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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची की कस्टडी पिता के पास रखी, मां से इनकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची की कस्टडी को पिता के पास बेहतर मानकर दिया है। अदालत ने मां से इनकार करने के बाद बच्ची को उसके पिता के पास रहने की अनुमति दी।

13 अगस्त 2026 को 01:58 pm बजे
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची की कस्टडी पिता के पास रखी, मां से इनकार

सौजन्य से:- जागरण

इलाहाबाद उच्च न्यायालय : अदालत में 7 वर्षीय बच्ची ने मां को पहचानने से किया इन्कार, कस्टडी पिता के पास बरकरार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 7 वर्षीय बच्ची की कस्टडी उसके पिता को दी, क्योंकि बच्ची ने मां को पहचानने से इनकार कर दिया और पिता के साथ रहने की इच्छा जताई। ...और पढ़ें

मुख्य बातें

- कोर्ट का निर्देश- मां छुट्टियों में बच्ची को अस्थायी रूप से अपने पास रख सकेगी

- कौशांबी जनपद का मामला, पश्चिम शरीरा थाना पुलिस ने कोर्ट में किया था पेश

- इलाहाबाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित की

विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कौशांबी निवासी सात वर्षीय बच्ची अनुष्का की कस्टडी उसके पिता सतेंद्र कुमार के पास बरकरार रखी है। पश्चिम शरीरा थाने की पुलिस ने कोर्ट के 30 जुलाई 2026 के आदेश के तहत बच्ची को अदालत में पेश किया था।

न्यायमूर्ति ने बच्ची से सीधे बातचीत की

गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप जैन ने बच्ची से सीधे बातचीत की। उसने बताया कि वह कक्षा एक में पढ़ती है और अपने पिता संग रहने में सहज है। बच्ची ने अपनी मां अर्चना को पहचानने तक से इन्कार कर दिया और स्पष्ट कहा कि वह उनके साथ नहीं रहना चाहती। बच्ची की इच्छा जानने के बाद कोर्ट ने निर्णय सुनाया और अनुष्का व अन्य की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका निस्तारित कर दी।

यह है पूरा मामला

अर्चना (याची क्रमांक दो) ने अदालत को बताया कि पति ने उसके साथ क्रूरता की और उसे ससुराल से निकाल दिया। इसके बाद वह अपने पिता-भाई के साथ रह रही है और सिलाई तथा सब्जी की दुकान से रोजाना करीब 500 रुपये कमाती है। उसने आरोप लगाया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है।विपक्षी सतेंद्र कुमार ने आरोपों से इन्कार करते हुए यह स्वीकार किया कि वह दूसरी महिला सीमा देवी के साथ लिव-इन में रह रहा है, जिससे दो बच्चे भी हुए हैं। उसने बच्ची की अच्छी परवरिश और स्कूली पढ़ाई का दावा किया।

कोर्ट ने मां को बेटी से मुलाकात का अधिकार दिया

कोर्ट ने बच्ची की भावनात्मक स्थिति और उसकी इच्छा को ध्यान में रखते हुए कहा कि अभी उसकी कस्टडी मां को सौंपना बच्ची के लिए मानसिक रूप से कष्टकारी हो सकता है। हालांकि मां-बेटी के बीच भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने के लिए अदालत ने मां को मुलाकात का अधिकार दिया है । वह रोज शाम छह से रात नौ बजे के बीच वीडियो कॉल पर बात कर सकेगी और स्कूल की छुट्टियों में बच्ची को अस्थायी रूप से अपने पास रख सकेगी।

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'मुलाकात-बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हो'

अदालत ने सतेंद्र को अपनी एक और छोटी बेटी (जो फिलहाल अर्चना के पास है) से मिलने का अधिकार दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस अधीक्षक तथा थाना प्रभारी (प्रतिवादी संख्या 2 और 3) को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि मुलाकात और बातचीत अच्छे और सौहार्दपूर्ण माहौल में हो।

न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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