सुप्रीम कोर्ट में कथित अभद्रता के आरोप में गिरफ्तार लॉ स्टूडेंट्स को मिली जमानत, अदालत ने कहा जमानत नियम है जेल अपवाद
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने लॉ स्टूडेंट प्रबल प्रताप सिंह यादव और चंद्रभान को जमानत पर रिहा कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में उनकी कथित तौर पर कथित अभद्र भाषा और मारपीट के आरोप लगे थे। अदालत ने कहा कि उनके ऐसे आचरण से सुप्रीम कोर्ट का कद कम नहीं होता, लेकिन छात्रों का यह आचरण भी बेहद निंदनीय है।

सौजन्य से:- AajTak
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दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने लॉ के छात्र-प्रबल प्रताप सिंह यादव और चंद्रभान को पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है, जिन्हें बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाही के दौरान कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, सुरक्षा कर्मी से मारपीट करने और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
पटियाला हाउस कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट रवि की अदालत ने उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी प्रबल प्रताप सिंह यादव और रायबरेली निवासी 23 वर्षीय चंद्रभान को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया. ये घटना 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम 13 में एसएलपी सुनवाई के दौरान हुई थी. दिल्ली पुलिस ने 13 जुलाई को दोनों को गिरफ्तार किया था.
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जमानत पर कोर्ट का तर्क
अदालत ने आदेश देते हुए कहा कि किसी के असंयमित आचरण और अभद्र भाषा से सुप्रीम कोर्ट का कद कम नहीं होता है, इसलिए अधीनस्थ अदालतों को भी संयम का परिचय देना चाहिए. हालांकि, कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया कि छात्रों का इस तरह का आचरण बेहद निंदनीय और पूरी तरह से अस्वीकार्य है.
अदालत ने 'जमानत नियम है और जेल अपवाद' के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि अपराध इतना जघन्य नहीं है कि छात्रों को बिना ट्रायल लंबे वक्त तक जेल में रखा जाए. जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है और दोनों के समाज में गहरे संबंध होने से उनके भागने या सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा नहीं है.
10 जुलाई को हुई थी घटना
दरअसल, लखनऊ विश्वविद्यालय में लॉ सेकंड ईयर के छात्र प्रबल प्रताप यादव 10 जुलाई को कोर्ट रूम 13 में याचिकाकर्ता के रूप में पेश हुए थे. सुनवाई के दौरान उन्होंने जजों के प्रति अमर्यादित शब्द कहे, कागज फेंके और सुरक्षाकर्मी रवींद्र कुमार से धक्का-मुक्की की. इसके बाद तिलक मार्ग थाने में शिकायत के बाद दोनों को 13 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और 15 जुलाई को उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था.
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