पासपोर्ट, वीजा टेंडर रद्द करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को केंद्र ने दिया चुनौती
दिल्ली हाई कोर्ट ने पासपोर्ट और वीजा टेंडरिंग में मनमानी, तर्कहीनता और कम पारदर्शिता के कारण निविदा प्रक्रिया को रद्द किया था, जिनका विरोध केंद्र सरकार ने किया और अब इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए हैं।

सौजन्य से:- द इकोनॉमिक टाइम्स
इस मामले का उल्लेख शुक्रवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने किया। पीठ इस मामले को सोमवार को सूचीबद्ध करने पर सहमत हुई।
इस सप्ताह की शुरुआत में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने तकनीकी मूल्यांकन प्रक्रिया और निविदा के परिणामी पुरस्कार को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि मूल्यांकन में मनमानी, तर्कहीनता और पारदर्शिता की कमी है।
उच्च न्यायालय ने दो बोलीदाताओं, ट्रैवल टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म ईट्रैव टेक और डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणन प्राधिकरण वेरासिस द्वारा दायर याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया।
दोनों कंपनियों ने निविदा प्रक्रिया के तकनीकी-बोली चरण में अपनी अयोग्यता को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि उनके अंक मनमाने ढंग से और बिना किसी स्पष्टीकरण के काटे गए हैं। इसके कारण उन्हें वित्तीय मूल्यांकन के अगले चरण के लिए विचार करने से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
बोलीदाताओं ने केंद्रीय विदेश मंत्रालय (एमईए) द्वारा अपनाई गई निर्णय लेने की प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और निष्पक्षता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया। इस याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध किया था.
हालाँकि उच्च न्यायालय ने पाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया अपारदर्शी, मनमानी, प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई के सिद्धांतों के विपरीत थी। उच्च न्यायालय ने अंततः निष्कर्ष निकाला कि निविदा प्रक्रिया मनमानी, तर्कहीनता और पारदर्शिता की कमी से ग्रस्त है। परेशान होकर केंद्र ने अब सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है.
न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत
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