मनमोहन सिंह को कोयला घोटाले में राहत: उच्चतम न्यायालय ने CBI क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दी, कहा- करप्शन का कोई सबूत नहीं
अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया। यह मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा था।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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कोयला घोटाला में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर केस बंद:सुप्रीम कोर्ट ने CBI क्लोजर को मंजूरी दी; कहा- क्लीन चिट के बाद फिर जांच शुरू हुई थी
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में चल रहा क्रिमिनल केस बंद कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 साल बाद सीबीआई की 2014 की 2 क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि पूर्व पीएक के खिलाफ करप्शन के कोई ठोस सबूत नहीं हैं।
यह मामला यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान तलाबीरा-2 कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। साल 2015 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने एजेंसी की क्लोजर रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया था।
कोर्ट ने मनमोहन सिंह और अन्य आरोपियों को ट्रायल का सामना करने के लिए तलब किया था। इस आदेश को पूर्व प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। तब से मामला कोर्ट में था। डॉ. सिंह का 26 सितंबर 2024 को 92 साल की उम्र में निधन हो गया था।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को किया खारिज
- पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और एएम सिंघवी ने दलील दी कि सीबीआई ने 27 अगस्त 2014 और 21 अक्टूबर 2014 को ट्रायल कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि, स्पेशल जज ने रिपोर्ट को ठुकरा दिया था।
- 11 मार्च 2015 को पूर्व प्रधानमंत्री को समन जारी कर दिया था। सिब्बल ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने सरकारी मंजूरी का इंतजार किए बिना ही मामला दर्ज कर लिया था।
क्या था पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्पेशल जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को ठुकराने का कोई ठोस कारण नहीं था।
कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को मेरिट के आधार पर बंद कर दिया। यह मामला 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोल ब्लॉक आवंटन में भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा था।
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