बैंक लोन डिफॉल्ट पर सख्त कदम: SARFAESI Act के तहत वसूली की कार्रवाई तेज
बैंक लोन डिफॉल्ट के कारण बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए बैंक अब SARFAESI Act के तहत कड़े कदम उठा रहे हैं। छोटे और मध्यम व्यवसायों में नकदी प्रवाह की समस्या के कारण लोन डिफॉल्ट के मामले बढ़ रहे हैं।

बैंक लोन डिफॉल्ट के मामलों में बढ़ोतरी के बीच वित्तीय संस्थानों ने वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है। बैंकों द्वारा अब SARFAESI Act के तहत डिफॉल्टर खातों पर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में लोन न चुकाने पर खातों को Non-Performing Asset (NPA) घोषित कर दिया गया है, जिसके बाद बैंक ने संबंधित संपत्तियों पर कब्जा और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
SARFAESI Act के तहत बैंक पहले उधारकर्ता को 60 दिन का डिमांड नोटिस जारी करता है। इस अवधि में यदि कर्जदार बकाया राशि का भुगतान नहीं करता, तो बैंक को संपत्ति कब्जे का अधिकार मिल जाता है। नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद बैंक गिरवी रखी संपत्ति का कब्जा ले सकता है और सार्वजनिक नीलामी के जरिए उसे बेचकर बकाया लोन की वसूली करता है।
कानून के तहत डिफॉल्टर को भी सुरक्षा दी गई है। वह बैंक नोटिस का जवाब दे सकता है, Debt Recovery Tribunal (DRT) में अपील कर सकता है और यदि बैंक की कार्रवाई अनुचित हो तो उसे चुनौती भी दे सकता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और मध्यम व्यवसायों में नकदी प्रवाह की समस्या के कारण लोन डिफॉल्ट के मामले बढ़ रहे हैं।
सूत्र: न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, बैंक अब रिकवरी प्रक्रिया को और तेज और डिजिटल बना रहे हैं। SARFAESI Act बैंकों को मजबूत रिकवरी अधिकार देता है, लेकिन साथ ही यह उधारकर्ताओं को कानूनी राहत का अवसर भी प्रदान करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर समाधान और बैंक से संवाद ही सबसे बेहतर विकल्प है
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