सुप्रीम कोर्ट हंगामे के आरोपी दो लॉ छात्रों को दिल्ली कोर्ट से मिली जमानत
पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो लॉ स्टूडेंट्स को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था एक व्यक्ति के आचरण से कमजोर नहीं होती। आरोपियों पर गाली-गलौज, सुरक्षाकर्मी पर हमला और कार्यवाही बाधित करने के आरोप थे।

सौजन्य से:- Amar Ujala
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Delhi NCR News: सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले दो लॉ स्टूडेंट्स को दिल्ली कोर्ट ने जमानत दी
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- अदालत ने कहा, सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था एक व्यक्ति के आचरण से कमजोर नहीं होती
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कथित रूप से गाली-गलौज करने, सुरक्षाकर्मी पर हमला करने और कार्यवाही बाधित करने के आरोप में गिरफ्तार दो लॉ स्टूडेंट्स को जमानत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्था किसी एक उत्तेजित वादी के अशिष्ट व्यवहार से कमजोर नहीं होती। न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने 27 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि ऐसे आचरण को किसी भी रूप में माफ नहीं किया जा सकता और इसकी कड़ी निंदा की जाती है। अदालत प्रबल प्रताप सिंह (24) और चंद्र भान (23) की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। प्रबल प्रताप लखनऊ विश्वविद्यालय के तीसरे वर्ष के छात्र हैं और इटावा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। चंद्र भान रायबरेली जिले के दूसरे वर्ष के लॉ स्टूडेंट हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 में विशेष अनुमति याचिका (सिविल) प्रबल प्रताप एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की सुनवाई के दौरान हुई। प्रबल प्रताप स्वयं वादी के रूप में पेश हुए थे। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने अशिष्ट और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, कोर्ट रूम में कागजात फेंके, हंगामा किया और सुरक्षाकर्मियों पर आपराधिक बल का प्रयोग किया।
अदालत ने आदेश में कहा कि ये आरोप देश की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत की गरिमा और मर्यादा को प्रभावित करने वाले हैं। कोई भी वादी, चाहे वह कितना भी व्यथित हो या बिना वकील के हो, खुले कोर्ट में कागजात फेंकने या पीठासीन अधिकारी व मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रखता। मजिस्ट्रेट ने कहा कि यदि ऐसे आचरण पर चुप्पी साध ली जाए तो इसे मौन स्वीकृति माना जा सकता है। इसलिए स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसा व्यवहार माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि आरोपी भविष्य में किसी भी अदालत में संयम और मर्यादा बनाए रखेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान कथित रूप से गाली-गलौज करने, सुरक्षाकर्मी पर हमला करने और कार्यवाही बाधित करने के आरोप में गिरफ्तार दो लॉ स्टूडेंट्स को जमानत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट जैसी प्रतिष्ठित संस्था किसी एक उत्तेजित वादी के अशिष्ट व्यवहार से कमजोर नहीं होती। न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि ने 27 जुलाई को पारित आदेश में कहा कि ऐसे आचरण को किसी भी रूप में माफ नहीं किया जा सकता और इसकी कड़ी निंदा की जाती है। अदालत प्रबल प्रताप सिंह (24) और चंद्र भान (23) की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। प्रबल प्रताप लखनऊ विश्वविद्यालय के तीसरे वर्ष के छात्र हैं और इटावा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। चंद्र भान रायबरेली जिले के दूसरे वर्ष के लॉ स्टूडेंट हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 में विशेष अनुमति याचिका (सिविल) प्रबल प्रताप एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य की सुनवाई के दौरान हुई। प्रबल प्रताप स्वयं वादी के रूप में पेश हुए थे। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने अशिष्ट और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया, कोर्ट रूम में कागजात फेंके, हंगामा किया और सुरक्षाकर्मियों पर आपराधिक बल का प्रयोग किया।
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अदालत ने आदेश में कहा कि ये आरोप देश की सर्वोच्च संवैधानिक अदालत की गरिमा और मर्यादा को प्रभावित करने वाले हैं। कोई भी वादी, चाहे वह कितना भी व्यथित हो या बिना वकील के हो, खुले कोर्ट में कागजात फेंकने या पीठासीन अधिकारी व मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय के प्रति अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं रखता। मजिस्ट्रेट ने कहा कि यदि ऐसे आचरण पर चुप्पी साध ली जाए तो इसे मौन स्वीकृति माना जा सकता है। इसलिए स्पष्ट करना जरूरी है कि ऐसा व्यवहार माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि आरोपी भविष्य में किसी भी अदालत में संयम और मर्यादा बनाए रखेंगे।
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