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सुप्रीम कोर्ट ने बताया- देश भर के पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के लिए तेजी से काम हो रहा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश भर के पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के लिए काफी प्रोग्रेस हुई है। कोर्ट ने केंद्र को CCTV लगाने के लिए फंडिंग स्कीम को बढ़ाने और लगाए गए कैमरों के मेंटेनेंस को लेकर दो हफ़्ते में निर्देश लेने के लिए कहा है।

22 जुलाई 2026 को 02:14 pm बजे
सुप्रीम कोर्ट ने बताया- देश भर के पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के लिए तेजी से काम हो रहा

सौजन्य से:- Jansatta

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि देश भर के पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के मामले में चीजें अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच को वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने बताया कि इस मामले में काफी प्रोग्रेस हुई है। बेंच ने कहा कि यह जानकर खुशी हुई कि इस मामले में चीजें बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही हैं और हमें सिद्धार्थ दवे को उनकी कोशिशों का क्रेडिट देना चाहिए। पिछले कुछ महीनों में चीजें पॉजिटिव मोड़ पर आई हैं।

CCTV का मामला कोर्ट ने लिया था स्वतः संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट पुलिस स्टेशनों में काम करने वाले CCTV की कमी से जुड़े एक मामले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा था। सुनवाई के दौरान बेंच ने दो मुद्दों पर ध्यान दिलाया- पहला पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के लिए फंडिंग स्कीम को बढ़ाना और दूसरा लगाए गए कैमरों का मेंटेनेंस।

केंद्र की ओर से पेश हुए लॉ ऑफिसर ने कहा कि वह इन पहलुओं पर निर्देश लेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने लॉ ऑफिसर को निर्देश लेने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया और मामले की सुनवाई 5 अगस्त के लिए पोस्ट कर दी। कोर्ट ने नोट किया कि एमिकस ने 11 जुलाई को केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के प्रतिनिधियों के साथ हुई मीटिंग के आधार पर एक नोट उसके सामने रखा है।

13 मई को एमिकस ने बेंच को बताया था कि ज़्यादातर राज्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और पुलिस स्टेशनों में CCTV लगाने के संबंध में काफी काम किया गया है। इससे पहले, CCTV लगाने के लिए राज्यों द्वारा फंड के इस्तेमाल से जुड़ा मुद्दा कोर्ट के सामने उठाया गया था। बेंच को बताया गया कि केंद्र UTs में 100 परसेंट और पहाड़ी राज्यों में 90 परसेंट फंड देता है। बताया गया कि बाकी राज्यों में केंद्र 60 फीसदी देता है, जबकि बाकी 40 फीसदी फंडिंग संबंधित राज्य द्वारा की जाती है।

CCTV कैमरे लगाने का कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने पहले एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लेने के बाद पुलिस स्टेशनों में काम न करने वाले CCTV की कमी पर खुद से केस दर्ज करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में मानवाधिकार के उल्लंघन को रोकने के लिए पुलिस स्टेशनों में CCTV कैमरे लगाने का आदेश दिया था।

दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI), एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) और नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) समेत जांच एजेंसियों के ऑफिस में CCTV कैमरे और रिकॉर्डिंग इक्विपमेंट लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा कि राज्यों और UTs को यह पक्का करना चाहिए कि हर पुलिस स्टेशन, सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट, मेन गेट, लॉक-अप, कॉरिडोर, लॉबी और रिसेप्शन के साथ-साथ लॉक-अप रूम के बाहर के एरिया में भी CCTV कैमरे लगाए जाएं ताकि कोई भी हिस्सा खुला न रहे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि CCTV सिस्टम में नाइट विजन होना चाहिए और उसमें ऑडियो के साथ-साथ वीडियो फुटेज भी होनी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और UTs के लिए ऐसे सिस्टम खरीदना ज़रूरी कर दिया था जो कम से कम एक साल तक डेटा स्टोर करने की इजाजत देते हों।

यह भी पढ़ें: जज ने पूर्व IAF अफसर को सुनाई चार महीने जेल की सजा, पूर्व डिप्टी आर्मी चीफ को कहा था कायर

गुरुग्राम की एक अदालत ने हाल ही में भारतीय वायु सेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन विनोद के. गांधी को मानहानि के मामले में चार महीने की जेल की सजा सुनाई। उन्होंने जंतर-मंतर पर रक्षा कर्मियों की ‘वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर हुए आंदोलन के दौरान रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राज कादियान को कायर कहा था। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…

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