भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को सुनवाई करेगा. याचिकाकर्ता ने CBI जांच की मांग की है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. पुलिस मुठभेड़ में मरने वाले भरत तिवारी के शरीर में 5 गोलियां लगी थीं, जिसकी जांच की गई है. दिल्ली में ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ और चार सगे भाई-बहन गिरफ्तार हुए हैं.

सौजन्य से:- ABP News
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में कल सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई, याचिका में CBI जांच की मांग
Bharat Tiwari Encounter Case: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले याचिकाकर्ता का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक हत्या का मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट मंगलवार (30 जून) को सुनवाई करेगा. जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी ने SC में याचिका दाखिल कर CBI जांच की मांग की है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की गई है.
याचिका में मांग की गई है कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और मामले की जांच CBI से कराई जाए. याचिकाकर्ता का आरोप है कि भरत भूषण तिवारी की मौत एक हत्या का मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है.
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भरत तिवारी के शरीर में लगी थीं 5 गोलियां!
वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भरत तिवारी के शरीर में कुल 5 गोलियां लगी थीं. रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले को लेकर सवाल किए जा रहे हैं. साथ ही, न्याय की मांग कर रहे लोगों ने भी इस पर गंभीर प्रतिक्रिया दी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मृतक को लगी गोलियों के निशान शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पाए गए थे.
17 जून को पुलिस मुठभेड़ में गई थी भरत तिवारी की जान!
17 जून की सुबह भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस और भरत भूषण तिवारी के बीच मुठभेड़ हुई थी. पुलिस का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हुई. बता दें कि इस कथित पुलिस मुठभेड़ को लेकर इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला था.
विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर
भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरने में जुटा है और पीड़ित परिवार न्यायिक जांच के साथ-साथ कार्रवाई की मांग कर रहा है. राज्य सरकार की ओर से गठित न्यायिक जांच आयोग पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा के नेतृत्व में जांच कर रहा है.
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