पंजाब डीजीपी को हाईकोर्ट ने दो टूक दिया, पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल
हाईकोर्ट ने आरोपी की गिरफ्तारी के मामले में पंजाब डीजीपी को निष्पक्ष जांच करने और अदालती आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आरोपी पर जुर्माना लगाकर याचिका खारिज कर दी, जिन पर आपराधिक मामले के आरोप लगे हैं।

सौजन्य से:- Dainik Bhaskar
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सुप्रीम कोर्ट से जमानत खारिज, फिर भी डेढ़ साल से आरोपी पकड़ से बाहर क्यों: हाईकोर्ट
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हाईकोर्ट ने आपराधिक मामले के आरोपी की गिरफ्तारी में देरी पर तल्ख टिप्पणी कर पंजाब डीजीपी को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ पूछा कि जब आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका सत्र अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक खारिज हो चुकी है, तो आखिर वह जांच ए
जस्टिस दीपक गुप्ता ने आरोपी पर ~50 हजार का जुर्माना लगाकर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने साफ किया कि जांच पूरी होना या चालान पेश करना परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं है, जिसके आधार पर खारिज हो चुकी जमानत की मांग को फिर से सुना जाए। कोर्ट ने डीजीपी से मामले की निष्पक्ष जांच करने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अदालती आदेशों का पालन हो। यदि कहीं लापरवाही या चूक मिली, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। कोर्ट ने बिना किसी ठोस बदलाव के बार बार अग्रिम जमानत याचिका दायर करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई। इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और अदालत का बहुमूल्य समय नष्ट करना बताया गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज हुए डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी गिरफ्तारी न होना जांच एजेंसी की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। मामला 30 नवंबर, 2024 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की आर्थिक अपराध शाखा लुधियाना में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। आरोपी पर धोखाधड़ी, जबरन वसूली, जालसाजी और आपराधिक साजिश के गंभीर आरोप हैं।
लुधियाना विजिलेंस ब्यूरो का मामला, डीजीपी को दो-टूक
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