संसदीय बहस में CEC विधेयक पर विपक्ष की अनुपस्थिति, केवल ओवैसी ने किया एकल विरोध
जब मुख्य चुनाव आयुक्त चयन विधेयक पर चर्चा चल रही थी, तब अधिकांश विपक्षी सांसदों को निलंबन के कारण सदन से बाहर कर दिया गया, जिससे AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी ही एकमात्र विरोधी आवाज़ बनकर उभरे। राहुल गांधी सहित कई नेता सुरक्षा चूक और निलंबनों पर ध्यान केंद्रित कर इस बिल में अपनी आपत्ति दर्ज नहीं कर सके, जबकि प्रस्तावित बदलाव ने चयन समिति में सरकार का बहुमत बढ़ा दिया, जिससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठे।

सौजन्य से:- Hindustan
जब संसद में बन रहा था CEC चुनने वाला कानून तब कहां था विपक्ष? सिर्फ ओवैसी ने किया विरोध
विपक्षी बेंच लगभग पूरी तरह खाली थी। महज 1 घंटे 40 मिनट चली बहस में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ही एकमात्र विपक्षी सांसद थे जिन्होंने इस बिल के खिलाफ सदन में अपनी बात रखी।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग एक बार फिर विपक्ष के निशाने पर हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के बावजूद कई बड़े फैसले लिए गए। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पूरा विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करने लगा है। इतना ही नहीं मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने वाली प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब संसद में चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया बदलने वाला विधेयक पारित हो रहा था तब सदन में मुख्य विपक्षी दल के अधिकांश सांसद गायब थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। रिपोर्ट में आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना आयोग के नाम पर निर्णय लिए गए। राहुल गांधी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे वोट चोरी और संविधान पर हमला करार दिया। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्था में अलग-अलग विचार होना निर्णय प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है।
2023 के कानून पर क्यों है विवाद?
चुनाव आयुक्तों के चयन का विवाद दिसंबर 2023 में बने कानून से जुड़ा हुए है। सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने मार्च 2023 में एक फैसला दिया था कि जब तक संसद कानून नहीं बनाती तब तक CEC और चुनाव आयुक्तों का चयन प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की एक समिति करेगी। इसके बाद केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त विधेयक, 2023 लेकर आई। इसमें CJI को चयन समिति से हटाकर उनकी जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया गया। इस बदलाव से चयन समिति में सरकार का बहुमत (2-1) हो गया, जिसको लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठा रहा है।
सदन से क्यों गायब था विपक्ष?
सवाल यह उठता है कि यदि विपक्ष इस कानून के इतने खिलाफ था तो 21 दिसंबर 2023 को लोकसभा में इसका कड़ा विरोध क्यों नहीं दिखा? 13 दिसंबर 2023 को लोकसभा में हुई सुरक्षा चूक के बाद विपक्ष गृह मंत्री के बयान और चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ था। हंगामे के चलते सांसदों का बड़े पैमाने पर निलंबन शुरू हुआ। जिस दिन लोकसभा में यह बिल लाया गया, उसी दिन तक लोकसभा के 100 विपक्षी सांसदों को निलंबित किया जा चुका था। दोनों सदनों को मिलाकर कुल 146 सांसद निलंबित थे।
सिर्फ ओवैसी का भाषण
विपक्षी बेंच लगभग पूरी तरह खाली थी। महज 1 घंटे 40 मिनट चली बहस में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ही एकमात्र विपक्षी सांसद थे जिन्होंने इस बिल के खिलाफ सदन में अपनी बात रखी।
राहुल गांधी क्यों नहीं दर्ज करा सके विरोध?
राहुल गांधी उस समय निलंबित नहीं थे और सदन में मौजूद भी थे। लेकिन उस दौरान पूरे विपक्ष का ध्यान सुरक्षा में चूक और अपने साथी सांसदों के निलंबन के विरोध पर केंद्रित था। भारी हंगामे के कारण राहुल गांधी इस बिल पर बहस में हिस्सा नहीं ले सके और अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा पाए।
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