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दुनिया की पहली डिजिटल अदालत बनी ई-जागृति, उपभोक्ताओं के लिए आसान और तेज न्याय

ई-जागृति प्लेटफ़ॉर्म ने उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे को डिजिटल बना दिया है। अब उपभोक्ता घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं, अपने मामले की हर गतिविधि रियल टाइम में देख सकते हैं और वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में शामिल हो सकते हैं।

2 जुलाई 2026 को 04:25 pm बजे
दुनिया की पहली डिजिटल अदालत बनी ई-जागृति, उपभोक्ताओं के लिए आसान और तेज न्याय

सौजन्य से:- Jagran

ऑनलाइन शिकायत, रियल टाइम अपडेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से निपटारा: डिजिटल अदालत बनी e-Jagriti

ई-जागृति प्लेटफॉर्म ने उपभोक्ता शिकायतों के निपटारे को डिजिटल और आसान बना दिया है, जिससे घर बैठे ऑनलाइन शिकायत, रियल टाइम अपडेट और वीडियो कॉन्फ्रेंसिं ...और पढ़ें

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जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उपभोक्ता आयोगों में न्याय पाने की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने वाली ई-जागृति ने शिकायतों के निपटारे का तरीका बदल दिया है। अब उपभोक्ता घर बैठे ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अपने मामले की हर गतिविधि रियल टाइम में देख सकते हैं। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई में शामिल हो सकते हैं।

आदेश की प्रति भी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह ई-जागृति उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल अदालत बन चुकी है। इस बदलाव के लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग की इस पहल को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार-2026 में रजत पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार गुरुवार को जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में दिया गया, जिसे उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने प्राप्त किया।

2.29 लाख से अधिक मामलों में 90.75% का निपटारा

एक जनवरी, 2025 से प्रभावी इस प्लेटफार्म ने उपभोक्ता आयोगों की चार अलग-अलग डिजिटल प्रणालियों को एकीकृत कर एआइ-सक्षम और पूरी तरह पेपरलेस व्यवस्था में बदल दिया है। इसके जरिये शिकायत दर्ज करने से लेकर दस्तावेज अपलोड करने, नोटिस जारी करने, सुनवाई, मामले की निगरानी और अंतिम आदेश तक की पूरी प्रक्रिया एक ही प्लेटफार्म पर पूरी होती है।

अब तक इस प्लेटफार्म पर 2.29 लाख से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें 2.07 लाख से अधिक का निपटारा किया जा चुका है। इस तरह 90.75 प्रतिशत मामले निपटा दिए गए हैं। चालू वित्त वर्ष में समाधान देने की दर बढ़कर 92.30 प्रतिशत पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 89.47 प्रतिशत थी। उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश एवं पंजाब ने 100 प्रतिशत समाधान प्राप्त किया है।

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ई-जागृति की सबसे बड़ी सहूलियत है कि उपभोक्ताओं को हर सुनवाई के लिए आयोग के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। विदेश में रहकर भी आनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं और वर्चुअल सुनवाई में शामिल होकर न्याय प्राप्त कर सकते हैं। अब तक इस प्लेटफार्म के माध्यम से 61 अनिवासी भारतीय भी बिना भारत आए अपने मामलों का निपटारा करा चुके हैं।

राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार-2026 में रजत पुरस्कार से सम्मानित

डिजिटल व्यवस्था का असर वर्चुअल सुनवाई में भी दिखाई दे रहा है। वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये निपटाए गए मामलों की संख्या 14,494 से बढ़कर इस वर्ष 30,683 हो गई है। इसी तरह कुल वर्चुअल सुनवाई 24,181 से बढ़कर 87,083 तक पहुंच गई। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) की सभी पीठों और 35 राज्य आयोगों में हाइब्रिड वीडियो कान्फ्रेंसिंग व्यवस्था लागू होने से यह प्रक्रिया और मजबूत हुई है।

निधि खरे ने बताया कि ई-जागृति का उद्देश्य तकनीक के जरिये उपभोक्ताओं को तेज, सरल और भरोसेमंद न्याय उपलब्ध कराना है। यह पहल विकसित भारत के उस लक्ष्य के अनुरूप है, जिसमें सरकारी सेवाओं और न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और नागरिक-केंद्रित बनाया जा रहा है।

आम लोगों की खातिर आसान बनाने के लिए प्लेटफार्म में कई सुविधाएं जोड़ी गई हैं। इनमें ओटीपी आधारित पंजीकरण, बहुभाषी इंटरफेस, एआइ और मशीन लर्निंग सेवाएं, एआइ चैटबाट, वाइस-टू-टेक्स्ट सुविधा, आनलाइन भुगतान, एसएमएस और ई-मेल अलर्ट, दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधा के साथ वकीलों और आयोग के अधिकारियों के लिए अलग-अलग डिजिटल डैशबोर्ड हैं।

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