कानून
लोकतंत्र का मोहताज भरोसा: कानून, व्यवस्था और संस्थानों की जिम्मेदारी
लोकतांत्रिक समाज में कानून व्यवस्था और संस्थानों पर लोगों का भरोसा एक संतुलन का विषय है। लोगों को कानून के तहत सुरक्षा की अपेक्षा होती है, लेकिन अगर संस्थान इसमें विफल हो जाते हैं, तो भरोसा समाप्त हो जाता है। हमें यह समझना होगा कि लोकतांत्रिक समाज में कानून और संस्थानों के बीच कितना समझौता करना होता है।

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लोकतांत्रिक समाज में कानून व्यवस्था और संस्थानों पर लोगों का भरोसा, इसके बीच में संतुलन कैसे देखा जाए?
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