उच्च न्यायालय के हल्द्वानी स्थलांतरण को रोकने के लिए वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनरावलोकन याचिका दायर की
उत्ताखंड के न्यायालय को नैनीताल से हल्द्वानी में स्थानांतरित करने के विरोध में अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में पुनःविचार याचिका दायर की और केंद्र को भी ज्ञापन भेजने की योजना बनाई है। वे बताते हैं कि राज्य ने बिना केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बेलबाबा की वन भूमि हाईकोर्ट को देने का प्रस्ताव दिया, जबकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नई हाथी कॉरिडोर की पहचान का निर्देश दिया है।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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हाईकोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ कानूनी लड़ाई जारी:अधिवक्ताओं ने कहा- सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर, केंद्र को भी ज्ञापन देंगे
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उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा है कि इस मुद्दे पर उनकी कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। अधिवक्ताओं ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। साथ ही हाईकोर्ट शिफ्टिंग के प्रस्
बुधवार को हाईकोर्ट परिसर के पास एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। इसमें अधिवक्ता एम.सी. पंत ने बताया कि राज्य सरकार ने 12 अगस्त 2026 को हल्द्वानी के बेलबाबा स्थित वन भूमि को हाईकोर्ट को देने की मंजूरी दी थी। जबकि वन संरक्षण अधिनियम के तहत राज्य सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना ऐसा फैसला नहीं ले सकती। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में बताया था कि बेलबाबा के आसपास कोई हाथी कॉरिडोर नहीं है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नए सिरे से हाथी कॉरिडोर की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि नैनीताल के जिलाधिकारी ने मई 2026 में राज्य सरकार को बेलबाबा हल्द्वानी की वन भूमि हाईकोर्ट को देने का प्रस्ताव दिया था। यह प्रस्ताव गैर-कानूनी है और अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में हाईकोर्ट के अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को एक आवेदन भेजा था। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने 3 सितंबर 2026 को उत्तराखंड सरकार के प्रमुख सचिव (वन एवं पर्यावरण) से कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई करने को कहा है।
हाईकोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता रमन शाह ने बताया कि उनकी याचिका हाईकोर्ट से खारिज हो गई है। उन्होंने कहा कि याचिका खारिज होने से यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में आ गया है और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुल गया है। रमन शाह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई के आदेश के खिलाफ उनकी रिव्यू याचिका पहले से ही विचाराधीन है। अब वे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
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