सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट कॉलेजियम ने जिन नामों की सिफारिश की है उसे चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं है
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई तीन जजों की चुनौती को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि उनके पास हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिश को चुनौती देने का कोई ठोस आधार नहीं है।

सौजन्य से:- Navbharat Times
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिश को चुनौती
- CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में चार सबसे वरिष्ठ जज शामिल हैं। कॉलेजियम ने 2 जून को तीन न्यायिक अधिकारियों चिराग भानु सिंह, भूपेश शर्मा और योगेश जसवाल को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी।
- धर्मशाला में फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज के तौर पर काम कर रहे अरविंद मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
- उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2024 में हाईकोर्ट कॉलेजियम को निर्देश दिया था कि वे एक और ज्यूडिशियल ऑफिसर के साथ उनकी उम्मीदवारी पर फिर से विचार करें, लेकिन कॉलेजियम ने उनके बजाय उनसे जूनियर अधिकारियों की सिफारिश कर दी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह सुनवाई बीते 22 जून को की थी।
पीठ ने कहा-पेंडोरा बॉक्स (मुसीबतों का पिटारा)
- बेंच ने आगे कहा कि चूंकि हाईकोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पहले ही मंज़ूरी दे दी थी, इसलिए इस स्टेज पर याचिकाकर्ता की चुनौती का कोई ठोस आधार नहीं बनता। बेंच ने यह भी चेतावनी दी कि न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए गोपनीयता बरतना जरूरी है।
- बेंच ने कहा, 'ये सभी मामले गोपनीयता से जुड़े हैं। उस कॉलेजियम से यह सरकार के पास आता है और एक कॉपी इस कोर्ट के कॉलेजियम के पास आती है... हम इस स्टेज पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के फैसलों की जांच-पड़ताल करके 'पेंडोरा बॉक्स' (मुसीबतों का पिटारा) नहीं खोलना चाहते।'
बेंच बोली-आप चाहें तो हाईकोर्ट जा सकते हैं
- इसके बाद कोर्ट ने अरविंद मल्होत्रा की याचिका का निपटारा कर दिया और उन्हें हाईकोर्ट के सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रशासनिक स्तर पर उचित राहत मांगने या न्यायिक स्तर पर कानूनी उपाय करने की छूट दी।
- बेंच ने अपने आदेश में कहा-याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर इस रिट याचिका पर आगे नहीं बढ़ना चाहता है।
सबसे सीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसर बनाम जूनियर अफसर
- मिस्टर मल्होत्रा की ओर से पेश होते हुए सीनियर एडवोकेट बलबीर सिंह ने जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच के सामने कहा कि उनके क्लाइंट को सितंबर 2025 में बातचीत के लिए बुलाया गया था और कुछ डॉक्यूमेंट्स जमा करने को कहा गया था।
- हालांकि, उन्होंने कहा कि इस साल मई में हाई कोर्ट कॉलेजियम ने प्रमोशन के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को उनसे जूनियर अधिकारियों के नाम भेजे, जबकि उनके क्लाइंट राज्य में सबसे सीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसर हैं।
पीठ बोली-हाईकोर्ट कॉलेजियम ने उम्मीदवारी खारिज नहीं की थी
- हालांकि, बेंच ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई बात नहीं है जिससे पता चले कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने औपचारिक रूप से मिस्टर मल्होत्रा की उम्मीदवारी को खारिज कर दिया था।
- जस्टिस नागरत्ना ने कहा, 'इस स्टेज पर आपकी उम्मीदवारी को खारिज नहीं किया गया है। कृपया कुछ समय इंतजjर करें।' उन्होंने यह भी कहा कि मिस्टर मल्होत्रा की सर्विस में अभी लगभग एक दशक बाकी है और भविष्य में हाईकोर्ट में और भी वैकेंसी आने की संभावना है।
महज सीनियारिटी के आधार पर प्रमोशन नहीं
- सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि महज सीनियारिटी के आधार पर ही प्रमोशन के लिए रिकमेंडेशन का अधिकार नहीं मिल जाता। साथ ही, कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि संवैधानिक अदालतों में नियुक्तियों पर विचार करते समय वह कॉलेजियम के आकलन की समीक्षा नहीं कर सकता।
- सितंबर 2024 में, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट कॉलेजियम के उस फैसले को रद्द कर दिया था जिसमें मिस्टर मल्होत्रा और एक अन्य जिला जज की हाई कोर्ट में पदोन्नति के लिए उम्मीदवारी को नजरअंदाज कर दिया गया था।
- जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने माना था कि प्रभावी परामर्श न होने के कारण यह फैसला दोषपूर्ण था, क्योंकि हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस ने एकतरफा फैसला लेते हुए उनके नामों पर दोबारा विचार न करने का निर्णय लिया था।
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