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सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सीबीएसई द्वारा नौवीं कक्षा के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। डॉ. फौजिया खान ने नीति को मनमाना बताया और आरोप लगाया कि इसका एकमात्र व्यावहारिक असर दक्षिण भारतीय राज्यों में जबरन हिंदी और उत्तर भारत में अनिवार्य रूप से संस्कृत थोपना होगा।

9 जून 2026 को 05:32 pm बजे
सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

सौजन्य से:- Jagran

CBSE की त्रि-भाषा नीति के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, भाषा थोपने का आरोप

सीबीएसई द्वारा नौवीं कक्षा के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। ...और पढ़ें

HighLights

सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति सुप्रीम कोर्ट में चुनौती।

डॉ. फौजिया खान ने नीति को मनमाना बताया।

शिक्षकों की कमी और भाषा थोपने का आरोप।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सीबीएसई द्वारा एक जुलाई से नौवीं कक्षा के छात्रों के लिए दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। राकांपा (एनसीपी-एससीपी) नेता, शिक्षाविद् और महाराष्ट्र की पूर्व मंत्री डॉ. फौजिया खान ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर सीबीएसई के 15 मई के सर्कुलर को मनमाना और अनुचित बताया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि सीबीएसई ने शिक्षकों की कमी की बात स्वीकार करने के बावजूद इस नीति को लागू किया है।

क्या है पूरा मामला?

डॉ. खान का कहना है कि इसका एकमात्र व्यावहारिक असर दक्षिण भारतीय राज्यों में जबरन हिंदी और उत्तर भारत में अनिवार्य रूप से संस्कृत थोपना होगा, जिसका कोई स्पष्ट शैक्षिक आधार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि गैर-हिंदी राज्यों पर हिंदी या संस्कृत थोपना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले से जुड़ी एक अन्य मुख्य याचिका पर 27 मई को पहले ही नोटिस जारी कर चुका है।

CBSE का नया सर्कुलर

सीबीएसई के नए सर्कुलर के मुताबिक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ-एसई) 2023 के तहत एक जुलाई से कक्षा नौवीं के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि स्थानीय साहित्य को पूरक सामग्री के रूप में जोड़ा जाएगा और इसके दिशा-निर्देश 15 जून तक जारी किए जाएंगे।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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इसका मतलब क्या है

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई यह याचिका शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है, जो कि भाषा की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सिद्धांतों के बीच संतुलन की मांग करती है। यह याचिका न केवल सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति को चुनौती देती है, बल्कि यह भाषा थोपने के मुद्दे को भी उजागर करती है, जो कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में Stay पर विभाजित राय पैदा कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप, शिक्षा प्रणाली और राष्ट्रीय एकता पर इसके संभावित प्रभावों पर व्यापक विचार-विमर्श हो सकता है।

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