑शैक्षणिक विवरण में असंगति को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट में दायर किया याचिका
- सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के छात्रा की NSA हिरासत रद्द करने वाले आदेश पर तत्काल रोक लगाई
- SFI ने इंस्टाग्राम खाते की स्थायी बंदी के विरुद्ध दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की
- सुप्रीम कोर्ट ने मां को बच्चों को यूके ले जाने की मंजूरी, करियर के अधिकार को मान्यता

