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दिवंगत पति की संपत्ति में नाबालिग बेटियों का हिस्सा बेचने की अनुमति

एक विधवा को अपनी दोनों नाबालिग बेटियों की संपत्ति में हिस्सा बेचने की अनुमति दी गई है। पारिवारिक मामले में अदालत ने यह फैसला सुनाया है।

13 अगस्त 2026 को 02:57 pm बजे
दिवंगत पति की संपत्ति में नाबालिग बेटियों का हिस्सा बेचने की अनुमति

सौजन्य से:- अमर उजाला

नोएडा समाचार: अदालत ने मां को दी संपत्ति बेचने की इजाजत

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(अदालत से)

- अदालत ने नाबालिग बेटियों के हिस्से की प्रॉपर्टी बेचने को दी मंजूरी

माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने एक पारिवारिक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए एक विधवा को अपनी दोनों नाबालिग बेटियों की संपत्ति में हिस्सा बेचने की अनुमति दी है। मामले के अनुसार नोएडा सेक्टर-62 स्थित रजत विहार निवासी श्रद्धा यादव ने अपने दिवंगत पति विकास यादव की नाबालिग बेटियों निष्ठा और नव्या यादव की ओर से यह याचिका दाखिल की थी।

अर्जी में बताया गया कि संपत्ति श्रद्धा यादव और उनके पति विकास यादव के नाम आवंटित हुई थी। 30 अक्तूबर 2011 को विकास यादव के निधन के बाद श्रद्धा यादव और उनकी दोनों बेटियां संपत्ति की उत्तराधिकारी और हिस्सेदार बन गईं। पति की मृत्यु के बाद परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा, जिससे बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का खर्च चलाना मुश्किल हो गया।

वहीं प्रतिपक्षी पुष्पा यादव ने अदालत में लिखित बयान देकर अर्जी पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिग बच्चों की जरूरतों को देखते हुए उनकी हिस्सेदारी की संपत्ति बेचने की आवश्यकता है। बच्चियां स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। जिस पर फीस के अलावा अन्य नियमित खर्च भी आता है। मां ही अपने बच्चों की भलाई तय करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होती है।

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- अदालत ने नाबालिग बेटियों के हिस्से की प्रॉपर्टी बेचने को दी मंजूरी

माई सिटी रिपोर्टर

ग्रेटर नोएडा। सत्र अदालत ने एक पारिवारिक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए एक विधवा को अपनी दोनों नाबालिग बेटियों की संपत्ति में हिस्सा बेचने की अनुमति दी है। मामले के अनुसार नोएडा सेक्टर-62 स्थित रजत विहार निवासी श्रद्धा यादव ने अपने दिवंगत पति विकास यादव की नाबालिग बेटियों निष्ठा और नव्या यादव की ओर से यह याचिका दाखिल की थी।

अर्जी में बताया गया कि संपत्ति श्रद्धा यादव और उनके पति विकास यादव के नाम आवंटित हुई थी। 30 अक्तूबर 2011 को विकास यादव के निधन के बाद श्रद्धा यादव और उनकी दोनों बेटियां संपत्ति की उत्तराधिकारी और हिस्सेदार बन गईं। पति की मृत्यु के बाद परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा, जिससे बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई का खर्च चलाना मुश्किल हो गया।

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वहीं प्रतिपक्षी पुष्पा यादव ने अदालत में लिखित बयान देकर अर्जी पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि नाबालिग बच्चों की जरूरतों को देखते हुए उनकी हिस्सेदारी की संपत्ति बेचने की आवश्यकता है। बच्चियां स्कूल में पढ़ाई कर रही हैं। जिस पर फीस के अलावा अन्य नियमित खर्च भी आता है। मां ही अपने बच्चों की भलाई तय करने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति होती है।

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न्याय 247 न्यूज़ द्वारा प्रस्तुत

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