सुप्रीम कोर्ट ने गुमनाम शिकायतों को दी कड़ी मार, बिल्डरों पर लगाई फटकार
जजों और वकीलों के खिलाफ लगातार आती गुमनाम शिकायतों पर सर्वोच्च न्यायालय ने CBI को जांच और FIR दर्ज करने का आदेश दिया, यह कहकर कि इन शिकायतों से न्यायपालिका को दबाया नहीं जा सकता। सुनवाई में बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों को सबवेंशन स्कीम के दुरुपयोग के लिए फटकार दी गई और उनके खिलाफ आगे की जांच का इशारा किया गया।

सौजन्य से:- Hindustan
जजों के खिलाफ गुमनाम शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CJI ने बिल्डरों को क्यों लगाई फटकार?
जजों, एमिकस क्यूरी और वकीलों के खिलाफ गुमनाम शिकायतों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों को फटकार लगाई। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों अदालत ने जताई नाराजगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जजों, न्याय मित्रों और वकीलों के खिलाफ लगातार मिल रही गुमनाम शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि इन शिकायतों के पीछे कौन लोग हैं, इसका पता लगाने के लिए CBI जांच कराई जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर शिकायतों के संबंध में FIR दर्ज कर जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती ऐसे वक्त सामने आई है, जब अदालत कई बिल्डरों और रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ सबवेंशन स्कीम के कथित दुरुपयोग, घर खरीदारों को ठगने, प्रोजेक्ट में देरी करने और निवेश की रकम वापस नहीं करने के मामलों की जांच पर नजर रख रही है। कोर्ट ने गुरुवार को इन मामलों की सुनवाई के दौरान गुमनाम शिकायतों को लेकर गंभीर नाराजगी जताई।
‘हम पता लगाएंगे शिकायतें किसने लिखीं’
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बिल्डरों द्वारा सबवेंशन स्कीम के दुरुपयोग से जुड़ी CBI जांच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने रखी।
इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने पूछा कि इन मामलों में बिल्डरों की ओर से कौन-कौन से वकील पेश हो रहे हैं। उन्होंने बिल्डरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि क्या अब वे सुप्रीम कोर्ट को गुमनाम शिकायतें भेजना शुरू कर चुके हैं। CJI ने सख्त लहजे में कहा कि अदालत को इस तरह की शिकायतों से डराया या दबाव में नहीं लाया जा सकता।
अगली सुनवाई पर शिकायतों का दूसरा सेट देने की बात
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि अगली सुनवाई की तारीख पर उन्हें गुमनाम शिकायतों का एक और सेट दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन शिकायतों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि इन्हें लिखने वाले लोग कौन हैं।
पीठ ने कहा कि उसे लगता है कि इनमें से ज्यादातर शिकायतों के पीछे बिल्डर हो सकते हैं और कुछ ऐसे वकील भी हो सकते हैं, जिन्होंने उन्हें गलत सलाह दी हो। सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि वह ऐसे लोगों को पकड़कर रहेगा। अदालत ने यह भी कहा कि क्या किसी को लगता है कि इस तरह की शिकायतों से वह दबाव में आ जाएगी।
CBI दर्ज करेगी FIR, जांच को अंजाम तक पहुंचाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह CBI को इन शिकायतों के संबंध में FIR दर्ज करने और जांच करने का निर्देश देगा। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। अदालत की यह टिप्पणी उन मामलों की पृष्ठभूमि में आई है, जिनमें बिल्डरों और बैंकों के बीच कथित मिलीभगत के जरिए सबवेंशन समझौतों के दुरुपयोग की जांच चल रही है।
क्या है सबवेंशन स्कीम से जुड़ा मामला?
मामला उन सबवेंशन समझौतों से जुड़ा है, जिनके दुरुपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही CBI जांच का आदेश दे चुका है। आरोपों के मुताबिक, कुछ बिल्डरों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर इन योजनाओं का दुरुपयोग किया।
इसका असर उन घर खरीदारों पर पड़ा, जिन्होंने अपने सपनों का घर खरीदने के लिए निवेश किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कई मामलों में घर खरीदारों को लंबे समय तक इंतजार करने के बावजूद घर मिलने की उम्मीद नहीं थी, जबकि उन्हें अपने लोन की EMI का भुगतान करना पड़ रहा था। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों और बैंकों से जुड़े इन मामलों की जांच को गंभीरता से लिया है।
पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने CBI जांच का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अप्रैल में ही बिल्डरों और बैंकों द्वारा सबवेंशन समझौतों के कथित दुरुपयोग की CBI जांच का आदेश दिया था। पिछली सुनवाई में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया था कि CBI इस मामले में अब तक 50 FIR दर्ज कर चुकी है। इनमें से 18 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। CBI ने इन मामलों में 17 चार्जशीट दाखिल की हैं। इसके अलावा एक मामले में सक्षम अदालत के सामने क्लोजर रिपोर्ट भी दाखिल की गई है।
कई बैंक अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि जांच के दौरान कई बैंक अधिकारियों के बिल्डरों के साथ कथित तौर पर मिलीभगत में शामिल होने की बात सामने आई है। इन बैंक अधिकारियों को CBI की ओर से दाखिल चार्जशीट में आरोपी बनाया गया है। एजेंसी ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधान भी लगाए हैं।
CBI ने कुछ बैंक अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी भी मांगी है।
इनमें शामिल बैंक हैं:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- बैंक ऑफ इंडिया
- यूको बैंक
- एचडीएफसी बैंक
- आईसीआईसीआई बैंक
बैंकों को भी सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत
सुप्रीम कोर्ट पहले ही बैंकों को निर्देश दे चुका है कि वे संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी देने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो संबंधित बैंकों को कोर्ट के सामने इसका कारण बताना पड़ सकता है। इस तरह अदालत ने न सिर्फ बिल्डरों से जुड़े मामलों की जांच को गंभीरता से लिया, बल्कि उन बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच पर जोर दिया, जिन पर बिल्डरों के साथ मिलीभगत के आरोप सामने आए हैं।
इन रियल एस्टेट कंपनियों की भी अलग जांच
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को कुछ रियल एस्टेट कंपनियों और समूहों के खिलाफ लगाए गए गलत जानकारी देने और अन्य अनियमितताओं के आरोपों की भी विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने जिन संस्थाओं का अलग से जिक्र किया, उनमें शामिल हैं:
- Ozone Group - कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु
- Vivansaa - बेंगलुरु
- Rudra Buildwell Pvt Ltd - ग्रेटर नोएडा
- Omaxe Group - चंडीगढ़
सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में CBI से अलग जांच स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी थी।
गुमनाम शिकायतों को लेकर कोर्ट का रुख क्यों अहम?
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट बिल्डरों और बैंकों से जुड़े मामलों में CBI की जांच की निगरानी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जजों, न्याय मित्रों और वकीलों के खिलाफ गुमनाम शिकायतों का सिलसिला सामने आया है।
इसी को लेकर गुरुवार की सुनवाई में पीठ ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह की शिकायतों के जरिए न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने या अदालत को दबाव में लाने की कोशिश को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि वह शिकायतों के पीछे मौजूद लोगों का पता लगाएगा और जरूरत पड़ने पर उनके खिलाफ FIR दर्ज कर जांच को उसके निष्कर्ष तक पहुंचाएगा।
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